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एक शंकराचार्य को स्नान कराने के लिए पूरा देश विवादों में डुबकी क्यों लगा रहा है?

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज तो छोड़ दिया है, लेकिन माघ मेला प्रशासन के साथ हुए टकराव को लेकर तनाव बरकरार है. अपने अपने दावों को लेकर दोनों पक्ष आपने सामने है. निशाने पर यूपी में सत्ताधारी बीजेपी है, इसलिए विपक्ष भी बहती गंगा में रगड़ रगड़कर हाथ धो रहा है.

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच जारी विवाद का अंत क्या है? (Photo: PTI)
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच जारी विवाद का अंत क्या है? (Photo: PTI)

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और माघ मेला प्रशासन में सीधा टकराव 11 दिन तक चला. 28 जनवरी की सुबह शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेला शिविर छोड़ दिया, और देर शाम अपने मठ पहुंच गए. श्रीविद्या मठ वाराणसी के केदारघाट मोहल्ले में है.

प्रयागराज से वाराणसी पहुंच जाने के बावजूद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच का विवाद खत्म होने की जगह आगे बढ़ने लगा है. दोनों पक्षों के अपने अपने दावे हैं. एक पक्ष दावा कर रहा है, तो दूसरा सीधे सीधे खारिज कर दे रहा है.   

सरकारी अफसर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी के उस दावे को खारिज कर रहे हैं, जिसमें कहा गया है कि प्रयागराज प्रशासन शंकराचार्य को मनाने की कोशिश कर रहा है. अफसरों ने इस बात से भी इनकार किया है कि प्रशासन की तरफ से शंकराचार्य को ससम्मान माघ मेला स्नान कराने का कोई प्लान भी है. 

शिविर छोड़ने से पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी कहा था, '... मुझे माघ मेला प्रशासन की ओर से एक पत्र और प्रस्ताव भेजा गया... कहा गया कि मुझे पूरे सम्मान के साथ पालकी से संगम ले जाकर स्नान कराया जाएगा... मुझ पर फूल बरसाए जाएंगे, लेकिन मैंने प्रस्ताव को ठुकरा दिया.'

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ऐसे में जबकि मौनी अमावस्या की घटना का मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंच चुका है, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद दुर्व्यवहार करने वाले सरकारी मुलाजिमों की माफी पर तो अड़े ही हैं, साथ में एक नई डिमांड भी रख दी है - शंकराचार्यों के स्नान के लिए सरकार की तरफ से प्रोटोकॉल बनाए जाएं. 

सत्ता पक्ष और धर्माचार्यों की तकरार में विपक्ष को राजनीतिक अवसर मिल गया है. परेशान तो सत्ता पक्ष भी है, लिहाजा मामले को जल्द से जल्द रफा दफा करने के प्रयास जारी हैं. अफसर चाहते हैं कि मामला शांत भी हो जाए, लेकिन माफी मांगने के लिए तैयार नहीं हैं - और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिष्यों और बटुकों के साथ हुए दुर्व्यवहार के लिए समझौते को तैयार नहीं हैं. जाने से पहले ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा भी, मैं अगर प्रशासन की बातें स्वीकार कर लेता, तब बटुक और शिष्यों के साथ हुई अभद्रता और मारपीट की घटना का क्या होता?

शंकराचार्य के स्नान के लिए प्रोटोकॉल बने

माघ मेले के महत्वपूर्ण स्नान तो बीत चुके हैं, लेकिन अब भी 2 विशेष स्नान बाकी हैं. 15 फरवरी तक चलने वाले माघ मेला में मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी के बाद अभी दो विशेष स्नान बचे हुए हैं. 1 फरवरी को माघी पूर्णिमा, और 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का स्नान है. 

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बिना स्नान किए ही शिविर छोड़ दिया और वाराणसी में अपने मठ पहुंच गए. जाते जाते स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि उनकी जिंदगी में पहले भी कई दुखद वक्त आए हैं. लेकिन मौजूदा स्थिति, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार और प्रशासन की तरफ से सनातन धर्मियों को चोट पहुंची है, उनको सबसे ज्यादा तकलीफ दे रही है.

मौनी अमावस्या के अवसर पर पालकी के साथ स्नान के लिए जाने से पुलिस ने रोक दिया था, फिर माघ मेला प्रशासन देख रहे अफसर ने उनसे उनके शंकराचार्य होने का सर्टिफिकेट मांग लिया और उसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक धार्मिक कार्यक्रम में उनको कालनेमि की संज्ञा दे डाली - रही सही कसर पूरी कर दी आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने, योगी आदित्यनाथ के बयान का समर्थन करके. 

