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कोर्ट में लड़े जाते हैं चुनाव... CJI की बात में वजन डाल रहे हैं चार चुनावी राज्यों के केस

चुनावी राजनीति वाले विवादों से जुड़े मामलों में दाखिल की जाने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर की है. मुख्य न्यायाधीश की यह टिप्पणी तब आई है जब हिमंत बिस्वा सरमा वाले वीडियो का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है. खास बात यह है कि सिर्फ असम नहीं, अन्य चुनावी राज्यों में भी ऐसे विवाद हुए हैं.

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सुप्रीम कोर्ट ने हिमंत बिस्वा सरमा के शूटिंग वाले वीडियो जैसे राजनीतिक मामलों के अदालत पहुंचने पर चिंता जताई है. (Photo: ITG)
सुप्रीम कोर्ट ने हिमंत बिस्वा सरमा के शूटिंग वाले वीडियो जैसे राजनीतिक मामलों के अदालत पहुंचने पर चिंता जताई है. (Photo: ITG)

चुनावी विवाद बहुत पहले से निचली अदालतों से होते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचते रहे हैं. विवाद की सूरत में ऐसा होना स्वाभाविक भी है, लेकिन अभी पैटर्न थोड़ा बदल रहा है. और, देश के मुख्य न्यायाधीश को भी याचिकाओं में राजनीतिक मंशा नजर आने लगी है. 

CJI जस्टिस सूर्यकांत की लेटेस्ट टिप्पणी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के शूटिंग वाले वीडियो की सुप्रीम कोर्ट में दस्तक के बाद आई है. ऐसे विवादों के मामले में जस्टिस सूर्यकांत का कहना है कि ‘चुनावों का एक हिस्सा सुप्रीम कोर्ट में लड़ा जाने लगा है‘. 

2026 में असम विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं, और उससे पहले ही राज्य बीजेपी की तरफ से मुसलमानों को टार्गेट करते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया था. विवाद बढ़ने पर असम बीजेपी ने वीडियो डिलीट कर दिया, लेकिन विपक्षी दल वीडियो की मंशा और मैसेज को लेकर सवाल उठा रहे हैं, और सुप्रीम कोर्ट से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं - असम के साथ साथ पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में भी विधानसभा के चुनाव होने हैं, और कोई न कोई विवाद हर जगह से सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है. 

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असम बीजेपी के वीडियो का मामला सुप्रीम कोर्ट में

हिमंत बिस्वा सरमा के शूटिंग प्रैक्टिस 'पॉइंट ब्लैंक शॉट' वाले वीडियो का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए मंजूरी तो दे दी है, लेकिन राजनीतिक लड़ाइयों को अदालत में लाए जाने पर चिंता भी जताई है.

सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और एनवी अंजारी की बेंच के सामने सीपीआई और सीपीएम नेताओं की ओर से पेश सीनियर वकील निजाम पाशा के तत्काल हस्तक्षेप के अनुरोध के बाद अदालत में याचिका पर संज्ञान लिया है. लेफ्ट नेताओं के वकील निजाम पाशा ने बताया कि वीडियो के संबंध में शिकायतें तो दे दी गई थीं, लेकिन कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है.

विवादित वीडियो के मामले में दलील पेश की गई, हम असम के मौजूदा मुख्यमंत्री के आपत्तिजनक भाषणों के संबंध में इस न्यायालय के तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हैं... हाल में पोस्ट किया गया एक वीडियो भी शामिल है, जिसमें उन्हें एक विशेष समुदाय के सदस्यों पर गोली चलाते हुए दिखाया गया है... शिकायतें दर्ज की गई हैं, लेकिन कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है.

जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी थी कि ऐसी याचिकाएं अक्सर चुनावों के मौसम के साथ मेल खाती हैं. बोले, 'समस्या यह है कि चुनाव आते ही, चुनाव का कुछ हिस्सा सुप्रीम कोर्ट में लड़ा जाता है... यही समस्या है... हम इसका पता लगाएंगे और तारीख बताएंगे.

