
इंदौर में एक महिला पुलिसकर्मी की सतर्कता, सूझबूझ और बहादुरी ने 6 साल के मासूम को नई जिंदगी दे दी. डीसीपी जोन-2 कार्यालय की साइबर सेल में पदस्थ महिला आरक्षक निकिता जोशी ने अपनी जान की परवाह किए बिना करंट की चपेट में आए बच्चे को बिजली के तार से अलग किया और तुरंत अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचा ली. अब इस साहसिक कार्य के लिए उन्हें सम्मानित किए जाने की अनुशंसा की जा रही है -
दरअसल इंदौर के DCP जोन-2 कार्यालय की साइबर सेल में पदस्थ महिला पुलिसकर्मी निकिता जोशी शाम को ड्यूटी खत्म कर परदेशीपुरा पुलिस लाइन स्थित अपने घर पहुंची थीं. तभी घर के सामने मंदिर परिसर से बच्चों के घबराए हुए चिल्लाने की आवाज सुनाई दी. निकिता बिना देर किए मौके पर पहुंचीं तो मंदिर के पीछे झाड़ियों में करीब 6 साल का एक बच्चा अचेत अवस्था में पड़ा मिला. उसके हाथ में बिजली का तार था और वह करंट की चपेट में था. स्थिति की गंभीरता को समझते हुए निकिता जोशी ने घबराने के बजाय साहस और सूझबूझ का परिचय दिया.
'दीदी, मुझे अस्पताल ले चलो'
उन्होंने पास में खड़े अन्य बच्चों से क्रिकेट का बैट लिया और उस बैट की मदद से बच्चे के हाथ को बिजली के तार से अलग किया. करंट से मुक्त होते ही बच्चे ने आंखें खोलीं और रोते हुए कहा, "दीदी, मुझे अस्पताल ले चलो, मेरा हाथ काम नहीं कर रहा है."

इसके बाद निकिता ने बच्चे को तुरंत अपनी गोद में उठाया और परिजनों की मदद से बिना एंबुलेंस का इंतजार किए निजी अस्पताल पहुंचाया. समय पर इलाज मिलने से बच्चे की जान बच गई. उपचार के बाद उसके हाथ की मूवमेंट भी सामान्य हो गई और डॉक्टरों ने उसे स्वस्थ होने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी.

मासूम के परिजनों ने महिला पुलिसकर्मी निकिता जोशी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी तत्परता और मानवता के कारण उनके बच्चे को नया जीवन मिला है. वहीं, एडिशनल डीसीपी अमरेंद्र सिंह ने निकिता जोशी की बहादुरी, सूझबूझ और कर्तव्यनिष्ठा को देखते हुए उन्हें सम्मानित और पुरस्कृत किए जाने की अनुशंसा करने की बात कही है.