मध्य प्रदेश के बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी के बेटे दिनेश लोधी के खिलाफ अदालत ने सख्त रुख अपनाया है. हत्या के प्रयास के एक मामले में लंबे समय से पेशियों पर गैरमौजूद रहने के बाद अदालत ने उसे फरार घोषित कर दिया है. साथ ही उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है. अब पुलिस के सामने उसे गिरफ्तार कर अदालत में पेश करने की चुनौती है.
यह मामला ग्वालियर के पुरानी छावनी थाना इलाके में दर्ज हत्या के प्रयास के केस से जुड़ा है. इस मामले की सुनवाई जिला अदालत में चल रही है.
अदालत में पेश जानकारी के मुताबिक, दिनेश लोधी 22 जुलाई 2024 को आखिरी बार व्यक्तिगत रूप से पेश हुआ था. इसके बाद 23 अगस्त 2024 से 16 मार्च 2026 के बीच हुई कई पेशियों में वह अदालत में मौजूद नहीं रहा. उसकी ओर से लगातार हाजिरी माफी के आवेदन लगाए जाते रहे. लगातार गैरहाजिरी और गिरफ्तारी वारंट की तामील नहीं होने के बाद अदालत ने उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी करने और फरार दर्ज करने के आदेश दिए.
शिवपुरी के पिछोर में रहने की जानकारी
अदालत में पुलिस की ओर से बताया गया कि दिनेश लोधी ज्यादातर समय शिवपुरी जिले के पिछोर (पिता के विधानसभा क्षेत्र) में रहता है और कभी-कभार ही ग्वालियर आता है. लगातार पेशियों पर गैरमौजूद रहने के कारण मामले की सुनवाई प्रभावित हुई. अदालत के आदेश के बाद अब पुलिस को स्थायी गिरफ्तारी वारंट की तामील कर दिनेश लोधी को अदालत में पेश करना होगा. देखें VIDEO:-
पहले भी जारी हो चुका है स्थायी गिरफ्तारी वारंट
दिनेश लोधी के खिलाफ यह पहला मामला नहीं है, जिसमें अदालत ने स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया हो. इससे पहले जुलाई में ग्वालियर की विशेष एससी-एसटी अदालत से जुड़े एक अन्य मामले में भी उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था और उसे फरार घोषित किया गया था.
अब हत्या के प्रयास के मामले में भी अदालत के आदेश के बाद उसकी कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं. दो अलग-अलग मामलों में स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद पुलिस की कार्रवाई पर नजर रहेगी.
क्या अब होगी दिनेश लोधी की गिरफ्तारी?
अदालत के आदेश के बाद दिनेश लोधी को गिरफ्तार कर पेश करना पुलिस की जिम्मेदारी है. हालांकि, उसकी गिरफ्तारी कब होगी, इस बारे में अभी कोई निश्चित जानकारी सामने नहीं आई है.
जिला कोर्ट ग्वालियर के शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र शर्मा के मुताबिक, मामले में अदालत की कार्यवाही और जारी आदेश के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी. अब देखना होगा कि पुलिस स्थायी गिरफ्तारी वारंट की तामील कब तक कर पाती है.