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5 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे हेलीकॉप्टर... बड़े पर्दों की मदद से सीधे ट्रकों में पहुंच रहे हिरण; कैसे हुआ 'लो लेवल फ्लाइंग' से अनूठा रेस्क्यू?

Shujalpur Boma Technique Blackbuck Rescue: शुजालपुर में दक्षिण अफ्रीका की बोमा तकनीक का सफल प्रयोग. बिना दवा 176 काले हिरणों को रेस्क्यू कर कूनो नेशनल पार्क भेजा गया. किसानों को मिलेगी फसल तबाही से राहत. पढ़ें पूरी रिपोर्ट...

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काले हिरणों का बिना दवा और चोट रेस्क्यू. (Photo:ITG)
काले हिरणों का बिना दवा और चोट रेस्क्यू. (Photo:ITG)

MP News: शाजापुर जिले के शुजालपुर अंचल में किसानों के लिए सिरदर्द बन चुके काले हिरणों के झुंड को सुरक्षित निकालने के लिए दक्षिण अफ्रीका की 'बोमा तकनीक'  का सफल प्रयोग किया गया है. बिना किसी जाल, बंदूक या बेहोशी की दवा दिए, दो दिनों के भीतर 176 काले हिरणों को बेहद सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में भेज दिया गया है.

उज्जैन सीएफ किरण बिसेन ने जानकारी दी कि दक्षिण अफ्रीका से आई विशेषज्ञ संस्था 'कंजर्वेशन सॉल्यूशंस'  की टीम भारतीय अधिकारियों और वनकर्मियों को बोमा तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण दे रही है. इस अभियान में 7 DFO समेत 20 वनकर्मियों ने भाग लिया.

बोमा तकनीक का 3-लेवल 'हिडन साइंस'

फर्स्ट स्टेप: खेतों में महज 2 से 5 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे हेलीकॉप्टर और जमीन पर तैनात वनकर्मियों के सटीक को-ऑर्डिनेशन से हिरणों के झुंड की दिशा को बोमा (बाड़े) की तरफ मोड़ा गया.

सेकंड स्टेप: खेतों में करीब 1 किमी लंबा 'V' आकार का फनल तैयार किया गया, जिसमें लोहे या ठोस दीवारों की जगह हरे-काले पर्दे, स्थानीय घास और झाड़ियों का इस्तेमाल किया गया ताकि हिरण बिदकें नहीं.

थर्ड स्टेप: संकरे होते गलियारे का अंतिम सिरा सीधे परिवहन ट्रकों में खुलता था. हिरणों के प्रवेश करते ही पर्दे गिरा दिए गए और वाहन रवाना कर दिए गए. देखें VIDEO:- 

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'नो-स्मेल जोन' और 30°C तापमान का विज्ञान

वन्यजीव वैज्ञानिकों के अनुसार, इस रेस्क्यू में खास वैज्ञानिक प्रोटोकॉल अपनाए गए. जैसे:- 

30°C पर कार्य रोकना: तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने पर रेस्क्यू तुरंत रोक दिया जाता है, क्योंकि अत्यधिक गर्मी और भागने से हिरणों की मांसपेशियों को गंभीर नुकसान पहुंचता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा रहता है.

नो-स्मेल जोन: ऑपरेशन से एक दिन पहले ग्रामीणों को खेतों में जाने और पानी छोड़ने से रोका गया. रास्ते में किसी तरह का परफ्यूम या तेज गंध न हो, इसका विशेष ध्यान रखा गया.

छड़ी से हल्का स्पर्श: ट्रकों में नर हिरणों के नुकीले सींगों से मादाओं को चोट न पहुंचे, इसके लिए वनकर्मियों की ओर से पतली लकड़ी से हल्का स्पर्श देकर नर-मादा को अलग-अलग केबिन में विभाजित किया गया.

किसानों को मिलेगी भारी तबाही से मुक्ति

शुजालपुर के बड़ी पोलाय, हजुखेड़ी, अमसियाखेड़ी और बंजारी गांवों में 50 से 100 हिरणों के झुंड लहलहाती फसलों को मिनटों में चट कर जाते थे. किसानों को 1 बीघे में 18 किलो की जगह 25 किलो तक बीज बोने पड़ते थे और उपज आधी से भी कम रह जाती थी. सीएम हेल्पलाइन पर हर महीने 100 से ज्यादा शिकायतें पहुंच रही थीं.

दूसरे चरण में वन विभाग का लक्ष्य 2000 काले हिरणों को कूनो स्थानांतरित करना है. इसके बाद इसी तकनीक से इलाके के किसानों को भारी नुकसान पहुंचाने वाली नीलगायों का भी रेस्क्यू किया जाएगा.

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