राजस्थान में हाल ही में शहरी निकाय चुनाव हुए हैं और अब मेयर, चेयरमैन समेत दूसरे पदों पर बोर्ड बनाने की कवायद शुरू हो गई है. खासकर निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम हो गई है, जिन्हें अपने पाले में लाने की कोशिशें हो रही हैं. आरोप है कि जिन पार्षदों ने चुनाव जीतने के लिए लाखों रुपये खर्च किए, उन्हें अब पाला बदलने के लिए 2-2 करोड़ रुपये तक के ऑफर दिए जा रहे हैं. लेकिन सवाल ये है कि आखिर जिस पद के लिए इतनी रकम खर्च और ऑफर की बातें हो रही हैं, उस पद पर बैठने वाले पार्षद को मिलता कितना है, उनकी सैलरी, भत्ते कितने हैं?
आपको ये जानकार हैरानी होगी कि जिस पार्षद के लिए मोटा पैसा खर्च होता है, उन्हें आधिकारिक रुप से कोई सैलरी नहीं मिलती. उन्हें सिर्फ बैठक में हिस्सा लेने के लिए हर दिन के हिसाब से भत्ते मिलते हैं, वो भी काफी ज्यादा नहीं है. इसके अलावा उन्हें टेलीफोन, स्टेशनरी, वाहन भत्ता मिलता है. भत्तों का अमाउंट नगर निगम पार्षद, नगर परिषद पार्षद और नगर पालिका पार्षद के हिसाब से अलग-अलग है.
पिछले साल 2025 में स्वायत्त शासन विभाग की ओर से जारी की गई जानकारी के अनुसार, नगर निगम के पार्षद को प्रत्येक बैठक में भाग लेने के लिए 1,002 रुपये का मानदेय मिलता है, जिसकी अधिकतम सीमा 3,006 रुपये महीना है. वहीं, नगर परिषद के पार्षद को हर बैठक के 835 रुपये और अधिकतम 2,505 रुपये हर महीना मिलता है, जबकि नगर पालिका के पार्षद को हर बैठक के 668 रुपये और अधिकतम 2,003 रुपये प्रति महीना मिलते हैं.

दूसरे भत्ते क्या हैं?
2024 के एक अपडेट के अनुसार, नगर निगम पार्षद को टेलीफोन भत्ता 2070 रुपये प्रति महीने, स्टेशनरी भत्ता 1035 रुपये प्रति महीने और वाहन भत्ता 2070 रुपये प्रति महीने मिलता है. वहीं, नगर परिषद पार्षद को टेलीफोन भत्ता 1380 रुपये प्रति महीने, स्टेशनरी भत्ता 828 रुपये प्रति महीने और वाहन भत्ता 1380 रुपये प्रति महीने मिलता है. नगर पालिका पार्षद को टेलीफोन भत्ता 828 रुपये प्रति महीने, स्टेशनरी भत्ता 690 रुपये प्रति महीने और वाहन भत्ता 1035 रुपये प्रति महीने मिलता है.

कितनी है मेयर की सैलरी?
आधिकारिक डिटेल के अनुसार, नगर पालिका बोर्ड के चेयरमैन को 12,524 रुपये प्रति महीने, नगर परिषद के अध्यक्ष को 20,038 रुपये प्रति महीने और नगर निगम के मेयर को 33,396 रुपये प्रति महीने मासिक भत्ता मिलता है.
