स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Swami Avimukteshwaranand) आधुनिक समय के एक प्रतिष्ठित योगी, साधक और समाजसेवी हैं. उनका जीवन आध्यात्मिक साधना, समाज सेवा और मानव उत्थान के आदर्शों का प्रतीक है. उन्होंने न केवल धार्मिक और योगिक ज्ञान में गहन अध्ययन किया, बल्कि समाज में नैतिकता, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता फैलाने का कार्य भी किया.
मौनी अमावस्या 2026 में प्रयागराज में संगम स्नान के दौरान प्रशासन ने उनके संगम स्नान और रथ यात्रा को रोक दिया गया था, जिससे अनुयायियों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ा. इसका असर इतना हुआ कि तीन घंटे तक भीड़ और प्रशासन के बीच बहस होती रही. स्वामीजी ने नोटिस को अपमानजनक बताया और कड़ी प्रतिक्रिया दी. उनके वकील ने प्रशासन को कानूनी नोटिस भी भेजा, जिसमें नोटिस वापस लेने की मांग और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया गया था.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का जन्म भारत में हुआ और उन्होंने कम उम्र से ही अध्यात्म और धर्म में रुचि दिखाई. अपने गुरु के मार्गदर्शन में उन्होंने कठोर साधना और वेदांत का अध्ययन किया. समय के साथ उनका व्यक्तित्व ज्ञान, आत्मबल और करुणा से परिपूर्ण हो गया. वे विशेष रूप से युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत रहे हैं और उनका प्रयास रहा कि युवा आध्यात्मिकता और कर्मयोग के मार्ग पर चलें.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कार्य केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित नहीं है. वे समाज सुधार के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं. उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक जागरूकता के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए हैं. उनके प्रवचन और लेख जीवन की सच्चाई, योग और साधना की महत्ता, तथा मानवता के प्रति सेवा का संदेश देते हैं. उनका मानना है कि व्यक्ति का जीवन तभी पूर्ण होता है जब वह साधना और सेवा दोनों में संतुलन बनाए रखे.
उनकी शिक्षाएं सरल, स्पष्ट और व्यवहारिक हैं. वे लोगों को बताते हैं कि आध्यात्मिक उन्नति केवल मंदिर या आश्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि दैनिक जीवन में नैतिकता, संयम और सहिष्णुता का पालन करके भी प्राप्त की जा सकती है. उनके अनुयायी और समाज के लोग उन्हें जीवन में मार्गदर्शन, मानसिक शांति और प्रेरणा का स्रोत मानते हैं.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर यौन उत्पीड़न का केस करने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी ने दावा किया कि रीवा एक्सप्रेस में उन पर हुए हमले के दौरान हमलावर उनकी नाक काटकर गुरु के चरणों में चढ़ाना चाहता था. आशुतोष ने हमले के पीछे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का हाथ बताते हुए कोर्ट में पुख्ता सबूत देने की बात कही है.
रीवा एक्सप्रेस में आशुतोष ब्रह्मचारी पर हुए कथित हमले को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले की सीबीआई जांच और आशुतोष पांडे के नार्को टेस्ट की मांग की है. उनका दावा है कि ट्रेन के टॉयलेट में नाक पर लगी चोट खुद लगाई हो सकती है. वहीं आशुतोष ब्रह्मचारी ने इसे जानलेवा हमला बताते हुए न्याय की मांग की है.
बीजेपी समर्थित विधायक मनोज पांडे के भतीजे यश राकेश पांडे ने रायबरेली में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ मिलकर मोर्चा खोला है. यश राकेश ने स्पष्ट किया कि वह सत्ता के पीछे नहीं सत्य के साथ हैं. रायबरेली की राजनीति में ऊंचाहार से बीजेपी समर्थित विधायक मनोज पांडे के खिलाफ यश राकेश द्वारा उठाए गए कदम ने हलचल मचा दी है. देखें वीडियो.
