ग्वालियर के गदाईपुरा की एक गली में आज खामोशी पसरी है. जिस घर से कभी बच्चों की हंसी सुनाई देती थी, जहां अमन और लव अपने दोस्तों के साथ खेलते और पढ़ाई करते थे, वहां अब उनकी यादें रह गई हैं. शीतला माता मंदिर में हुए हादसे ने एक परिवार से उसके दो बेटों को छीन लिया. इस हादसे में उनके चाचा अशोक की भी मौत हो गई. तीन मौतों ने परिवार ही नहीं, पूरे मोहल्ले को गहरे सदमे में डाल दिया है.
यह परिवार मूल रूप से मुरैना जिले की जौरा तहसील का रहने वाला है. विद्याराम त्यागी लंबे समय से ग्वालियर के गदाईपुरा में रह रहे थे. परिवार में एक बेटी थी, जिसकी शादी करीब तीन-चार साल पहले हो चुकी थी. इसके बाद परिवार की खुशियों का केंद्र अमन और लव थे. दोनों बेटों का जन्म करीब 12 साल की मन्नतों और पूजा-अर्चना के बाद हुआ था. परिवार ने उन्हें पाने के लिए लंबा इंतजार किया था, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि एक हादसा उनकी जिंदगी की खुशियां इस तरह छीन लेगा.
शनिवार रात विद्याराम त्यागी के छोटे भाई अशोक अपने दोनों भतीजों अमन और लव को लेकर शीतला माता मंदिर में दर्शन करने गए थे. परिवार के लिए यह एक सामान्य धार्मिक यात्रा थी, लेकिन यह सफर उनके जीवन का सबसे बड़ा दुख बन गया. मंदिर में हुए हादसे में अमन, लव और अशोक की मौत हो गई. अमन की उम्र 15 साल थी, जबकि लव 13 साल का था. दोनों की उम्र अभी पढ़ने, खेलने और अपने सपने पूरे करने की थी. उनके स्कूल के दोस्त थे, मोहल्ले में साथ खेलने वाले बच्चे थे और परिवार को उनसे बहुत उम्मीदें थीं. लेकिन हादसे के बाद उनके घर में ऐसा सन्नाटा छा गया, जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है. गदाईपुरा की वही गली, जहां दोनों भाइयों की आवाजें सुनाई देती थीं, अब उन्हें याद कर रही है. आसपास रहने वाले लोग और उनके साथ खेलने वाले बच्चे इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि अमन और लव अब उनके बीच नहीं हैं.
दर्शन करने गए थे चाचा, दोनों भतीजों के साथ नहीं लौटे
परिवार के किरायेदार कल्लू राठौर और आसपास रहने वाले लोगों के मुताबिक, विद्याराम त्यागी बेहद सज्जन व्यक्ति हैं. उनका परिवार मोहल्ले के लोगों के साथ घुला-मिला रहता था. पड़ोसियों का कहना है कि अमन और लव भी सभी के चहेते थे. दोनों भाइयों को साथ देखकर लोग उन्हें प्यार से राम-लक्ष्मण की जोड़ी कहते थे. कुछ लोग उन्हें लव-कुश कहकर पुकारते थे. दोनों बच्चों के जन्म के पीछे परिवार की लंबी प्रतीक्षा और मन्नतों की कहानी जुड़ी थी. करीब 12 साल तक पूजा-अर्चना और मन्नतों के बाद परिवार में दोनों बेटों का जन्म हुआ था. ऐसे में उनकी मौत ने परिवार को भीतर तक तोड़ दिया है.
पड़ोसियों के मुताबिक, बच्चों की मां उनकी सुरक्षा को लेकर खास सतर्क रहती थीं. दोनों को लेकर परिवार में विशेष लगाव था. जिस परिवार ने बेटों के जन्म के लिए इतने साल इंतजार किया, उसी परिवार को अब उनके बिना रहना पड़ रहा है. आज मोहल्ले के वे बच्चे भी अपने दोस्तों को याद कर रहे हैं, जिनके साथ अमन और लव खेलते थे. जिस गली में कभी उनकी चहल-पहल रहती थी, वहां अब उनकी यादें लोगों की आंखें नम कर रही हैं.
हादसे के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे. हालांकि, अमन, लव और उनके चाचा अशोक का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में किया गया. इसके बाद परिवार के लोग वापस गांव लौट गए. गदाईपुरा में अब उनका घर और उस घर से जुड़ी यादें रह गई हैं. पड़ोसी उन दिनों को याद कर रहे हैं, जब दोनों भाई उनके बीच रहते थे. उनके साथ खेलने वाले बच्चों के लिए यह बिछड़ना बेहद मुश्किल है. पूरे मोहल्ले में हादसे को लेकर दुख है.
एक परिवार के तीन सदस्यों की मौत ने आसपास रहने वाले लोगों को भी झकझोर दिया है. अमन और लव की उम्र अभी जिंदगी को समझने और भविष्य के सपने देखने की थी. उनके माता-पिता ने दोनों बेटों को पाने के लिए लंबा इंतजार किया था. लेकिन शीतला माता मंदिर में हुए हादसे ने परिवार की खुशियां छीन लीं.
अंतिम संस्कार पैतृक गांव में, गदाईपुरा में रह गईं यादें
गदाईपुरा में विद्याराम त्यागी के घर की खामोशी उस दर्द को बयां कर रही है, जिसे परिवार और पड़ोसी महसूस कर रहे हैं. अमन और लव के साथ उनके चाचा अशोक की मौत ने परिवार को गहरा सदमा दिया है. घर से लेकर गली तक लोग इस घटना को याद कर दुखी हैं. यह हादसा परिवार के लिए ऐसी चोट बन गया है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा. दोनों भाइयों की यादें, उनके साथ बिताए पल और मोहल्ले में उनकी चहल-पहल अब लोगों के दिलों में रह गई है. जिस घर में कभी बच्चों की आवाजें गूंजती थीं, वहां आज सन्नाटा है. गदाईपुरा के लोग अब भी सदमे में हैं और अमन, लव तथा अशोक को याद कर रहे हैं.