केरल हाईकोर्ट ने 17 साल की नाबालिग लड़की से बार-बार रेप के आरोपी को बड़ा झटका दिया है. कोर्ट ने उसकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपने खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही खत्म करने की मांग की थी. आरोपी का दावा था कि लड़की उसकी पत्नी है और दोनों की शादी मुस्लिम रीति-रिवाज से हुई थी. हाईकोर्ट ने साफ कहा कि लड़की की उम्र 18 साल से कम होने पर शादी का दावा आरोपी को POCSO एक्ट के तहत आपराधिक जिम्मेदारी से नहीं बचा सकता. जस्टिस जॉबिन सेबेस्टियन ने मन्नारक्कड़ पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले के पहले आरोपी की याचिका खारिज की. यह मामला पट्टांबी की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट में लंबित है. कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के इंडिपेंडेंट थॉट मामले में दिए गए फैसले का भी हवाला दिया. कोर्ट ने कहा कि 18 साल से कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध बनाने पर रेप के मामले में कार्रवाई हो सकती है, भले ही वह आरोपी की पत्नी हो.
कोर्ट ने कहा कि आरोपी भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के अपवाद 2 का सहारा लेकर मुकदमे से बच नहीं सकता. आरोपी की ओर से दलील दी गई थी कि लड़की उसकी कानूनी रूप से विवाहित पत्नी थी. उसके वकील ने कहा कि दोनों की शादी तब हुई थी, जब लड़की की उम्र 17 साल एक महीने थी और शादी मुस्लिम धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार हुई थी. हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया. कोर्ट ने कहा कि अगर यह मान भी लिया जाए कि मुस्लिम रीति-रिवाजों और धार्मिक समारोहों के अनुसार शादी हुई थी, तब भी इससे आरोपी की आपराधिक जिम्मेदारी खत्म नहीं होती. खास तौर पर इसलिए क्योंकि कथित शादी और उसके बाद हुए यौन संबंधों के समय लड़की 17 साल की थी.
हाईकोर्ट ने केस खत्म करने से किया इनकार
कोर्ट ने साफ किया कि जब शादी में शामिल पक्षों में से कोई एक नाबालिग है, तो POCSO एक्ट लागू होगा. यह इस बात पर निर्भर नहीं करता कि पर्सनल लॉ के तहत शादी वैध है या नहीं. यानी आरोपी केवल वैवाहिक रिश्ते का हवाला देकर POCSO के तहत चल रही कार्रवाई से बच नहीं सकता. आरोपी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 528 के तहत अपने खिलाफ चल रही कार्यवाही खत्म करने की मांग की थी. अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 23 अक्टूबर 2021 को आरोपी लड़की को कार से अपने घर ले गया था. आरोप है कि 23 से 26 अक्टूबर के बीच उसके साथ बार-बार रेप किया गया. मामले में दूसरे और तीसरे आरोपी पर भी अपराध में मदद करने का आरोप लगाया गया है.
अभियोजन पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि लड़की के माता-पिता को पहले आरोपी की ओर से किए गए कथित अपराध की जानकारी थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने लड़की को वापस नहीं लिया और मामले की सूचना अधिकारियों को नहीं दी. आरोपी के वकील ने IPC की धारा 375 के अपवाद 2 का हवाला देते हुए कहा कि पति द्वारा अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध रेप नहीं माना जाएगा, अगर पत्नी की उम्र 15 साल से कम नहीं है. इसी आधार पर आरोपी की ओर से अंतिम रिपोर्ट और आगे की पूरी कार्यवाही रद्द करने की मांग की गई थी.
इसका विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष की ओर से कहा गया कि लड़की 18 साल से कम उम्र की थी और इसलिए POCSO एक्ट के तहत वह बच्ची है. ऐसे में शादी का दावा होने के बावजूद उसके साथ यौन संबंध POCSO के तहत अपराध होगा. कोर्ट ने पुलिस को दिए लड़की के बयान में लगाए गए आरोपों का भी उल्लेख किया. आरोप है कि आरोपी कार से आया था और लड़की से कहा था कि वह उसके लिए कपड़े खरीदेगा. इसके बाद वह उसे थोट्टारा स्थित अपने घर ले गया.
आरोप के मुताबिक, लड़की को वहां रुकने के लिए कहा गया. उसने आरोपी की मां के साथ सोने की इच्छा जताई, लेकिन उसे आरोपी के कमरे में भेज दिया गया और बाहर से दरवाजा बंद कर दिया गया. लड़की ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने 23 अक्टूबर की रात उसके साथ जबरन यौन संबंध बनाए और अगले चार दिनों तक भी ऐसा करता रहा. हाईकोर्ट ने कहा कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है, इसका फैसला पूरी सुनवाई के बाद ही किया जा सकता है. हालांकि, पहली नजर में आरोपों से कथित अपराध सामने आता है. इसलिए इस स्तर पर आपराधिक कार्यवाही खत्म करने का कोई आधार नहीं है.
कोर्ट ने आरोपी के उस दावे पर भी गौर किया कि लड़की उसकी कानूनी रूप से विवाहित पत्नी थी. कोर्ट ने कहा कि इस दावे का आधार मुख्य रूप से लड़की, उसके भाई और उस मस्जिद के काजी के पुलिस को दिए बयान हैं, जहां कथित तौर पर शादी हुई थी. कोर्ट ने कहा कि वास्तव में वैध शादी हुई थी या नहीं, इसका फैसला ट्रायल के दौरान ही किया जा सकता है. कोर्ट ने यह भी नोट किया कि शादी के आयोजन को साबित करने वाला कोई दस्तावेजी सबूत मौजूद नहीं है.
युवक पर 23 से 26 अक्टूबर के बीच रेप का आरोप
हाईकोर्ट ने अपने पुराने फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें POCSO एक्ट को बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए बनाया गया विशेष कानून बताया गया था. कोर्ट ने POCSO एक्ट की धारा 2(1)(d) का उल्लेख करते हुए कहा कि 18 साल से कम उम्र का व्यक्ति बच्चा माना जाता है. साथ ही धारा 42A का जिक्र किया, जो किसी दूसरे कानून के साथ टकराव होने पर POCSO एक्ट को प्रभावी बनाती है.
कोर्ट ने कहा कि 18 साल से कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध POCSO एक्ट के तहत अपराध है. ऐसी स्थिति में लड़की आरोपी की पत्नी है या नहीं, इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता. हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस स्तर पर की गई टिप्पणियां सिर्फ आरोपी की याचिका पर फैसला करने के लिए हैं. इन टिप्पणियों का ट्रायल कोर्ट में मामले की मेरिट पर फैसला करते समय कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.