माघ मेला, एक वार्षिक उत्सव है. माघ, जनवरी या फरवरी में पड़ता है. इस महीने में नदी के किनारे और मंदिरों के पास पवित्र तालाबों के पास मेले लगते हैं और स्नान किया जाता है. लेकिन, पुराणों के मुताबिक लगभग हर बारह साल में जब, बृहस्पति, सूर्य और चंद्रमा की ज्योतिषीय शुभ स्थिति बनती है, तब माघ मेला का आयोजन किया जाता है और श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, जिसे कुंभ मेला या कुंभ स्नान कहा जाता है.
मान्यता है कि माघ में किए गए पवित्र नदियों में स्नान से पूर्व जन्म के पापों से छुटकारा मिलता है. यह एक प्रायश्चित का एक साधन बन जाता है. साथ ही, पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति और मोक्ष मिल जाती है.
माघ मेला पर्व का उल्लेख महाभारत और कई प्रमुख पुराणों में मिलता है.
Satua Baba: प्रयागराज के माघ मेला 2026 में सतुआ बाबा की लग्जरी लाइफस्टाइल, महंगी गाड़ियां और भव्य पंडाल सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. मौनी बाबा ने इस पर उनका कड़ा विरोध किया और कहा कि संत समाज का असली स्वरूप त्याग, सेवा और संस्कार है, न कि वैभव और दिखावा.
प्रयागराज माघ मेले में डिफेंडर और पोर्शे जैसी महंगी गाड़ियों से चलने पर सुर्खियों में आए सतुआ बाबा ने विरोध करने वालों को चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि सनातन केवल धर्म नहीं, बल्कि अर्थ, शास्त्र, शस्त्र और रफ्तार का भी प्रतीक है. बाबा ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य विवाद नहीं, बल्कि अपने पड़ाव तक पहुंचना है. सतुआ बाबा ने स्पष्ट रूप से बताया कि इन गाड़ियों की स्पीड से किसको कुचल देंगे.
सतुआ बाबा माघ मेले में अपने भव्य पंडाल, चार्टर प्लेन में सफर, डिफेंडर-पोर्शे कारों के काफिले और हाथी-ऊंट की सवारी को लेकर इन दिनों चर्चा में हैं. सीएम योगी से करीबी, बेबाक राजनीतिक बयान, बांग्लादेश मुद्दे पर संतों की रणनीति और उनके शिविर में प्रयागराज डीएम के रोटी बनाने के वायरल वीडियो ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया है. सोशल मीडिया पर उनकी खूब बातें हाे रही हैं.
माघ मेले में चर्चाओं के केंद्र बने सतुआ बाबा ने आज तक से खास बातचीत में अपनी लग्ज़री गाड़ियों, डीएम के रोटी बनाने के वायरल वीडियो, सीएम योगी आदित्यनाथ से रिश्तों और बांग्लादेश मुद्दे पर खुलकर बातचीत की. उन्होंने पहली बार बताया कि आखिर आश्रम में डीएम ने रोटी क्यों बनवाई . बाबा ने इस पर सफाई भी दी. उन्होंने ये भी ऐलान किया कि अगर जरूरत पड़ी तो साधु-संत बांग्लादेश भी कूच करेंगे.
मकर संक्रांति पर प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में अद्भुत नजारा देखने को मिला. आधी रात से ही गंगा और संगम तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. प्रशासन के अनुसार, आज गुरुवार की सुबह 10 बजे तक 36 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया, जबकि शाम तक यह संख्या एक करोड़ के पार जाने का अनुमान है.
प्रयागराज में संगम की रेती पर माघ मेला चल रहा है. यहां इस बार गूगल गोल्डन बाबा श्रद्धालुओं के बीच खास आकर्षण बने हुए हैं. बाबा सिर से पांव तक करीब 5 करोड़ के सोने-चांदी के आभूषण पहनते हैं. बाबा चांदी के बर्तन में भोजन करते हैं, और चांदी के पात्र में ही पानी पीते हैं. पहले पांच लाख की चांदी की चप्पलें पहनते थे, मगर एक संकल्प के साथ चप्पलें त्याग दीं.