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चुनावी राजनीति के मामले जो सुप्रीम कोर्ट पहुंचे

असम बीजेपी के वीडियो से पहले पश्चिम बंगाल में कराए जा रहे SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण का मामला भी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. बिहार चुनाव से पहले भी एसआईआर के मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाया गया था. ऐसे और भी मामले हैं जो केरल और तमिलनाडु जैसे चुनावी राज्यों से सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही कतार में लगे हुए हैं.  

पश्चिम बंगाल का SIR मामला: पश्चिम बंगाल में भी बिहार की तरह SIR खिलाफ मुहिम चलाई जा रही है. राहुल गांधी की तरह ममता बनर्जी वोटर अधिकार यात्रा तो नहीं निकाल रही हैं, लेकिन प्रयास चौतरफा नजर आ रहे हैं. पश्चिम बंगाल के लोगों से किए वादे के मुताबिक ममता बनर्जी ने सुनवाई में हिस्सा भी लिया, और अपनी दलीलें भी पेश की. वैसे सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पेश होने के खिलाफ भी याचिका दायर की गई है. 

ममता बनर्जी की दलील गौर से सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एसआईआर में किसी को भी बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी. कोर्ट ने निर्वाचन आयोग के नोटिस जलाने की घटनाओं पर पश्चिम बंगाल के डीजीपी से हलफनामा दाखिल करने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी साफ कर दिया है कि वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण संबंधी अंतिम निर्णय हमेशा मतदाता सूची अधिकारी ही लेंगे.

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केरल का सबरीमाला सोना चोरी केस: सबरीमाला मंदिर में हुई सोना चोरी के मामले की केरल हाई कोर्ट के निर्देश पर बनाई गई SIT जांच कर रही है. एसआईटी सबरीमाला मंदिर में द्वारपाल की मूर्तियों और श्रीकोविल के दरवाजों से गायब हुए सोने से जुड़े दो मामलों की जांच कर रही है. अब तक इस मामले में CPI(M) से जुड़े त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के दो पूर्व अध्यक्षों सहित 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

एसआईटी ने जमानत पर रिहा मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी से भी पूछताछ की है. साथ ही, कांग्रेस सांसद अडूर प्रकाश से तिरुवनंतपुरम में करीब ढाई घंटे तक पूछताछ हुई है. यह विवाद एक तस्वीर के सामने आने के बाद और बढ़ गया. तस्वीर में अडूर प्रकाश केस के मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी के साथ कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से उनके आवास पर मुलाकात करते नजर आ रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आरोपी सोना व्यवसायी की जमानत खारिज कर दी है. ये मामला राजनीतिक विवाद के रूप में चुनावों से पहले छाया हुआ है. विपक्षी दलों ने केरल की लेफ्ट सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किए हैं.

तमिलनाडु का दीपम विवाद: तमिलनाडु के दीपम विवाद केस में सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है. थिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर कार्तिगई दीपम केस में सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि पहाड़ी के नेल्लीथोप्पु इलाके में मुस्लिम समुदाय रमजान और बकरीद पर नमाज पढ़ सकते हैं, लेकिन हर दिन वहां नमाज अदा नहीं कर सकते.

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पिछले साल दिसंबर में मद्रास हाईकोर्ट ने दरगाह के नजदीक दीपाथून जगह पर श्रद्धालुओं को दीया जलाने की इजाजत दी थी, जिसे लेकर खूब विवाद हुआ और मामला राजनीतिक रंग ले लिया था. जब तमिलनाडु सरकार ने कानून व्यवस्था खराब होने हवाला देते हुए हाईकोर्ट का आदेश नहीं माना, तो हाईकोर्ट ने सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की थी.   

हाईकोर्ट का सख्त रुख राजनीतिक सत्ता को रास नहीं आया. और, विपक्षी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल करीब 100 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक ज्ञापन लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को भी सौंपा था. ज्ञापन में मद्राह हाई कोर्ट के जज जस्टिस जीआर स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग चलाए जाने की मांग की थी. ज्ञापन देने वालों में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल थे. 

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