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इमरान प्रतापगढ़ी बोले- इलाहाबाद का नाम नहीं बदला जा सकता, वह मेरी सांसों में बसता है

योगी आदित्यनाथ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इलाहाबाद तो पहले से ही प्रयागराज था ऐसे में अगर उन्हें अपनी राजनीति को बढ़ाना ही था तो शहर का नाम प्रयागराज इलाहाबाद रख देते, उन्हें इलाहाबाद शब्द हटाना नहीं था.

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इमरान प्रतापगढ़ी (फोटो- आजतक)
इमरान प्रतापगढ़ी (फोटो- आजतक)

'साहित्य आजतक' के दूसरे दिन की शाम को शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने मंच की रौनक बढ़ाई. अपनी शायरी से नौजवानों के दिलों में अपनी एक खास बनाने वाले इमरान ने हल्ला बोल चौपाल के सत्र 'भारत का इमरान' में शिरकत की. उनके चाहने वाले उनकी नजमों और गजलों के कायल हैं. आज के कार्यक्रम ने इमरान ने अपनी कुछ ऐसी ही नज्में सुनाईं.

इमरान ने कहा कि मेरा नाम ऐसा है कि पड़ोसी मुल्क की वजह से भी चर्चा में रहता है, लेकिन आज भारत का इमरान बोल रहा है. उन्होंने अपनी पसंदीदा नज्मों से समां बांध दिया. प्रतापगढ़ के रहने वाले शायर ने कहा कि इलाहाबाद मेरी सांसों के करीब है और उसका नाम बदलने से कुछ नहीं होगा क्योंकि वह शहर तहजीब बनकर हमारी सांसों में बसता है, उसका नाम नहीं बदला जा सकता. 

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योगी आदित्यनाथ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इलाहाबाद तो पहले से ही प्रयागराज था ऐसे में अगर उन्हें अपनी राजनीति को बढ़ाना ही था तो शहर का नाम प्रयागराज इलाहाबाद रख देते, उन्हें इलाहाबाद शब्द हटाना नहीं था. ऐसा करने से दोनों तहजीबें बच जाती और ऐसे सवाल भी न उठते. इमरान ने एक नज्म के जरिए कहा कि तुम्हारे पहले बोला है, तुम्हारे बाद बोलेंगे, तुम्हारे फैसले बिल्कुल हैं बेबुनियाद बोलेंगे...भले ही नाम कागज से मिटा दो दिल पे लिखा है, इलाहाबाद बोला था इलाहाबाद ही बोलेंगे.

आज के दौर के सबसे पॉपुलर शायरों में एक इमरान ने कहा कि उनकी कई नज्मों को यूट्यूब पर लाखों-करोड़ों बार देखा जा चुका है लेकिन मुशायरों और कवि सम्मेलनों में जो प्यार मिलता है उसे समेट पाना मुश्किल है. उन्होंने कहा जब लाइव एक लाख लोग आपको सुन रहे हों, ऐसे में उनके प्यार के लिए शुक्रिया जताना कठिन हो जाता है.

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