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क्या है रेलवे का PRS सिस्टम, जिसके जरिए अलॉट होती है रिजर्व सीट!

रेलवे काउंटर और आईआरसीटीसी ऐप से स्लीपर या एसी कोच का टिकट बुक करना हो. रिजर्व टिकट कैंसिल करना हो. ट्रेनों में सीटों की उपलब्धता देखनी हो या फिर जब चार्ट तैयार की जाती है. यह सब रेलवे के एक विशाल और जटिल प्लेटफॉर्म के जरिए होता है. इसे पीआरएस कहते हैं.

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भारतीय रेलवे में PRS के जरिए ही ट्रेनों में बुक होती है रिजर्व सीट (Photo - AI Generated)
भारतीय रेलवे में PRS के जरिए ही ट्रेनों में बुक होती है रिजर्व सीट (Photo - AI Generated)

रेलवे के तहत कई तरह की टिकट बुक होती है. इनमें स्लीपर, चेयर कार, 3एसी, 2 एसी, 1एसी जैसे कैटेगरी की टिकट होती है. ये सारे टिकट आरक्षित यानी रिजर्व सीट के लिए होते हैं. रेलवे ट्रेनों में इन रिजर्वेशन के लिए जिस सिस्टम के तहत लोगों को कन्फर्म, RAC और वेटिंग टिकट अलॉट करती है, उसे PRS कहते हैं. 

पीआरएस का मतलब है पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम. यह एक बात समझना जरूरी है कि पीआरएस से हर तरह के टिकट बुक नहीं हो सकते. यानी यह सिर्फ रिजर्वेशन के लिए है. यानी जिन ट्रेनों या जिन डिब्बों में रिजर्व सीट की व्यवस्था है. PRS से सिर्फ उन्हीं ट्रेनों और डिब्बों के लिए टिकट बुक की जा सकती है. फिर चाहे आपको कन्फर्म टिकट मिले या आरएसी या फिर वेटिंग. 

अब सवाल उठता है कि फिर नॉर्मल पैसेंजर ट्रेनों या फिर जनरल डिब्बों की टिकट किस सिस्टम के तहत मिलती है. इसके लिए अलग से UTS यानी अनरिजर्व टिकट सिस्टम होता है. PRS के  जरिए सिर्फ आरक्षित यानी रिजर्व सीटों की बुकिंग की जा सकती है. 

PRS के जरिए कैसे बुक होती है टिकट
हर दिन लोगों को अलग- अलग जगहों के लिए अलग- अलग कोच के रिजर्व सीट के लिए टिकट बुकिंग करने की जरूरत पड़ती है. इनमें से कुछ 3 एसी के लिए बर्थ रिजर्व करते है, तो कुछ 2 और 1 एसी के लिए, कुछ स्लीपर के लिए तो कुछ चेयर कार के लिए, जिसमें सिर्फ बैठने भर के लिए आपको जगह मिलती है. हर दिन लाखों लोगों को अलग- अलग ट्रेनों के अलग- अलग कोचों में टिकट अलॉट करने की जिम्मेदारी पीआरएस की होती है. 

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रेलवे का PRS एक कंप्यूटर आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म है. इसका इस्तेमाल सिर्फ रिजर्व टिकटों की बुकिंग के लिए ही नहीं होता है. टिकट कैंसिलेशन, सीट की उपलब्धता और चार्ट तैयार करने के लिए किया जाता है. यानी जब हम सीनियर सिटिजन या फिर महिला कोटे से रिजर्वेशन करवाते है, तब भी हमें पीआरएस के तहत ही कन्फर्म सीट मिलती है. जब RAC के तहत लास्ट टाइम में हमारा टिकट कन्फर्म होता है तो यह काम भी PRS के जरिए किया जाता है. 

पीआरएस यानी यात्री आरक्षण प्रणाली या पब्लिक रिजर्वेशन सिस्टम एक बेहद जटिल और सुव्यवस्थित एल्गोरिदम पर काम करता है. यही वजह है कि इसके जरिए कंफर्म, RAC, सीनियर सिटिजन , महिलाओं के विशेष कोटे और विभिन्न प्रकार की वेटिंग लिस्ट को मैनेज किया जाता है.

पीआरएस को सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम यानी क्रिस ने तैयार किया है.  PRS के जरिए हर दिन लाखों लोगों की रेल यात्रा आसान बन पाती है. लोगों को कन्फर्म टिकट मिल पाता है और वेटिंग वाली टिकट खुद ब खुद कैंसिल हो जाती है. आसान शब्दों में समझें तो रेलवे काउंटर पर टिकट बुक करवाने से लेकर, आईआरसीटीसी के ऐप से रिजर्व टिकट बुक करने तक सारा काम PRS के विशाल नेटवर्क के जरिए संभव हो पाता है. 

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1986 में PRS ने मैनुअल आरक्षण काउंटरों की जगह लेने से लेकर ऑनलाइन और मोबाइल टिकट बुकिंग को सपोर्ट करने तक का सफर तय किया है. पीआरएस भारतीय रेलवे नेटवर्क में रिजर्व टिकटों के प्रबंधन के लिए एक कम्प्यूटरीकृत प्लेटफॉर्म है. यह दुनिया का सबसे बड़ा पैसेंजर रिजर्वेशन प्लेटफॉर्म है. 

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