रीवा एक्सप्रेस में आशुतोष ब्रह्मचारी पर हुए हमले के मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने कहा कि आशुतोष ब्रह्मचारी ने उन पर आरोप लगाए हैं और अब मामले की जांच होगी. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब रेल यात्रा के दौरान जीआरपी की सुरक्षा रहती है तो फिर हमला कैसे हुआ. साथ ही उन्होंने 21 लाख रुपये की बात से भी इनकार किया.
रीवा एक्सप्रेस में आशुतोष महाराज पर जानलेवा हमला हुआ, इसको लेकर आरोप स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर लगाया गया. अब स्वामी ने इस मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है. रायबरेली में यात्रा के दौरान उन्होंने कहा कि वह किसी भी प्रकार की शारीरिक हिंसा के पक्षधर नहीं हैं. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि ट्रेन में सुरक्षा व्यवस्था रहती है, ऐसे में अगर हमला हुआ है तो किसी ने उसे देखा क्यों नहीं.
रायबरेली में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की यात्रा के दौरान सियासी पारा चढ़ गया है. भाजपा समर्थित विधायक मनोज पांडे के भतीजे यश राकेश पांडे ने अपने ही चाचा को 'धोखेबाज' बताते हुए अविमुक्तेश्वरानंद का साथ दिया है, वहीं अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ हत्या और बीफ एक्सपोर्ट को लेकर सरकार पर तीखे प्रहार किए हैं.
गौ संरक्षण को लेकर एक बार फिर सियासी और धार्मिक बहस तेज हो गई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि सत्ता में बैठे लोग गाय को मां नहीं बल्कि संपत्ति मानते हैं, जिसे चुनौती देने की जरूरत है. संत ने 11 मार्च को लखनऊ में बड़े गौ आंदोलन का भी ऐलान किया है.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद गौ रक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण यात्रा शुरू करने जा रहे हैं. 11 मार्च को लखनऊ में उनकी एक जनसभा होगी. उन्होंने इस कार्यक्रम को धर्म युद्ध बताते हुए कहा कि यह प्रयास 2027 तक सफल होकर पूरा होगा. यह यात्रा वाराणसी से लखनऊ तक होगी और इसमें गौ रक्षा का विशेष महत्व होगा.
वाराणसी से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ माता की रक्षा के लिए गौ प्रतिष्ठार्थ धर्म युद्ध नाम से यात्रा का शुभारंभ किया है. यह यात्रा प्रदेश के जौनपुर, सुल्तानपुर, रायबरेली, उन्नाव, हरदोई और सीतापुर होते हुए 11 मार्च को लखनऊ पहुंचेगी, जहां बड़ी जनसभा का आयोजन किया जाएगा.
वाराणसी पहुंचे डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि यूपी में गो तस्करों की हिम्मत नहीं कि गाय को नुकसान पहुंचा सकें. उन्होंने अखिलेश यादव को 'ढोंगी' बताते हुए विपक्ष पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया. अविमुक्तेश्वरानंद के लखनऊ आगमन पर उन्होंने स्वागत की बात कही, लेकिन गाय को 'राज्य माता' का दर्जा देने को अनावश्यक बताया.
पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा में बात करते हुए स्वामी सदानंद सरस्वती ने खुलकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का समर्थन किया. उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद पर लगे आरोपों को पूरी तरह झूठा बताते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया.
इस मामले में मुख्य तर्क यह था कि मामला झूठा है. प्रस्तुत दस्तावेज़ और पुलिस की रिपोर्ट में इतने विरोधाभास हैं कि ये सत्य प्रतीत नहीं होते. इसलिए, यह कहना उचित है कि मामले की जांच आवश्यक है क्योंकि पूरी जानकारी सामने नहीं आई है. इस आधार पर अग्रिम जमानत दी जानी चाहिए ताकि न्याय की प्रक्रिया सही तरीके से हो सके. रिपोर्ट में परस्पर विरोधी तथ्य मामले की सच्चाई पर सवाल उठाते हैं और यह साफ संकेत देते हैं कि आरोप सही नहीं हैं.
