पूर्वी दिल्ली के कल्याणपुरी में फ्लिपकार्ट के डिलीवरी बॉय समीर हुसैन सैफी की मौत के मामले में नया मोड़ आया है. आरोप है कि 10 रुपये के फटे नोट को बदलने को लेकर ग्राहक से हुए विवाद के बाद समीर के साथ मारपीट की गई थी. इसके बाद उसने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ पी लिया. करीब 16 दिन तक अस्पताल में इलाज चलने के बाद 20 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इस मामले में नामजद दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है.
समीर के चाचा मोहम्मद शाहिद सैफी ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाते तो शायद समीर की जान बच सकती थी. परिवार ने पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल बोर्ड गठित करने, अस्पताल के आईसीयू की सीसीटीवी फुटेज और इलाज से जुड़ी मेडिकल रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग की है.
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10 रुपये के नोट को लेकर हुआ था विवाद
परिजनों के मुताबिक, 4 अक्टूबर की रात करीब 11:30 बजे समीर एक पार्सल डिलीवर करने गया था. इसी दौरान 10 रुपये के फटे नोट को बदलने को लेकर ग्राहक के साथ विवाद हो गया. आरोप है कि इस दौरान उसके साथ मारपीट और प्रताड़ना की गई. हालांकि, घटना के सभी पहलुओं की पुष्टि जांच के जरिए होनी बाकी है.
समीर के चाचा मोहम्मद शाहिद सैफी ने बताया कि घटना के बाद समीर ने कार्रवाई के लिए पुलिस से संपर्क किया था. उनके मुताबिक, समीर फ्लिपकार्ट के कार्यालय भी गया, जहां उसके साथी डिलीवरी कर्मचारियों ने उसकी मदद की. इसके बाद वे कल्याणपुरी थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई.
परिवार के अनुसार, शिकायत के बाद समीर को अस्पताल भी ले जाया गया, जहां उसकी मेडिकल लीगल जांच (MLC) हुई थी. चाचा का कहना है कि समीर ने इसके बाद एक वीडियो बनाया था, जिसमें उसने अपने साथ हुई घटना का जिक्र किया और 24 घंटे के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर जहरीला पदार्थ पीने की बात कही थी.
5 अक्टूबर को पी लिया था जहरीला पदार्थ, 20 अक्टूबर को मौत
परिजनों के मुताबिक, 5 अक्टूबर को समीर ने जहरीला पदार्थ पी लिया था. इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां करीब 16 दिनों तक उसका इलाज चला. परिवार का कहना है कि 20 अक्टूबर को दोपहर करीब 2 बजे समीर की मौत हो गई. हालांकि, जहरीला पदार्थ उसने कहां से हासिल किया था, इसकी जानकारी परिवार को नहीं है.
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, समीर 5 अक्टूबर को शिकायत लेकर आया था और थप्पड़ मारे जाने की बात कही थी. पुलिस का कहना है कि उसी दिन प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई थी. शिकायत में जिन दो लोगों के नाम थे, उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है.
पुलिस की इस जानकारी के बाद मामले में शिकायत पर कार्रवाई को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं. एक तरफ पुलिस का कहना है कि प्राथमिकी दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, वहीं समीर के चाचा आरोप लगा रहे हैं कि शुरुआती शिकायत के बाद समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई. इन आरोपों और पुलिस की कार्रवाई के पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच अहम है.
चाचा बोले- भतीजे का जन्मदिन मनाऊं या मरणदिन?
समीर के चाचा मोहम्मद शाहिद सैफी ने भावुक होते हुए कहा कि 22 अक्टूबर को समीर का 24वां जन्मदिन था. उन्होंने सवाल किया कि अब वह अपने भतीजे का जन्मदिन मनाएं या उसका मरणदिन. उनके मुताबिक, समीर उनके छोटे भाई का बेटा था और परिवार को उसकी मौत से गहरा सदमा लगा है.
चाचा ने आरोप लगाया कि समीर को लगातार प्रताड़ित किया गया. उनका दावा है कि समीर ने वीडियो में कार्रवाई नहीं होने की बात कही थी. शाहिद सैफी ने पुलिस की कथित निष्क्रियता को उसकी मौत की वजहों में से एक बताया. हालांकि, मौत के कारणों और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.
परिवार ने इस मामले में अस्पताल में समीर के इलाज को लेकर भी सवाल उठाए हैं. चाचा ने मांग की है कि पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया जाए. साथ ही, उन्होंने आईसीयू की सीसीटीवी फुटेज और मेडिकल रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि यह पता चल सके कि इलाज के दौरान कौन-कौन सी दवाएं दी गईं और उसकी चिकित्सा किस तरह हुई.
बीजेपी पार्षद के रिश्तेदार होने का आरोप, परिवार ने उठाए सवाल
समीर के चाचा ने आरोप लगाया कि मामले के आरोपियों में से एक का संबंध बीजेपी पार्षद देवेंद्र कुमार से है. उनका दावा है कि इसी वजह से कार्रवाई को लेकर उन्हें संदेह है. हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसे जांच के आधार पर ही परखा जा सकता है.
शाहिद सैफी ने बताया कि पुलिस ने दो आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी है, लेकिन परिवार को अभी तक ऐसा कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है जिससे उन्हें न्याय मिलने का भरोसा हो. उनका कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है, जबकि आरोपियों की ओर से वकील मौजूद हैं. उन्हें आशंका है कि आरोपियों को जमानत मिल सकती है.
फिलहाल, इस मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. परिवार की मांग है कि घटना, शुरुआती शिकायत पर हुई कार्रवाई और अस्पताल में इलाज से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जाए. अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और समीर के परिवार को न्याय मिल पाता है या नहीं.