Magh Bihu 2026 Wishes in Hindi: माघ बिहू असम के प्रमुख त्योहारों में से एक है. नई फसल की बुवाई और कटाई के चक्र का जश्न माघ बिहू के रूप में मनाया जाता है. इस दिन अग्नि देव की पूजा का विधान है. माघ बिहू के इस शुभ अवसर को खास बनाने के लिए आप अपने प्रियजनों को सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना से भरपूर मैसेज भेजकर माघ बिहू की शुभकामनाएं दे सकते हैं.
माघ मेला 2026 के साथ एक बार फिर प्रयागराज आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है. इस शहर में ऐसी ऐतिहासिक जगहें हैं, जहां हर दीवार, हर रास्ता और हर पार्क इतिहास की कोई न कोई कहानी सुनाता है. अगर आप माघ मेले में घूमने का मन बना रहे हैं, तो इन जगहों की सैर जरूर करें, क्योंकि इन्हें देखे बिना आपकी प्रयागराज यात्रा अधूरी रह जाएगी.
संगम के माघ मेले में इस बार हठ योगियों, साधु संतों और सन्यासियों की अनोखी साधनाएं लोगों का ध्यान खींच रही हैं. कोई सालों से एक हाथ उठाए तपस्या कर रहा है, तो कोई खड़े होकर साधना में लीन है. इसी बीच एक साधु ऐसे भी हैं, जिनकी साधना को देखकर लोग दांतों तले उंगलियां दबा रहे हैं.
प्रयागराज में माघ मेले के सेक्टर चार में बुधवार को आग लग गई. जानकारी के अनुसार संगम लोअर इलाके में लगे शिविरों में आग लगी, जिसमें छोटे-बड़े ब्रह्माश्रम के कई टेंट भी प्रभावित हुए. मौके पर तुरंत फायर ब्रिगेड की आठ गाड़ियां पहुंचीं और कड़ी मेहनत के बाद आग पर काबू पाया गया. इस हादसे में दो टेंट जलकर खाक हो गए.
प्रयागराज के माघ मेले के सेक्टर चार में लगे ब्रह्माश्रम शिविर में आग लगी जिसमें दो टेंट जलकर खाक हो गए. मौके पर आठ फायर टेंडर आग बुझाने में लगे थे. आग लगने के कारणों का पता अभी नहीं चला है लेकिन किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. तैयारी पूरी थी इसलिए जल्दी आग पर काबू पाया गया. माघ मेले में बढ़ती भीड़ और मकर संक्रांति के अवसर पर श्रद्धालु भारी संख्या में संगम तट पर आए.
सतुआ बाबा इन दिनों सोशल मीडिया पर डिफेंडर गाड़ी को लेकर चर्चा में हैं. प्रयागराज के माघ मेला क्षेत्र में आजतक से बातचीत में उन्होंने सारे सवालों का खुलकर जवाब दिया. उन्होंने कहा कि हमें न गाड़ी की कंपनी पता है, न कीमत. सतुआ बाबा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपनी नजदीकियों पर भी जवाब दिया. उनका कहना है कि साधन नहीं, लक्ष्य महत्वपूर्ण है और सनातन जोड़ने का संदेश देता है.
प्रयागराज के संगम तट पर चल रहे माघ मेले में भगवान शिव की भक्ति का दुर्लभ और रहस्यमय रंग देखने को मिला. अघोरेश्वर धाम के शिविर में जैसे ही जंगम जोगियों का आगमन हुआ, 'बम बम लहरी' के सुरों ने पूरे माहौल को शिवमय कर दिया. ये जंगम जोगी शैव परंपरा के दशनामी संन्यासियों के पुरोहित माने जाते हैं. उनकी अलौकिक वेशभूषा, टाली की गूंज और शिव स्तुति ने आध्यात्मिक ऊर्जा को और प्रबल कर दिया.
