हर महीने बैंक खाते से थोड़े थोड़े पैसे कटते हैं. कभी ओटीटी का सब्सक्रिप्शन पेमेंट, कभी म्यूजिक ऐप की मेंबरशिप, कभी किसी फिटनेस ऐप का पैसा. अलग-अलग देखें तो ये खर्च बहुत बड़े नहीं लगते, लेकिन महीने के आखिर में इन्हीं छोटी-छोटी कटौतियों का हिसाब देखकर पता चलता है कि पैसा आखिर जा कहां रहा है.
इसीलिए अब जेन जी के बीच ‘सब्सक्रिप्शन डिटॉक्स’ की बात हो रही है. इसका सीधा मतलब है ऐसी सभी मेंबरशिप्स को बंद करना, जिनका इस्तेमाल बहुत कम हो रहा है या जिनकी अब जरूरत नहीं लगती.
हर ऐप की मेंबरशिप क्यों चाहिए?
कुछ टाइम पहले तक हर नए OTT या ऐप की मेंबरशिप लेना आम बात थी. एक सीरीज के लिए एक मंच, दूसरी फिल्म के लिए दूसरा और म्यूजिक के लिए अलग मेंबरशिप. ऊपर से कई ऐप फ्री ट्रायल के बाद अपने आप पैसे काटते रहते हैं.
जेन जी अब इन सभी खर्चों को दोबारा देख रही है. अगर किसी ऐप को महीने में एक-दो बार ही खोला जा रहा है, तो उसकी मेंबरशिप रखने का क्या फायदा?
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खर्चों पर लगाम लगाने की कोशिश
जेन जी के लिए पैसे बचाना अब सिर्फ बड़ी खरीदारी रोकना नहीं है. छोटी-छोटी चीजों पर होने वाले खर्च भी मायने रखते हैं. हर महीने कुछ 100 रुपये अलग-अलग मेंबरशिप्स में चले जाएं, तो साल भर में ये रकम काफी बड़ी हो सकती है.
इसलिए कई लोग अपने फोन में मौजूद सभी मेंबरशिप्स की लिस्ट देख रहे हैं और जो काम की नहीं हैं, उन्हें बंद कर रहे हैं.
एक साथ सब कुछ नहीं चाहिए
इसका एक कारण ये भी है कि अब मनोरंजन के इतने ऑपशन्स हैं कि हर चीज की मेंबरशिप लेना जरूरी नहीं लगता. किसी खास सीरीज या फिल्म के लिए एक महीने मेंबरशिप ली और काम खत्म होने के बाद उसे बंद कर दिया-ये तरीका भी तेजी से पसंद किया जा रहा है.
यानी जेन जी अब ये सोच रही है कि ‘पैसा कट रहा है, तो इस्तेमाल भी होना चाहिए.'
‘सब्सक्रिप्शन डिटॉक्स’ सिर्फ पैसे बचाने का तरीका नहीं, बल्कि अपनी डिजिटल जिंदगी को थोड़ा साफ करने की कोशिश भी है. आखिर फोन में जितने ज्यादा ऐप, उतनी ज्यादा मेंबरशिप्स और उतने ही ज्यादा छोटे-छोटे खर्च.