
मध्य प्रदेश के बैतूल में रविवार को आस्था, भक्ति और वैराग्य का अनूठा संगम देखने को मिला. यहां जैन दीक्षा लेने जा रहीं पांच दीक्षार्थी बहनों के सम्मान में भव्य बिनौली चल समारोह निकाला गया. इनमें बैतूल की बेटी और नगर गौरव ब्रह्मचारिणी प्रखरश्री दीदी भी शामिल हैं. खास बात यह है कि प्रखरश्री ने जज की परीक्षा पास कर ली थी, लेकिन पद पर जॉइनिंग से पहले उन्होंने संयम और वैराग्य का मार्ग चुन लिया.
बैतूल सकल जैन समाज के सहयोग से आयोजित इस धार्मिक समारोह में विंटेज कारें, आकर्षक शाही बग्घियां और राजस्थान के उदयपुर से आए बैंड ने विशेष आकर्षण बढ़ाया. शहर की सड़कों से निकले इस चल समारोह में बड़ी संख्या में समाजजन और दूर-दराज से आए श्रद्धालु शामिल हुए.
जगह-जगह पुष्पमालाओं और जयकारों के साथ पांचों दीक्षार्थी बहनों का स्वागत किया गया. पूरे रास्ते भक्ति और उत्साह का माहौल रहा. चल समारोह जैन दादावाड़ी पहुंचकर संपन्न हुआ. यहां पांचों दीक्षार्थी बहनों की गोदभराई की पारंपरिक रस्म पूरी की गई.

जज की परीक्षा पास की, अब महावीर के मार्ग पर चलने का संकल्प
प्रखरश्री दीदी ने बताया कि उनके माता-पिता की इच्छा थी कि वह जज की परीक्षा पास करें. उन्होंने परीक्षा क्वालीफाई कर अपने माता-पिता का यह सपना पूरा किया. हालांकि, बचपन से ही उनके मन में वैराग्य की भावना थी.
प्रखरश्री दीदी के मुताबिक, जज या वकील बनकर वह समाज की उतनी सेवा नहीं कर पातीं, जितनी भगवान महावीर के बताए मार्ग पर चलकर कर सकती हैं. इसी भावना के चलते उन्होंने सांसारिक जीवन छोड़कर संयम का मार्ग अपनाने का निर्णय लिया.
पांचों बहनें 22 नवंबर को लेंगी दीक्षा
दीक्षार्थी रंगोली दीदी ने बताया कि यह हर बेटी की अंतिम विदाई का समय है. अभी वे रंगीन वस्त्रों में हैं, लेकिन दीक्षा के बाद सफेद वस्त्र धारण करेंगी. उन्होंने बैतूल की प्रखर दीदी के परिजनों की ओर से आयोजित भव्य विदाई के लिए आभार भी जताया.
प्रखरश्री दीदी के साथ चार अन्य दीक्षार्थी बहनें भी 22 नवंबर को दीक्षा लेंगी. इससे पहले परिवार और जैन समाज ने उनका सम्मान करते हुए भव्य बिनौली निकाली. सांसारिक सुखों से विरक्ति और संयम के मार्ग पर बढ़ते इन कदमों का बैतूल के जैन समाज ने आत्मीय अभिनंदन किया.