अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर का बुधवार को जम्मू-कश्मीर दौरा केवल एक कूटनीतिक मुलाकात तक सीमित नहीं रहा. श्रीनगर में सीएम उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद गोर ने जो कहा, उससे ज्यादा अहम कूटनीतिक नजरिए से यह भी माना जा रहा है कि उन्होंने क्या नहीं कहा.
सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर को लेकर कहा, 'यह भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.' उनके बयान में न 'विवादित क्षेत्र' जैसे किसी शब्द का इस्तेमाल हुआ, न 'कश्मीर मुद्दे' का जिक्र आया और न ही पाकिस्तान का नाम लिया गया. खास बात यह है कि गोर केवल अमेरिकी राजदूत नहीं, बल्कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साउथ और मध्य एशिया के विशेष दूत भी हैं. ऐसे में उनके शब्दों का चयन महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद गोर ने कहा कि पहली बार यहां आना उनके लिए खुशी की बात है. उन्होंने जम्मू-कश्मीर को बेहद खूबसूरत जगह बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के साथ उनकी बहुत अच्छी बैठक हुई है. कुछ मुद्दों पर आगे काम किया जाना है और वह इससे जुड़ी बातों को वॉशिंगटन और दिल्ली लेकर जाएंगे.
ट्रंप के करीबी माने जाते हैं सर्जियो गोर
गोर कोई करियर डिप्लोमैट नहीं हैं. उन्हें राष्ट्रपति ट्रंप का करीबी माना जाता है. अगस्त 2025 में भारत में राजदूत पद के लिए नामित किए जाने से पहले वह व्हाइट हाउस के Presidential Personnel Office का नेतृत्व कर चुके हैं. भारत में राजदूत होने के साथ उन्हें दक्षिण और मध्य एशिया के लिए विशेष दूत की जिम्मेदारी भी मिली हुई है.
यही वजह है कि कश्मीर घाटी से दिया गया उनका बयान ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है. कश्मीर को लेकर अमेरिका लंबे समय से भारत और पाकिस्तान के बीच इसे द्विपक्षीय विषय बताता रहा है. भारत का भी स्पष्ट रुख है कि 1972 के शिमला समझौते के मुताबिक दोनों देशों के लंबित मुद्दों को द्विपक्षीय तरीके से ही सुलझाया जाना है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की भूमिका की गुंजाइश नहीं है.
हालांकि, ट्रंप अपने पिछले और मौजूदा कार्यकाल में कश्मीर को लेकर मध्यस्थता की पेशकश कर चुके हैं. जुलाई 2019 में उन्होंने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे कश्मीर पर मध्यस्थता करने को कहा था.
भारत सरकार ने इस दावे को खारिज कर दिया था. मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव के बाद भी ट्रंप ने दोनों देशों के बीच संघर्ष रुकवाने में अमेरिकी भूमिका का दावा किया था और कश्मीर के समाधान में मदद की पेशकश की थी. भारत ने तब भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से इनकार करते हुए अपना द्विपक्षीय समाधान वाला रुख दोहराया था.
पाकिस्तान और मध्यस्थता पर गोर की चुप्पी अहम क्यों?
इसी पृष्ठभूमि में श्रीनगर में गोर का पाकिस्तान या मध्यस्थता का जिक्र नहीं करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है. उनके बयान को अमेरिका की तरफ से भारत के प्रति एक सकारात्मक कूटनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा सकता है. इस दौरे की अहमियत इसके समय और स्तर से भी बढ़ जाती है.
इससे पहले 2011 में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत टिमोथी रोमर ने जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी. केनेथ जस्टर ने भी 2018 और बाद में 2020 में जम्मू-कश्मीर का दौरा किया था. हालांकि, गोर की राष्ट्रपति ट्रंप से करीबी और उनके विशेष दूत के अतिरिक्त पद के कारण मौजूदा यात्रा को अलग नजरिए से देखा जा रहा है.
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अमेरिकी ट्रैवल एडवाइजरी में बदलाव के संकेत
गोर ने जम्मू-कश्मीर को लेकर अमेरिकी ट्रैवल एडवाइजरी पर भी महत्वपूर्ण संकेत दिया. उन्होंने कहा कि अमेरिका समय-समय पर अपनी यात्रा संबंधी चेतावनियों की समीक्षा करता है. फिलहाल वह कोई बड़ी घोषणा नहीं कर सकते, लेकिन मौजूदा एडवाइजरी की समीक्षा की जाएगी.
उन्होंने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति में सुधार का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार, मुख्यमंत्री और स्थानीय प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों की सराहना की. गोर ने कहा कि क्षेत्र को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं और अमेरिका इस बात पर विचार करेगा कि मौजूदा यात्रा चेतावनी को कम किया जा सकता है या नहीं.
उन्होंने जम्मू-कश्मीर को खूबसूरत क्षेत्र बताते हुए कहा कि बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिक यहां आकर इसकी खूबसूरती और मौजूद अवसरों को देखना पसंद करेंगे. ट्रैवल एडवाइजरी को लेकर गोर ने कोई समयसीमा या गारंटी नहीं दी, लेकिन एक मौजूदा अमेरिकी राजदूत की ओर से सार्वजनिक रूप से इसकी समीक्षा और संभावित बदलाव की बात किया जाना अपने आप में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है.
उमर अब्दुल्ला बोले- अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ाने पर हुई चर्चा
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी गोर के साथ बैठक को सकारात्मक बताया. उन्होंने कहा कि दोनों के बीच जम्मू-कश्मीर और अमेरिका के बीच संपर्क को व्यापक और मजबूत बनाने की संभावनाओं पर अच्छी बातचीत हुई. उमर अब्दुल्ला के मुताबिक, चर्चा में खासतौर पर पर्यटन, बागवानी और नई अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर बात हुई. उन्होंने कहा कि वह इस संवाद को आगे जारी रखने और बातचीत को ठोस दिशा देने की उम्मीद करते हैं.
सर्जियो गोर की श्रीनगर यात्रा और वहां दिए गए बयान पर पाकिस्तान की भी नजर रहने की संभावना है. खासकर जम्मू-कश्मीर को 'भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा' बताने, पाकिस्तान या मध्यस्थता का जिक्र नहीं करने और अमेरिकी ट्रैवल एडवाइजरी में संभावित ढील के संकेत ने इस दौरे को सामान्य कूटनीतिक यात्रा से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण बना दिया है.
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि गोर श्रीनगर से मिले फीडबैक को वॉशिंगटन में किस तरह आगे बढ़ाते हैं और अमेरिकी प्रशासन की जम्मू-कश्मीर नीति में इसका कोई व्यावहारिक असर दिखाई देता है या नहीं.