घर या आंगन की बाउंड्री या फिर घर के अंदर लगे पेड़-पौधे खूबसूरती तो बढ़ाते हैं लेकिन कई बार पड़ोसी के आंगन में लगा पेड़ बढ़कर आपकी छत, बालकनी या आंगन में फैलने लगता है या फिर आपके घर में लगा पेड़ पड़ोसी के घर तक पहुंच जाता है. पेड़ की टहनियों की वजह से न केवल घर में आने वाली धूप रुकती है, बल्कि सूखे पत्तों का कचरा, कीड़े-मकोड़ों का खतरा और दीवार/छज्जे को नुकसान पहुंचने का डर भी बना रहता है.
ऐसी स्थिति में अक्सर मन में सवाल उठता है कि क्या आप अपनी बाउंड्री के अंदर आई पड़ोसी के पेड़ की टहनियों को खुद काट सकते हैं या फिर ऐसा करने से पड़ोसी के साथ विवाद और कानूनी पचड़ा खड़ा हो सकता है. वास्तव में भारतीय कानून और प्रॉपर्टी राइट्स के तहत आपके पास इस समस्या से निपटने के अधिकार मौजूद हैं. यहां हम आपको इस मामले की पूरी डिटेल दे रहे हैं.
हाईकोर्ट भी पहुंच चुकी है पेड़ की लड़ाई
केरल हाई कोर्ट ने कुछ समय पहले दो पड़ोसियों के बीच नारियल के पेड़ को लेकर हुए विवाद से जुड़ी एक रिट याचिका का निपटारा किया. कोर्ट ने कहा कि यह मामला पड़ोसियों के बीच एक मामूली सी अनबन को बेवजह बड़ा बनाने का नतीजा था और इसे चाय या कॉफी पीते हुए आपसी बातचीत से सुलझाया जा सकता था.
जस्टिस पी.वी. कुन्हीकृष्णन ने विवाद में दखल देने से इनकार करते हुए टिप्पणी की कि अगर विवाद की जड़ बने नारियल के पेड़ में हंसने की क्षमता होती तो वो उन पड़ोसियों पर हंसता जिन्होंने इस मामले को हाई कोर्ट समेत कई मंचों तक घसीटा.
कोर्ट ने पाया कि दोनों पक्षों के बीच आपसी मतभेदों और अहंकार की लड़ाई ने एक मामूली मुद्दे को लंबे कानूनी विवाद में बदल दिया था.
कोर्ट ने यह भी कहा कि यह मामला पड़ोसियों के बीच एक मामूली सी अनबन को बेवजह बड़ा बनाने जैसा था. वास्तव में जब इस मामले में पहले ही कानूनी विकल्प मौजूद हैं तो फिर इसे कोर्ट में घसीटना वक्त की बर्बादी ही थी.
क्या था मामला
यह विवाद तिरुवनंतपुरम जिले के काराकुलम गांव में अगल-बगल रहने वाले मकान मालिकों के बीच हुआ. याचिकाकर्ता का आरोप था कि पड़ोसी की जमीन पर खड़ा नारियल का पेड़ उसके परिवार और संपत्ति के लिए खतरा था. खासकर इसलिए क्योंकि नारियल उसके परिसर में गिरते थे और वहां खड़ी गाड़ियों को नुकसान पहुंचा सकते थे.
याचिकाकर्ता ने पेड़ के खिलाफ कार्रवाई के लिए पंचायत, राजस्व अधिकारियों और बाद में स्थानीय लोकपाल सहित कई अधिकारियों से संपर्क किया था. हालांकि, पंचायत ने पाया कि पेड़ से कोई तत्काल खतरा नहीं था और कुछ उपाय भी बताए जैसे पेड़ को लोहे के सहारे से सुरक्षित करना और नारियल को याचिकाकर्ता की संपत्ति में गिरने से रोकने के लिए सुरक्षा जाल लगाना.
लेकिन याचिकाकर्का किसी से संतुष्ट नहीं हुआ और उसने हाईकोर्ट का रुख किया. इसके बाद पेड़ का निरीक्षण और रिपोर्ट में बताया गया कि पेड़ को लोहे के सहारे से सुरक्षित किया गया था जिससे वो याचिकाकर्ता की संपत्ति की तरफ थोड़ा दूर झुक गया था और उसके चारों ओर पहले से ही एक सुरक्षा जाल लगाया गया था.
