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हेलीकॉप्टर के पीछे छोटा पंखा क्यों होता है? जानिए इसका असली काम

हेलीकॉप्टर के ऊपर लगा बड़ा रोटर उसे हवा में उड़ने और ऊपर उठने में मदद करता है, लेकिन इसके घूमने से हेलीकॉप्टर के शरीर पर टॉर्क पैदा होता है. पीछे लगा छोटा पंखा यानी टेल रोटर इस घूमने वाले फोर्स को बैलेंस करता है.  

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हेलीकॉप्टर की पूंछ पर लगा छोटा पंखा आकार में भले ही छोटा दिखाई देता हो, लेकिन इसका काम बहुत बड़ा है. ( Photo: ITG)
हेलीकॉप्टर की पूंछ पर लगा छोटा पंखा आकार में भले ही छोटा दिखाई देता हो, लेकिन इसका काम बहुत बड़ा है. ( Photo: ITG)

हेलीकॉप्टर को आसमान में उड़ते हुए देखकर अक्सर लोगों के मन में एक सवाल आता है कि इसके ऊपर तो बड़ा पंखा लगा है, लेकिन पीछे छोटा सा पंखा क्यों लगाया जाता है? क्या इसका काम भी हेलीकॉप्टर को उड़ाने का होता है? दरअसल, पीछे लगा यह छोटा पंखा हेलीकॉप्टर की सुरक्षित उड़ान के लिए बेहद जरूरी होता है. इसे टेल रोटर कहा जाता है. इसका मुख्य काम हेलीकॉप्टर को हवा में घूमने से रोकना और उसकी दिशा को बैलेंस करने में मदद करना है.

हेलीकॉप्टर के ऊपर लगा बड़ा पंखा मुख्य रोटर कहलाता है. यही रोटर बहुत तेजी से घूमकर हवा को नीचे की ओर धकेलता है और हेलीकॉप्टर को ऊपर उठने में मदद करता है. लेकिन इस बड़े रोटर के घूमने से हेलीकॉप्टर के शरीर पर भी एक घूमने वाला फोर्स पैदा होता है. अगर इस फोर्स को बैलेंस न किया जाए, तो हेलीकॉप्टर सिर्फ ऊपर नहीं उठेगा, बल्कि उसका पूरा शरीर एक दिशा में घूमने लगेगा. इस समस्या को रोकने के लिए उसकी पूंछ पर छोटा रोटर लगाया जाता है.

बड़ा पंखा घूमता है तो हेलीकॉप्टर क्यों घूमने लगता है?
इसे आसान उदाहरण से समझ सकते हैं. जब कोई चीज तेजी से घूमती है, तो उसका असर उसके आसपास की दूसरी चीजों पर भी पड़ता है. हेलीकॉप्टर का मुख्य रोटर जब तेजी से घूमता है, तो उसके कारण हेलीकॉप्टर के शरीर पर भी विपरीत दिशा में घूमने का फोर्स पैदा होता है. इसे टॉर्क कहा जाता है. अगर टॉर्क को रोकने के लिए कोई व्यवस्था न हो, तो हेलीकॉप्टर का मुख्य हिस्सा और उसकी पूंछ गोल-गोल घूमने लग सकती है. ऐसे में पायलट के लिए हेलीकॉप्टर को बैलेंस  करना बहुत मुश्किल हो जाएगा.

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टेल रोटर कैसे हेलीकॉप्टर को सीधा रखता है?
यहीं पर टेल रोटर का सबसे बड़ा काम शुरू होता है. पीछे लगा छोटा पंखा हवा को एक दिशा में धकेलता है. इसके कारण हेलीकॉप्टर की पूंछ पर विपरीत दिशा में बल पैदा होता है. यह बल मुख्य रोटर से पैदा होने वाले टॉर्क को बैलेंस करता है. आसान भाषा में कहें तो ऊपर का बड़ा पंखा हेलीकॉप्टर को उड़ाने में मदद करता है, जबकि पीछे का छोटा पंखा उसे बिना जरूरत घूमने से रोकता है. यानी अगर टेल रोटर नहीं होगा, तो सामान्य डिजाइन वाले हेलीकॉप्टर को स्थिर रखना काफी मुश्किल हो सकता है.

