पूरे घर की मजबूती पिलर यानी कॉलम पर टिकी होती है. अगर पिलर बनाने में कुछ कमी रह गई तो मकान हमेशा के लिए कमजोर हो सकता है. अक्सर पिलर बनाते समय मिस्त्री या ठेकेदार एक गलती कर देते हैं. इस गलती को नजरअंदाज करना और गलत ना समझना सबसे बड़ी भूल हो सकती है.
घर बनाते समय जब पिलर बनाया जाता है. तब सबसे पहले सरिया इसे इसका एक ढांचा तैयार किया जाता है. दीवार या निर्माण की जरूरत के हिसाब से पिलर की मोटाई क्या होगी, इसका ढांचा बनाते वक्त उसी मुताबिक इसे तैयार किया जाता है.
चार या छह सरिये के पिलर को खड़ा रखने के लिए स्ट्रिप्स या रिंग के जरिए बांधा जाता है. यह पर मिस्त्री एक साधारण, लेकिन भयंकर भूल कर बैठते हैं. पिलर के सरिये को बांधने के लिए जो रिंग बनाई जाती है, उसके दोनों सिरे को जोड़ते वक्त उसके हुक का एंगल अक्सर 90 डिग्री रखा जाता है. आधुनिक कंस्ट्रक्शन तकनीक के हिसाब से यह गलत है.
पिलर के रिंग के हुक का एंगल हमेशा 135 डिग्री होना चाहिए. 135 डिग्री हुक के कई फायदे हैं. यह हमेशा पिलर को मजबूत पकड़ देता है. 135 डिग्री का हुक स्टील की छड़ को मजबूती से पकड़ कर रखता है.
भूकंप या भारी दबाव के दौरान 90 डिग्री वाले हुक आसानी से खुल जाते हैं. जबकि 135 हुक खुलने नहीं देता और स्ट्रक्चर को टूटने से बचाता है. यह कंक्रीट को अच्छे से बांधे रखता है जिससे अंदर के मेन बार मुड़ते नहीं हैं.
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सामान्य या हल्के कामों में 90 डिग्री के हुक इस्तेमाल कर लिया जाते हैं, लेकिन आधुनिक आरसीसी और भूकंप-संवेदनशील इलाकों में ऐसे हुक कमजोर माने जाते है. क्योंकि दबाव पड़ने पर इसके खुलने का खतरा रहता है. इसलिए घर बनाते समय जब पिलर का स्ट्रक्चर बनाया जा रहा होता है. तब उसके रिंग के हुक एंगल पर जरूर ध्यान देना चाहिए.