माघ मेला, एक वार्षिक उत्सव है. माघ, जनवरी या फरवरी में पड़ता है. इस महीने में नदी के किनारे और मंदिरों के पास पवित्र तालाबों के पास मेले लगते हैं और स्नान किया जाता है. लेकिन, पुराणों के मुताबिक लगभग हर बारह साल में जब, बृहस्पति, सूर्य और चंद्रमा की ज्योतिषीय शुभ स्थिति बनती है, तब माघ मेला का आयोजन किया जाता है और श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, जिसे कुंभ मेला या कुंभ स्नान कहा जाता है.
मान्यता है कि माघ में किए गए पवित्र नदियों में स्नान से पूर्व जन्म के पापों से छुटकारा मिलता है. यह एक प्रायश्चित का एक साधन बन जाता है. साथ ही, पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति और मोक्ष मिल जाती है.
माघ मेला पर्व का उल्लेख महाभारत और कई प्रमुख पुराणों में मिलता है.
माघ मेला 2026 में प्रयागराज के संगम तट पर कड़ाके की ठंड के बावजूद लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में पवित्र स्नान कर अपनी आस्था का प्रदर्शन कर रहे हैं. मकर संक्रांति के आगमन से पहले प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ किया है ताकि सभी श्रद्धालु सुरक्षित रूप से मेले का आनंद उठा सकें. इस बार माघ मेले में 10,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं, जिनमें पीएसी, आरएएफ, पैरामिलिट्री फोर्स, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जल पुलिस और गोताखोर शामिल हैं.
अगर आप माघ मेला 2026 में संगम स्नान के साथ प्रयागराज की असली रौनक महसूस करना चाहते हैं, तो मेले की गलियों में मिलने वाले इन 5 देसी जायकों को नजरअंदाज न करें. कड़कड़ाती ठंड में इनका तगड़ा स्वाद चखे बिना आपकी प्रयागराज ट्रिप अधूरी ही रहेगी.
माघ मेले में 65 वर्षीय बाबा स्वामी अमोहा नंद महाराज इस वक्त सुर्खियों में हैं. वह पूरा माघ मेला सिर्फ स्कूटी से घूमते हैं. खास बात यह है कि उनका हेलमेट भी केसरिया रंग का है. जिस पर हनुमान जी, राम मंदिर समेत कई अन्य झंडियों की तस्वीरें लगी हैं.
प्रयागराज में संगम की रेती पर लगने वाले माघ मेले में साधु-संतों के रूप के अलावा कई ऐसे चेहरे भी दिखते हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन भगवान के नाम समर्पित कर दिया है. इन्हीं में से एक हैं 65 वर्षीय स्वामी अमोहा नंद महाराज. वे स्कूटी पर मेला क्षेत्र में घूमते नजर आते हैं. उनके सिर पर केसरिया रंग का हेलमेट है, जिसमें भगवान हनुमान जी, राम मंदिर और अनेक झंडियों की तस्वीरें लगी हैं. हनुमान जी से उनका विशेष लगाव है.
माघ मेला में संगम तट पर साधु-संतों का हर रूप-रंग भक्ति की छटा बिखेरती है. इस बार सेक्टर-6 के अंतिम छोर पर एक ऐसा कैंप लगा है, जिसका बैनर पढ़कर हर राहगीर मुस्कुरा उठता है और आगे बढ़ जाता है. बैनर पर लिखा है फटीचर बाबा का रामराम. यह नाम इतना सच्चा और सरल है कि श्रद्धा जगाता है. साथ ही चेहरे पर हंसी भी ला देता है. फटीचर बाबा का रामराम नाम और सादगी की अनोखी मिसाल वाला ये कैंप राम नाम पर पूरी तरह समर्पित है.
प्रयागराज में हर वर्ष लगने वाले माघ मेले में भक्ति के अलग-अलग रंग देखने को मिलते हैं, जो देश और दुनिया को आकर्षित करते हैं. संगम तट पर हर वर्ष कई अखाड़ों के बाबा आते हैं, जो आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं. इस बार भी कई बाबा ऐसे हैं जो सुर्खियों में बने हुए हैं. इन्हीं बाबाओं में फटीचर बाबा का कैंप भी शामिल है.
माघ मेला 2026 की शुरुआत हो चुकी है और त्रिवेणी संगम पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. लेकिन जनवरी की कड़क ठंड और रेतीली जमीन पर लंबे समय तक रहना आसान नहीं. अपनी इस आस्था की यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए बैग पैक करते समय ये 5 चीजें साथ रखना न भूलें.
सीएम योगी ने प्रयागराज के दौरे के दौरान संगम में डुबकी लगाई और मंत्रियों के साथ साधु-संतों के साथ बोटिंग की. उन्होंने संगम नोज पर गंगा पूजा की और लेटे हनुमानजी मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की. इसके बाद ICCC सभागार में माघ मेले की समीक्षा बैठक की जिसमें मकर संक्रांति एवं मौनी अमावस्या जैसे प्रमुख स्नान पर्वों की तैयारियों को लेकर चर्चा की गई.
प्रयागराज के माघ मेले में आस्था के बीच सोशल मीडिया का रंग भी छाया हुआ है. माला बेचने वाली माही निषाद इन दिनों अपनी सादगी और मुस्कान की वजह से वायरल हो गई हैं. लोग उन्हें घेरकर सेल्फी ले रहे हैं, जिससे वह चर्चा में तो आ गई हैं, लेकिन उनकी रोजी-रोटी भी प्रभावित हो रही है.