कमिश्नर ने यह भी पाया कि पेड़ के समय-समय पर रखरखाव और जाल को बढ़ाने से नारियल या सूखी पत्तियों के गिरने से जुड़ी घटना भी नहीं होने वाली है. इसके बाद याचिकाकर्ता की चुनौती को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि पेड़ से कोई वास्तविक खतरा न होने के बावजूद यह मामला स्थानीय अधिकारियों से राजस्व अधिकारियों, लोकपाल और आखिर में हाईकोर्ट तक पहुंचा.
कोर्ट ने टिप्पणी की कि न्यायिक समय ऐसे विवाद में बर्बाद हो रहा था जो किसी वास्तविक कानूनी शिकायत के बजाय पड़ोसियों के बीच खराब रिश्तों से उपजा था. कोर्ट ने कहा, ऐसे समय में जब कोर्ट पर गंभीर सिविल, क्रिमिनल और दूसरे मामलों का बोझ है, इस केस पर बहस करके कोर्ट का समय बर्बाद किया जा रहा है.
याचिकाकर्ता की शिकायत, भले ही किसी स्तर पर सही रही हो, लेकिन पड़ोसी परिवारों के बीच आपसी मतभेदों और अहंकार की लड़ाई के कारण इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है.
कोर्ट ने दोनों पक्षों को सलाह दी कि वे इस मुद्दे पर कानूनी लड़ाई जारी रखने के बजाय आपसी बातचीत से अपने मतभेद सुलझाएं और साथ बैठकर चाय या कॉफी पिएं.
क्या पड़ोसी काट सकता है आपका पेड़? पहले सुनिए ये कहानी
ये मामला तो केरल के हाईकोर्ट तक पहुंच गया. लेकिन कुछ मामलों में लोगों ने इस झगड़े को खुद ही सुलझा लिया. एक शख्स ने रेडिट डॉट कॉम पर कुछ समय पहले अपनी कहानी शेयर की थी.
उन्होंने लिखा था, मेरे पड़ोसी मेरे 40 साल से ज्यादा पुराने पेड़ को काटना चाहते हैं. सिर्फ इसलिए क्योंकि उसकी पत्तियां उड़कर उनकी जमीन पर गिरती हैं. मेरे माता-पिता ने यह जमीन 50 साल पहले खरीदी थी.
तब हमारे छोटे से गांव में सिर्फ हम और वो पड़ोसी थे जिन्होंने हमें जमीन बेची थी. बाद में वहां एक बुजुर्ग महिला रहने आईं, जिनका हाल ही में निधन हो गया. लगभग 10 साल पहले हमारी उन बुजुर्ग पड़ोसन ने अपनी जमीन मेरे मौजूदा पड़ोसी को बेच दी जिनके रिश्तेदार हमारे पारिवारिक दोस्त थे.
हमारी प्रॉपर्टी पर आम, कटहल, अमरूद, नारियल और कई जंगली पेड़ों जैसी कई तरह के पेड़-पौधे लगे हैं. ये एक छोटे से जंगल जैसा था. मेरे माता-पिता को हमारी पथरीली जमीन को इस हरे-भरे छोटे जंगल में बदलने के लिए मिट्टी (लगभग 200 ट्रक) खरीदनी पड़ी थी.
इनमें से हमारी प्रॉपर्टी के पिछले हिस्से में लगे कटहल के पेड़ ही अब विवाद का कारण बन गया हैं.
हमारे पड़ोसी की जमीन पर भी बहुत सारे पेड़ थे जिन्हें उन्होंने धीरे-धीरे काटकर सिर्फ 3 नारियल के पेड़ छोड़ दिए और अपनी जमीन पर 2 घर बना लिए और बाकी हिस्से को बगीचा बना दिया. उन्होंने वहां इंटरलॉक टाइलें लगवा दी हैं और इसे अपने बेटे की केक शॉप के लिए एक बड़े पार्किंग लॉट जैसा बना दिया है.
अब मेरे पेड़ कम से कम 30-35 फीट ऊंचे हैं और उन्हें पेड़ों की पत्तियों के उनकी प्रॉपर्टी पर गिरने से परेशानी है. वो चाहते हैं कि मैं पेड़ की छंटाई करूं या उसे पूरी तरह से कटवा हूं और इसका खर्च भी मैं ही उठाऊं. इन पेड़ों से उन्हें या हमें कोई खतरा नहीं है. क्योंकि कटहल के पेड़ों की जड़ें गहरी और फैली हुई होती हैं और इनकी लकड़ी मजबूत होती है.