प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान 'पुत्रदा एकादशी' के शुभ अवसर पर संगम तट पर श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा. कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बावजूद, देश के कोने-कोने से आए भक्तों ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान किया.
माघ मेला 2026 में प्रयागराज के संगम तट पर कड़ाके की ठंड के बावजूद लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में पवित्र स्नान कर अपनी आस्था का प्रदर्शन कर रहे हैं. मकर संक्रांति के आगमन से पहले प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ किया है ताकि सभी श्रद्धालु सुरक्षित रूप से मेले का आनंद उठा सकें. इस बार माघ मेले में 10,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं, जिनमें पीएसी, आरएएफ, पैरामिलिट्री फोर्स, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जल पुलिस और गोताखोर शामिल हैं.
अगर आप माघ मेला 2026 में संगम स्नान के साथ प्रयागराज की असली रौनक महसूस करना चाहते हैं, तो मेले की गलियों में मिलने वाले इन 5 देसी जायकों को नजरअंदाज न करें. कड़कड़ाती ठंड में इनका तगड़ा स्वाद चखे बिना आपकी प्रयागराज ट्रिप अधूरी ही रहेगी.
माघ मेले में 65 वर्षीय बाबा स्वामी अमोहा नंद महाराज इस वक्त सुर्खियों में हैं. वह पूरा माघ मेला सिर्फ स्कूटी से घूमते हैं. खास बात यह है कि उनका हेलमेट भी केसरिया रंग का है. जिस पर हनुमान जी, राम मंदिर समेत कई अन्य झंडियों की तस्वीरें लगी हैं.
प्रयागराज में संगम की रेती पर लगने वाले माघ मेले में साधु-संतों के रूप के अलावा कई ऐसे चेहरे भी दिखते हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन भगवान के नाम समर्पित कर दिया है. इन्हीं में से एक हैं 65 वर्षीय स्वामी अमोहा नंद महाराज. वे स्कूटी पर मेला क्षेत्र में घूमते नजर आते हैं. उनके सिर पर केसरिया रंग का हेलमेट है, जिसमें भगवान हनुमान जी, राम मंदिर और अनेक झंडियों की तस्वीरें लगी हैं. हनुमान जी से उनका विशेष लगाव है.
माघ मेला में संगम तट पर साधु-संतों का हर रूप-रंग भक्ति की छटा बिखेरती है. इस बार सेक्टर-6 के अंतिम छोर पर एक ऐसा कैंप लगा है, जिसका बैनर पढ़कर हर राहगीर मुस्कुरा उठता है और आगे बढ़ जाता है. बैनर पर लिखा है फटीचर बाबा का रामराम. यह नाम इतना सच्चा और सरल है कि श्रद्धा जगाता है. साथ ही चेहरे पर हंसी भी ला देता है. फटीचर बाबा का रामराम नाम और सादगी की अनोखी मिसाल वाला ये कैंप राम नाम पर पूरी तरह समर्पित है.
प्रयागराज में हर वर्ष लगने वाले माघ मेले में भक्ति के अलग-अलग रंग देखने को मिलते हैं, जो देश और दुनिया को आकर्षित करते हैं. संगम तट पर हर वर्ष कई अखाड़ों के बाबा आते हैं, जो आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं. इस बार भी कई बाबा ऐसे हैं जो सुर्खियों में बने हुए हैं. इन्हीं बाबाओं में फटीचर बाबा का कैंप भी शामिल है.
माघ मेला 2026 की शुरुआत हो चुकी है और त्रिवेणी संगम पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. लेकिन जनवरी की कड़क ठंड और रेतीली जमीन पर लंबे समय तक रहना आसान नहीं. अपनी इस आस्था की यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए बैग पैक करते समय ये 5 चीजें साथ रखना न भूलें.