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पाकिस्तान में क्यों सालों तक पूर्वजों की अस्थियां रखते हैं हिंदू? कहां करते हैं अस्थि विसर्जन?

पाकिस्तान में कई हिंदुओं को वीजा की वजह से अपने परिजनों को अस्थियों को रखना पड़ता है. तो जानते हैं ऐसा क्यों किया जाता है?

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पाकिस्तान में कई जगहों पर लोग अस्थि विसर्जन के लिए लंबा इंतजार करते हैं. (Photo: AI Generated)
पाकिस्तान में कई जगहों पर लोग अस्थि विसर्जन के लिए लंबा इंतजार करते हैं. (Photo: AI Generated)

क्या आप जानते हैं पाकिस्तान में कुछ हिंदू लंबे अपने पूर्वजों की अस्थियों को साथ रखते हैं. लेकिन, कुछ इलाकों के हिंदू अपने परिजनों की मृत्यु के बाद उनकी अस्थियों को वहां ही विसर्जन करते हैं. ऐसे में सवाल है कि आखिर कुछ हिंदू अस्थियों को अपने पास क्यों रखते हैं? इसके अलावा सवाल ये भी है कि जिस तरह यहां गंगा जैसी पवित्र नदियों में अस्थि विसर्जन कर दिया जाता है, वैसे वहां के हिंदू अस्थियों को कहां विसर्जित करते हैं? तो जानते हैं पाकिस्तानी हिंदुओं की ओर से किए जाने वाले अस्थि विसर्जन से जुड़ी खास बातें... 

क्यों अपने साथ रखते हैं अस्थियां?

इस बारे में जब हमने पाकिस्तान में रहे और अब भारतीय नागरिकता हासिल करने वाले दिलीप सिंह सोढ़ा से बात की तो उन्होंने बताया कि पाकिस्तान में कुछ इलाकों के लोग अपने आस-पास की पवित्र जगहों पर परिजनों की अस्थियों का विसर्जन कर देते हैं जबकि कुछ इलाके ऐसे हैं, जहां के लोग अस्थियों को साथ रखते हैं या फिर अस्थि कलेक्शन के एक स्थान पर रखते हैं. आम तौर पर कराची और बलूचिस्तान साइड  में रह रहे हिंदू ऐसा करते हैं, जबकि सिंध प्रांत के हिंदू अस्थियों को विसर्जन कर देते हैं. 

आखिर  ऐसा  करते क्यों हैं... दरअसल, ये लोग परिजनों की अस्थियों को गंगा में विसर्जित करना चाहते हैं और हरिद्वार आने के इंतजार में अस्थियां रखी रहती हैं. जब लंबे समय तक वीजा नहीं मिल पाता है तो लंबे वक्त तक अस्थियां रखी रहती हैं. कराची के कई श्मशान घाटों में अस्थियां लॉकर में बंद रहती हैं और वीजा मिलने के बाद उन्हें गंगा में विसर्जित किया जाता है. कई बारे ऐसे होता है कि कुछ लोग एक साथ कई अस्थियों को भारत लाते हैं और यहां अस्थि विसर्जन करते हैं. 

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पिछले साल ही पाकिस्तान में पिछले एक दशक के दौरान दिवंगत 400 हिंदुओं और सिखों के अस्थि अवशेषों को अटारी-वाघा संयुक्त चेक पोस्ट के जरिए भारत लाया गया. इन अवशेषों को हरिद्वार में गंगा नदी में विसर्जित किया गया. 

वहां कहां करते हैं अस्थि विसर्जन?

इनके अलावा सिंध प्रांत (यहां सबसे ज्यादा हिंदू रहते हैं) में रहने वाले हिंदू अपने आस-पास के पवित्र स्थलों पर अस्थि विसर्जन कर देते हैं. दिलीप सिंह सोढ़ा ने बताया कि उमरकोट के आसपास  रहने वाले हिंदू अस्थियों को लाखियो में विसर्जित करते हैं. खास बात ये है कि यहां पानी नहीं है, जबकि यहां व्हाइट डेजर्ट है. यहां मिट्टी का खास तरह का दलदल है, जहां कोई भी चीज जाती है तो धसती चली जाती है और कई बार ऊंट तक इसमें धंस जाते हैं. इसे अछियो थार या व्हाइट डेजर्ट कहा जाता है. यहां स्थानीय लोगों के साथ जाना होता है और फिर अस्थि विसर्जन किया जाता है. 

इसके अलावा थरपारकर के कुछ हिंदू सरधड़ो धाम में अस्थि विसर्जित करते हैं. ये सिंध के थरपारकर (उमरकोट) जिले के करूंझर पहाड़ों में स्थित एक प्राचीन शिव तीर्थ है. यहां एक पवित्र कुंड है, जहां सिंधी हिंदू अस्थि विसर्जन भी करते हैं. 

वहीं, कुछ हिंदू साध बेलो में सिंधु नदी में अस्थि विसर्जित करते हैं. ये सिंध के सुक्कुर शहर के पास सिंधु नदी के बीच स्थित एक तीर्थ है. यह पाकिस्तान के सबसे बड़े और सबसे श्रद्धेय हिंदू मंदिर परिसरों में से एक है. यहां भी सिंधी हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों के साथ अस्थि विसर्जन करते हैं.

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