और हमें पेड़ बहुत पसंद हैं क्योंकि अभी सिर्फ हमारी ही जमीन पर पेड़ हैं. बाकी सारी जमीन छोटे-छोटे टुकड़ों में बिक चुकी है और वहां पूरी तरह से घर या सीमेंट के ढांचे बन गए हैं.
मैंने उन्हें अपनी प्रॉपर्टी की तरफ जाने वाली टहनियों को काटने की इजाजत दे दी थी. लेकिन वो चाहते हैं कि इसका खर्च मैं उठाऊं और आखिरी समाधान के तौर पर वो चाहते हैं कि मैं पेड़ को काटकर 7 फीट (2 मीटर) का कर दूं और इसका खर्च भी मैं ही उठाऊं.
हालांकि बाद में मेरा मामला शांतिपूर्ण ढंग से सुलझ गया. जैसे ही पेड़ काटने वाले आए, मैं पेड़ के पास गया. बस कुछ छोटी टहनियां और एक बड़ी भारी टहनी (लगभग 3 फीट लंबी) काटी गईं. भारी टहनी मेरे कहने पर ही काटी गई.
शुरू में जब मैंने कहा कि सीधी टहनियां न काटें तो पड़ोसी ने फिर से पुलिस बुलाने और शिकायत करने की धमकी दी. मैंने उसे ऐसा करने की चुनौती भी दी. जब उसने देखा कि मैं उसकी धमकियों से डरने वाला नहीं हूं तो वो यह कहकर चला गया कि मैं ही वर्कर को बता दूं कि कौन-कौन सी टहनियां काटनी हैं.
तो आखिर में पेड़ 1 की 20% और पेड़ 2 की 10% छंटाई की गई. और पेड़ 3 को बिल्कुल नहीं काटा गया क्योंकि वो सीधा था और उसकी कोई भी टहनी पड़ोसी की जमीन की तरफ नहीं झुकी हुई थी.
मैंने अपने पड़ोसी से यह भी कहा कि मैं मॉनसून के दौरान या उसके बाद पेड़ की और छंटाई करवाऊंगा.
सबसे मजेदार बात है कि मुझसे ज्यादा पेड़ काटने वाला व्यक्ति ही पड़ोसी की भारी टहनियां काटने की मांग मानने को तैयार नहीं था. (या तो वह सच में पेड़ों से प्यार करने वाला इंसान था या उसे पहले ही बता दिया गया था कि मैं पेड़ नहीं कटवाना चाहता).
पड़ोसी के पेड़ की टहनी काटने के नियम और कानूनी अधिकार
कानून के मामलों से जुड़ी वेबसाइट lawrato.com के अनुसार, अगर पड़ोसी का पेड़ आपको परेशान करे तो सबसे पहले आप अपने पड़ोसी से बात करें और आपस में मामला सुलझाएं.
अगर आपका पड़ोसी मामले आपस में नहीं सुलझाना चाहता है तो आप पड़ोसी को एक लीगल नोटिस भेजें जिसमें ये मांग करें कि लटकती हुई डालियों और जड़ों को तुरंत काटा जाए. अगर जरूरी हो तो मौजूदा नुकसान के लिए मुआवजा भी मांगे.
आप इलाके के म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में कंप्लेंट फाइल कर सकते हैं. अगर पड़ोसी नोटिस के बाद भी मना करता है तो आप नुकसान के लिए सिविल केस फाइल कर सकते हैं.
छत और स्ट्रक्चरल नुकसान के लिए हर्जाने का दावा कर सकते हैं.
आप खुद भी पेड़ की छंटाई कर सकते हैं लेकिन आप पेड़ का सिर्फ वही हिस्सा काट सकते हैं जो आपकी बाउंड्री में आता है. आप पड़ोसी की जमीन में कदम रखकर या उसकी बाउंड्री के अंदर जाकर पेड़ की टहनी नहीं काट सकते.
हालांकि, बाद में झगड़े से बचने के लिए किसी प्रोफेशनल आर्बोरिस्ट (पेड़ों के एक्सपर्ट) को हायर करें और उसकी देखरेख में पेड़ कटवाएं. ताकि पेड़ सुरक्षित तरीके से कटें.
अगर आपके काटने से पूरा पेड़ सूख जाता है या असंतुलित होकर गिर जाता है तो पड़ोसी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का केस दर्ज करा सकता है.