प्रयागराज के माघ मेले में साधु-संतों की साधना के साथ उनका लग्जरी स्टाइल भी चर्चा में है. पीठ काशी के पीठाधीश्वर जगतगुरु महामंडलेश्वर संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा अपने वेश, ब्रांडेड चश्मे और तीन करोड़ से ज्यादा कीमत की लग्जरी कार को लेकर लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. बाबा के शिविर के बाहर खड़ी महंगी गाड़ी के साथ लोग सेल्फी लेते नजर आ रहे हैं.
माघ मेला 2026 में संगम क्षेत्र तक पहुंच और आवाजाही को लेकर बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए कई स्तरों पर सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं. श्रद्धालु इन सुविधाओं का लाभ कैसे उठा सकते हैं? इससे जुड़ी पूरी जानकारी यहां जानिए...
प्रयागराज का माघ मेला सिर्फ भक्ति का केंद्र नहीं, बल्कि फोटोग्राफी का भी शानदार मौका है. यहां कई ऐसी जगहें हैं, जो मेले की असली खूबसूरती कैमरे में उतारने के लिए परफेक्ट हैं. यादगार और इंस्टाग्राम-योग्य तस्वीरें लेना हो, तो ये लोकेशंस मिस न करें.
Magh Mela 2026: मकर संक्रांति स्नान माघ मेले का सबसे प्रमुख अवसर माना जाता है. इस दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं, और इसे देवताओं का समय, अत्यंत शुभ और पुण्यकारी माना जाता है. इस बार यह स्नान 14 जनवरी को होगा.
संगम की पावन रेती पर लगे माघ मेले में उस वक्त खास नजारा देखने को मिला, जब इटली से आई लुक्रेजिया अपने पिता के साथ साधु-संतों के सानिध्य में पहुंचीं. सनातन धर्म को समझने आई विदेशी युवती ने बाबा को हाथ जोड़कर प्रणाम किया और 'जय श्रीराम' का जयकारा लगाकर अध्यात्म के प्रति अपना भाव प्रकट किया.
यूपी में प्रयागराज के संगम तट पर लगे माघ मेले में अध्यात्म के प्रति आकर्षण सुंदर तस्वीर देखने को मिली. इटली से आई युवती लुक्रेजिया अपने पिता के साथ माघ मेले में पहुंचीं, जहां उन्होंने साधु संतों के सानिध्य में बैठकर सनातन धर्म की परंपराओं और आध्यात्मिक गहराइयों को समझा. लुक्रेजिया अलग अलग संतों के शिविरों में जाकर योग और चर्चा करती नजर आईं.
माघ मेला 2026 के दौरान प्रयागराज आने वाले श्रद्धालुओं और यात्रियों के लिए ठहरने को लेकर तस्वीर पहले से काफी बदल चुकी है. संगम के आसपास अब ऐसे किफायती और भरोसेमंद विकल्प मौजूद हैं, जो बजट में भी फिट बैठते हैं और आराम का भरोसा भी देते हैं.
संगम की रेती पर प्रयागराज के माघ मेले में जहां अधिकतर पंडाल अस्थायी होते हैं, वहीं झूसी पुल के नीचे स्थित बाबा रामदास का पंडाल आस्था का स्थायी प्रतीक बन चुका है. देवरहा बाबा के शिष्य महंत रामदास के द्वारा संचालित यह पंडाल साल भर खड़ा रहता है. इसकी पहचान है चार मंजिला ऊंची अखंड ज्योति, जो पिछले 20 वर्षों से प्रज्ज्वलित है. बाढ़ और मौसम की चुनौतियों के बीच भी अडिग यह पंडाल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है.
माघ मेला 2026 के साथ एक बार फिर प्रयागराज आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है. इस शहर में ऐसी ऐतिहासिक जगहें हैं, जहां हर दीवार, हर रास्ता और हर पार्क इतिहास की कोई न कोई कहानी सुनाता है. अगर आप माघ मेले में घूमने का मन बना रहे हैं, तो इन जगहों की सैर जरूर करें, क्योंकि इन्हें देखे बिना आपकी प्रयागराज यात्रा अधूरी रह जाएगी.
प्रयागराज में माघ मेला 2026 की शुरुआत के साथ संगम नगरी में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है. ऐसे में इलाके में सुरक्षा को लेकर कड़ी व्यवस्था की गई है. इलाके में डॉग स्कॉड की भी उपस्थिति दिखी जो मौके पर सुरक्षा को लेकर हालात का जायजा ले रहे है.
पौष पूर्णिमा के प्रथम स्थान पर लगभग 31 लाख श्रद्धालुओं ने अमृत के जल में डुबकी लगाई और सौभाग्य प्राप्त किया. मेले में सभी व्यवस्थाएं सामान्य और सुचारू रूप से संचालित हुईं. श्रद्धालुओं और आचार्यों द्वारा व्यवस्थाओं की प्रशंसा की गई. भीड़ में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई और जहां भी कोई कमी पाई गई.
प्रयागराज में माघ मेला 2026 की शुरुआत के साथ ही संगम नगरी की ओर श्रद्धालुओं की आवाजाही तेज हो गई है. ऐसे में सवाल है कि किस रास्ते से पहुंचना ज्यादा आसान रहेगा और सफर के दौरान किन जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए.