मुंबई जैसे शहर में जहां हर इंच जमीन की कीमत है और गर्मी के साथ-साथ भीड़, ट्रैफिक और कंक्रीट से बनी बड़ी-बड़ी इमारतों का भी झुंड देखने को मिलता है. जहां एक ओर मुकेश अंबानी का 'एंटीलिया' है, वहीं दूसरी तरफ बड़े-बड़े स्टार्स का घर चर्चा में रहता है. लेकिन इन सबके बीत मुंबई का एक ऐसा घर भी चर्चा में है जो बाकी पूरे शहर से करीब 2 डिग्री सेल्सियस ठंडा रहता है. खास बात ये है कि इसके लिए किसी खास कूलिंग सिस्टम का ही सहारा नहीं लिया गया, बल्कि घर के आसपास की हरियाली और बेहतर अर्बन प्लानिंग को इसकी बड़ी वजह बताया गया है.
ये आलीशान घर मुंबई के पवई इलाके में है और इसे रियल एस्टेट बिजनेसमैन निरंजन हीरानंदानी ने तैयार कराया है. करीब 25,000 स्क्वायर फीट में फैले इस पेंटहाउस से पवई और विहार झील का खूबसूरत नजारा दिखाई देता है. हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान इस घर की झलक सामने आई, जिसके बाद से ये सोशल मीडिया और यूट्यूब पर चर्चा में है.
25 हजार स्क्वायर फीट का पेंटहाउस, चारों तरफ हरियाली
निरंजन हीरानंदानी ने फाइनेंशियल कंटेंट क्रिएटर शरण हेगड़े के साथ बातचीत में अपने इस पेंटहाउस और पवई को लेकर कई बातें बताईं. उनका कहना है कि मुंबई में खराब इंफ्रास्ट्रक्चर और भीड़भाड़ देखकर उनके मन में ऐसा इलाका डेवलप करने का आया, जहां सड़क, ड्रेनेज, पानी, सीवेज और हरियाली जैसी सुविधाओं की प्लानिंग अच्छी हो.
उनका पेंटहाउस भी इसी सोच का हिस्सा नजर आता है. घर से पवई और विहार झील का शानदार व्यू मिलता है, जबकि आसपास मौजूद हरियाली इसे शहर के बाकी हिस्सों से अलग माहौल देती है.
आखिर शहर से 2°C ठंडा कैसे रहता है ये इलाका?
इस घर की सबसे दिलचस्प बात इसका टेंपरेचर है. निरंजन हीरानंदानी के मुताबिक, उनके एस्टेट का टेंपरेचर मुंबई के बाकी हिस्सों की तुलना में करीब 2°C कम रहता है. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह आसपास की हरी-भरी जगह और सोची-समझी अर्बन प्लानिंग बताई गई है. शहरों में ज्यादा सीमेंट-कंक्रीट और कम पेड़-पौधे होने से गर्मी ज्यादा महसूस होती है. वहीं, आसपास हरियाली और खुले इलाके होने से वातावरण कुछ ठंडा रह सकता है.
यानी इस घर की खासियत सिर्फ महंगा इंटीरियर या बड़ा एरिया नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार करना भी है जहां कंक्रीट से भरे शहर के बीच थोड़ी ठंडक महसूस हो.
मुंबई की भीड़ देखकर आया था ऐसा शहर बनाने का आइडिया
निरंजन हीरानंदानी ने बताया कि जब वो अंधेरी के लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स में रहते थे, तब उन्होंने मुंबई के इंफ्रास्ट्रक्चर की कई परेशानियां देखीं. उनके मुताबिक वहां सी सड़कें खराब थी, स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज नहीं था, स्ट्रीट लाइट्स की भी समस्या थी, पानी और सीवेज जैसी सुविधाओं से जुड़ी दिक्कतें भी बहुत थीं.
इसी एक्सपीरियंस के बाद उनके मन में एक ऐसा टाउनशिप बनाने का विचार आया, जहां सड़क से लेकर ड्रेनेज और दूसरी सुविधाओं की पहले से बेहतर प्लानिंग हो. इसी सोच के साथ पवई को विकसित करने का सपना देखा गया.