सुप्रीम कोर्ट में अब चीफ जस्टिस समेत जजों की संख्या 34 से बढ़कर 38 हो जाएगी. इससे जुड़ा बिल The Supreme Court (Number of Judges) Amendment Bill, 2026 सोमवार को लोकसभा से पास हो गया है. अब इसे राज्यसभा में भेजा जाएगा. इस बिल के कानून बन जाने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस समेत 38 जज होंगे.
सोमवार को लोकसभा ने बिना किसी बहस के इस बिल को पास कर दिया. यह बिल उस अध्यादेश की जगह लेने के लिए था जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश सहित) 34 से बढ़ाकर 38 कर दी गई थी. इस दौरान विपक्ष के सदस्यों ने NEET पेपर लीक और राम मंदिर के चंदे में कथित चोरी के खिलाफ नारेबाज़ी की.
विपक्ष के सदस्यों ने अध्यादेश जारी करने के खिलाफ एक वैधानिक प्रस्ताव पेश किया था, जिसे ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया.
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की शुरुआती बातों के बाद, पीठासीन अधिकारी ने सदस्यों से वैधानिक प्रस्ताव पर बोलने का आग्रह किया, लेकिन नारेबाज़ी जारी रहने के कारण बिल को वोटिंग के लिए रखा गया और बाद में इसे मंज़ूरी दे दी गई.
आइए जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या कब कब बढ़ाई गई है.
28 जनवरी 1950 को भारत में संविधान लागू होने के बाद सुप्रीम कोर्ट का उद्घाटन हुआ. यह उद्घाटन पुरानी संसद भवन के 'चैंबर ऑफ़ प्रिंसेस' में हुआ, जहां 1937 से 1950 तक 12 वर्षों तक भारत की फेडरल कोर्ट बैठती थी.
1950 में भारत के सुप्रीम कोर्ट में कुल 8 जज थे. इनमें 1 चीफ जस्टिस और 7 अन्य जज थे.
1956 में संविधान संशोधन के जरिये जजों की संख्या चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया समेत बढ़ाकर 11 कर दी गई.
चार साल बाद सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या फिर बढ़ाई गई. 1960 में सर्वोच्च न्यायालय में जजों की संख्या 14 कर दी गई. इसमें CJI भी शामिल थे.
1977 में एक बार जजों की संख्या में एक बार फिर इजाफा किया गया और इसे 14 से 18 कर दिया गया.
1986 में सबसे बड़ी बढ़ोतरी हुई, जब सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 18 से बढ़ाकर 26 (CJI सहित) कर दी गई.
2008 में एकबार फिर संविधान में संशोधन किया गया. दरअसल सुप्रीम कोर्ट पर मुकदमों को बोझ बढ़ता जा रहा था. जजों की संख्या सीमित थी. अब जजों की संख्या को 31 कर दिया गया. इसमें चीफ जस्टिस भी शामिल थे.
11 वर्षों के बाद सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने की जरूरत फिर पड़ गई. 2019 में संविधान संशोधन कर जजों की संख्या को 34 कर दिया गया. इसमें चीफ जस्टिस भी शामिल हैं.
2019 के बाद 2026 में सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाई गई है. इस बार संशोधन के जरिये सुप्रीम कोर्ट के कुल जजों की संख्या 38 कर दी है.
इस तरह, 1950 से अब तक सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या कुल 7 बार बढ़ाई जा चुकी है.
14 करोड़ का अलग से खर्च
सरकार का अनुमान है कि जजों की संख्या बढ़ने से सरकारी खजाने पर 14.04 करोड़ रुपये का खर्च होगा. इसमें अतिरिक्त जजों और सपोर्ट स्टाफ़ के लिए हर साल होने वाला ₹10.56 करोड़ का खर्च और ऑफ़िशियल इंफ़्रास्ट्रक्चर के लिए एक बार होने वाला ₹3.47 करोड़ का खर्च शामिल है.
यह फ़ैसला देश की सबसे बड़ी अदालत में मुकदमों के बढ़ते बोझ को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच लिया गया है. संसदीय कार्यवाही के दौरान पेश किए गए न्यायिक आंकड़ों के अनुसार 2026 की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की कुल संख्या 92,000 से ज़्यादा हो गई थी.
हालांकि सुप्रीम कोर्ट अपनी पूरी क्षमता के करीब काम कर रहा है, फिर भी नए मामलों के आने की रफ़्तार उनके निपटारे की रफ़्तार से ज़्यादा बनी हुई है. बेंच की संख्या बढ़ाने से मुकदमों का प्रबंधन बेहतर होगा और लंबे समय से लंबित संवैधानिक मामलों के लिए ज़्यादा समर्पित बेंच उपलब्ध हो पाएंगी. लोकसभा से मंज़ूरी मिलने के बाद यह बिल अब राज्यसभा में विचार और मंज़ूरी के लिए जाएगा, जिसके बाद इसे राष्ट्रपति की औपचारिक मंज़ूरी मिलेगी.