18 जनवरी की घटना के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठ गए थे. रिपोर्ट के अनुसार, 19 जनवरी की रात 12 बजे कानूनगो अनिल कुमार माघ मेला में अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर पहुंचे. जब शंकराचार्य के शिष्यों से नोटिस लेने के लिए कहा, तो ये बोलकर नोटिस लेने से मना कर दिया कि रात में कोई नहीं है, सुबह आइए. फिर 20 जनवरी को सुबह कानूनगो शंकराचार्य के शिविर पहुंचे, और गेट पर नोटिस चस्पा कर दिया. नोटिस मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ओर से जारी किया गया था. नोटिस का जवाब शंकराचार्य के वकील की तरफ से दे दिया गया. 

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने वकील के माध्यम से नोटिस का जवाब तो पहले ही दे दिया था, मौनी अमावस्या का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट भी पहुंच गया है. एडवोकेट गौरव द्विवेदी ने घटना को लेकर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को लेटर-पिटिशन भेजा है. लेटर-पिटीशन के माध्यम से मौनी अमावस्या की घटना की सीबीआई से जांच कराने, प्रयागराज कमिश्नर, डीएम, पुलिस कमिश्नर और मेला अधिकारी को सस्पेंड करने का आदेश देने - और नाबालिग बटुकों की पिटाई करने के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने की भी मांग की गई है.

खुद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भी अपनी पुरानी मांग पर अड़े हुए हैं, और लगे हाथ उत्तर प्रदेश सरकार के सामने एक नई डिमांड भी रख दी है. 

1. पहली मांग तो वही है कि मौनी अमावस्या के दिन हुए दुर्व्यवहार के लिए जिम्मेदार अधिकारी लिखित तौर पर माफी मांगें. 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी योगीराज सरकार का कहना है कि प्रशासन के बड़े अफसर शंकराचार्य को स्नान के लिए मनाने की कोशिश में जुटे हैं. योगीराज सरकार के अनुसार, अगर प्रशासन शर्तें स्वीकार करता है, तो अधिकारी शंकराचार्य को वाराणसी पहुंचकर मनाएंगे और ससम्मान प्रयागराज लाकर स्नान कराएंगे.

एक मीडिया रिपोर्ट में योगीराज सरकार के हवाले से बताया गया है कि मेला प्रशासन की ओर से यह स्वीकार किया गया कि गलती हुई है, लेकिन ये सब भीड़ को कंट्रोल करने के क्रम में हुआ. रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी खेद जताने को तो तैयार हैं, लेकिन सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने के लिए कतई तैयार नहीं हैं. लिखित माफी तो बाद की बात है. 

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2. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की नई मांग है, चारों शंकराचार्यों के लिए स्नान के लिए एक स्थाई प्रोटोकॉल तैयार किया जाए. चारों शंकराचार्य के स्नान के लिए स्थाई तौर पर एक SOP यानी मानक संचालन प्रक्रिया भी बनाए जाने की मांग की गई है.

शंकराचार्य के स्नान करने/न करने पर राजनीति

विवाद के बीच यूपी के दो अफसरों का इस्तीफा भी खासा चर्चित रहा. इस्तीफे के काउंटर में इस्तीफा. एक शंकराचार्य से दुर्व्यवहार के खिलाफ, तो दूसरा शंकराचार्य के बयान के खिलाफ. बरेली के एसडीएम रहे अलंकार अग्निहोत्री ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के सपोर्ट में, तो अयोध्या में जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने विरोध में इस्तीफे की घोषणा कर डाली. 

मौजूदा तकरार में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने बहती गंगा में हाथ धोया, तो बाकी लोग विवादों की डुबकी लगाते नजर आ रहे हैं. यूपी में सत्ताधारी बीजेपी करीब करीब खामोश है, और संघ सपोर्ट में खड़ा नजर आ रहा है. निशाने पर बीजेपी है, इसलिए विपक्ष मौके का पूरा फायदा उठा रहा है.

विवाद के बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का पूरा समर्थन मिला है. यूपी विधानसभा में विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडेय माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मिलने गए थे. उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय और प्रयागराज के सांसद उज्ज्वल रमण सिंह अपने पिता रेवती रमण के साथ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात कर चुके हैं. 

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समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल साइट X पर लिखा है, 'आहत संत अर्थात सत्ता का अंत!'

अखिलेश यादव का कहना है, संतों का मन दुखी करके कोई सुख नहीं पा सकता... भूल करने से बड़ी गलती, क्षमा न मांगना है. कोई भी राजनीतिक पद, संतों के मान से बड़ा नहीं हो सकता... भाजपा सनातन की भी सगी नहीं है... आज हर सनातनी मन से बेहद दुखी है.

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