मध्य प्रदेश पुलिस ने कटनी की सस्पेंड की गई सिटी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (CSP) नेहा पच्चीसिया के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई. ये आरोप एक मर्डर के आरोपी से जुड़े जमीन के सौदे को लेकर थे.
19 अगस्त को कटनी के कुठला पुलिस स्टेशन में 37 साल की पुलिस अफसर और उनके दो साथियों जिनमें क्षितिज राज बारापात्रे भी शामिल हैं, के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी.
जबलपुर जोन के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IG) प्रमोद वर्मा ने एक न्यूज एजेंसी को बताया कि SIT इस मामले की जांच करने वाली अफसर, जबलपुर सिटी की एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) अंजना तिवारी की मदद करेगी.
कटनी के SP अभिनय विश्वकर्मा के मुताबिक, यह मामला इन आरोपों से शुरू हुआ कि नेहा पच्चीसिया ने मर्डर के आरोपी रमेश लोधी की गिरफ्तारी में देरी की और बाद में तय 90 दिनों के अंदर उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं करवाई.
विश्वकर्मा ने कहा, "जब हमारे ध्यान में यह बात आई कि आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है, तो हमने उसे गिरफ्तार करवाया." हालांकि, जुलाई के पहले हफ्ते में लोधी को डिफॉल्ट जमानत मिल गई क्योंकि चार्जशीट दाखिल नहीं की गई थी.
एसपी विश्वकर्मा ने आगे कहा, "मैंने जांच की समीक्षा करवाई... मैंने अपने एडिशनल SP कमल मौर्य को शुरुआती जांच करने का निर्देश दिया, जिन्हें मामला संदिग्ध लगा."
मर्डर केस के आरोपी को बचाकर कौड़ियों में खरीदी जमीन
इसके बाद जबलपुर की ASP अनु बेनीवाल ने जांच की, जिसमें पता चला कि आरोपी लोधी और उसके परिवार की जमीन मारूफ अहमद हनफी को 18 लाख रुपये में बेची गई थी, जबकि सरकारी गाइडलाइंस के अनुसार इसकी कीमत 82 लाख रुपये थी और बाजार में इसकी कीमत लगभग 2 करोड़ रुपये आंकी गई थी.
SP विश्वकर्मा ने कहा, "कोई व्यक्ति इतनी कम कीमत पर जमीन क्यों बेचेगा? इसका मतलब है कि वह दबाव में था. और दबाव यह था कि उसे जेल नहीं भेजा जाएगा."
नेहा समेत 6 अन्य पुलिसकर्मी भी सस्पेंड
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को पच्चीसिया को तुरंत सस्पेंड करने का आदेश दिया. इस मामले में राजनाथ नगर पुलिस स्टेशन के इंचार्ज अरुण पाल सिंह, सब-इंस्पेक्टर सौरभ सोनी, CSP के रीडर नरेंद्र पांडे, गनमैन मटू और ड्राइवर केशव को भी सस्पेंड कर दिया गया.
पुलिस कप्तान ने कहा कि उन लोगों पर अपराध में शामिल होने का आरोप नहीं है, लेकिन उन्हें ऐसे आदेशों का पालन करने के लिए सस्पेंड किया गया, जिनका पालन उन्हें सर्विस नियमों के तहत नहीं करना चाहिए था.
नेहा पच्चीसिया के खिलाफ एक अलग विभागीय जांच भी चल रही है. यह जांच एक ऐसे आरोप के संबंध में है जिसमें कहा गया है कि उन्होंने एक ट्रांसपोर्टर के डंपर ट्रक रोककर उससे पैसे ऐंठे थे.
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की पचोर तहसील की रहने वाली यह महिला अधिकारी मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की 2012 की परीक्षा पास करने से पहले एयर होस्टेस और कुछ मल्टीनेशनल कंपनियों में काम कर चुकी थी.
पुलिस विभाग में शामिल होने से पहले उसने कुछ समय तक महिला और बाल विकास विभाग में भी काम किया था.
गुना में सिटी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस के तौर पर उनके काम, जिसमें उन्होंने महिलाओं के लिए एक मोबाइल पुलिस स्टेशन शुरू किया था, की वजह से उन्हें 'लेडी सिंघम' का उपनाम मिला.