हेलीकॉप्टर की दिशा बदलने में भी करता है मदद
टेल रोटर का काम सिर्फ हेलीकॉप्टर को घूमने से रोकना नहीं है. इसकी मदद से पायलट हेलीकॉप्टर की दिशा भी बदल सकता है. जब पायलट टेल रोटर के जोर को बढ़ाता या घटाता है, तो हेलीकॉप्टर की पूंछ दाएं या बाएं घूम सकती है. इससे हेलीकॉप्टर का अगला हिस्सा भी अपनी दिशा बदल लेता है. इस तरह पायलट हेलीकॉप्टर को जरूरत के हिसाब से मोड़ सकता है. यही कारण है कि हवा में एक जगह स्थिर रहने वाले हेलीकॉप्टर भी अपनी दिशा बदल सकते हैं.

छोटे पंखे में खराबी आ जाए तो क्या होगा?
टेल रोटर हेलीकॉप्टर के लिए बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है. अगर इसमें खराबी आती है, तो हेलीकॉप्टर के घूमने और डायरेक्शन कंट्रोल करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है. इसी वजह से उड़ान से पहले हेलीकॉप्टर के महत्वपूर्ण हिस्सों की जांच की जाती है. टेल रोटर, उसके ब्लेड, मोटर और उससे जुड़े दूसरे हिस्सों की स्थिति भी देखी जाती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि टेल रोटर में समस्या आते ही हेलीकॉप्टर तुरंत नीचे गिर जाएगा. हेलीकॉप्टर की स्थिति, उसकी ऊंचाई और समस्या की प्रकृति के आधार पर पायलट के पास अलग-अलग इमरजेंसी रिस्पॉन्स हो सकती हैं.

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हर हेलीकॉप्टर में ऐसा पंखा क्यों नहीं होता?
अगर आपने अलग-अलग तरह के हेलीकॉप्टर देखे हैं, तो आपने गौर किया होगा कि हर हेलीकॉप्टर में पीछे ऐसा खुला हुआ पंखा दिखाई नहीं देता. इसका कारण यह है कि सभी हेलीकॉप्टर एक ही तकनीक से नहीं बनाए जाते. कुछ हेलीकॉप्टरों में फेनेस्ट्रॉन नाम की तकनीक इस्तेमाल होती है. इसमें टेल रोटर को पूंछ के अंदर एक गोल ढांचे में रखा जाता है. इससे रोटर के ब्लेड बाहर खुले हुए दिखाई नहीं देते. इस डिजाइन का इस्तेमाल शोर कम करने और सुरक्षा जैसे कारणों से किया जा सकता है.

कुछ हेलीकॉप्टर में अलग तकनीक का इस्तेमाल
कुछ हेलीकॉप्टरों में टेल रोटर की जरूरत ही नहीं होती. इनमें हेलीकॉप्टर को स्थिर रखने के लिए दूसरी तकनीक इस्तेमाल की जाती है. उदाहरण के लिए, कुछ हेलीकॉप्टरों में दो मुख्य रोटर लगाए जाते हैं, जो अलग-अलग दिशाओं में घूमते हैं. एक रोटर से पैदा होने वाला टॉर्क दूसरे रोटर के टॉर्क को बैलेंस कर देता है. इसलिए ऐसे हेलीकॉप्टरों में पारंपरिक टेल रोटर की जरूरत नहीं पड़ती.

हेलीकॉप्टर की पूंछ पर लगा छोटा पंखा आकार में भले ही छोटा दिखाई देता हो, लेकिन इसका काम बहुत बड़ा है. यह हेलीकॉप्टर को अनचाहे तरीके से घूमने से रोकता है और पायलट को उसकी दिशा नियंत्रित करने में मदद करता है. इसलिए अगली बार जब आप किसी हेलीकॉप्टर को आसमान में उड़ते हुए देखें और उसकी पूंछ पर छोटा पंखा नजर आए, तो समझ जाइए कि यह कोई अतिरिक्त या सजावटी हिस्सा नहीं है. यह हेलीकॉप्टर के बैलेंस और कंट्रोल का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है. ऊपर का बड़ा रोटर उसे हवा में उठाने का काम करता है, जबकि पीछे का छोटा टेल रोटर उसे सही डायरेक्शन और बैलेंस में बनाए रखने में मदद करता है.

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