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अविमुक्तेश्वरानंद को राहत दी है. कोर्ट ने कहा है कि अग्रिम जमानत की अर्जी पर निर्णय होने तक उनकी गिरफ्तारी नहीं की जाएगी. शंकराचार्य ने कोर्ट के सामने यह भी बताया कि उनके खिलाफ कोई सटीक सबूत पेश नहीं किया गया है. यह फैसला उनकी कानूनी लड़ाई में अहम साबित हो सकता है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. अदालत ने स्पष्ट कहा है कि अंतिम आदेश आने तक उनकी गिरफ्तारी नहीं होगी. इसके साथ ही कोर्ट ने स्वामी को जांच में पूर्ण सहयोग देने का निर्देश दिया है. देखें वीडियो.
आजतक की एक्सक्लूसिव पड़ताल में CWC के रिकॉर्ड से बड़ा खुलासा हुआ है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के दावों के उलट, पीड़ित बच्चों को नियमानुसार CWC के सामने पेश किया गया, बयान दर्ज हुए और बाद में उन्हें माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया. पढ़ें पूरा मामला.
आज का दिन ज्योतिष पीठ शंकराचार्य स्वामी मुक्तेश्वरानंद के लिए बड़ी राहत लेकर आया है. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है और उन्होंने कहा है कि जब तक उनका फैसला नहीं आता तब तक गिरफ्तारी नहीं होगी. शंकराचार्य को जाँच में सहयोग करना होगा. यह मामला अभी भी जारी है और आरोप गंभीर हैं. अदालत ने केस में कई पहलुओं पर गौर किया और पाया कि शिकायतकर्ता का क्रिमिनल रिकॉर्ड होने की वजह से पूरी बात पर संदेह किया जाना चाहिए.
केजरीवाल के मामले में कुछ फैसले होने के बाद, मुक्तेश्वरानंद के मामले में हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है. इस दौरान मुक्तेश्वरानंद ने अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट से न्याय मांगा था. यह मामला अभी विचाराधीन है और कोर्ट ने तुरंत कोई निर्णय नहीं दिया है. इससे यह स्पष्ट होता है कि न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है और दोनों पक्षों के दावों पर विस्तार से विचार होगा.
अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ झूसी पुलिस स्टेशन में यौन शोषण के आरोपों के तहत मामला दर्ज किया गया है. इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा अग्रिम जमानत के लिए खटखटाया था. हाई कोर्ट ने मार्च के तीसरे हफ्ते तक इस मामले में सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रखा है. यह मामला केजरीवाल के मामले के साथ चर्चा में है. न्यायपालिका द्वारा मामले को गंभीरता से देखे जाने के कारण यह फैसला संतुलित होगा.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत अर्जी पर जल्द सुनवाई होने वाली है. उनके खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज होने के बाद, उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था. उन पर दो बटुकों द्वारा यौन शोषण का गंभीर आरोप लगाया गया है. इस मामले की सुनवाई जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की बेंच करेगी. इस पूरे मामले पर क्या बोले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, देखें वीडियो.
शराब घोटाले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के बरी होने पर अखिलेश यादव ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने इसे सत्य की जीत और भाजपा के लिए 'नैतिक मृत्युदंड' बताया. अखिलेश ने कहा कि जो लोग शंकराचार्य तक पर झूठे आरोप लगा सकते हैं, वे किसी को भी बदनाम कर सकते हैं.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मामले पर बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि शंकराचार्य अत्यंत पूजनीय व्यक्ति हैं और सभी को उनका आदर करना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि शंकराचार्य को फंसा कर राजनीतिक लाभ उठाया जा रहा है और इसका परिणाम भाजपा के लिए गंभीर होगा.