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Psychological Facts: जो लोग हर चीज सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं, वे कैसे होते हैं? 

जो लोग अपनी जिंदगी की हर छोटी-बड़ी बात सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं, उनके पीछे हमेशा दिखावा या लोगों का ध्यान खींचने की वजह नहीं होती. साइकोलॉजी के मुताबिक इसके पीछे खुद को व्यक्त करने, दूसरों से जुड़ने, तारीफ पाने, लोकप्रिय होने और अपनी यादों को संभालकर रखने जैसी कई वजहें हो सकती हैं.

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रिसर्च में पाया गया है कि लगातार दूसरों से तुलना करने से कुछ लोगों का आत्मविश्वास कम हो सकता है. ( Photo: ITG)
रिसर्च में पाया गया है कि लगातार दूसरों से तुलना करने से कुछ लोगों का आत्मविश्वास कम हो सकता है. ( Photo: ITG)

आज सोशल मीडिया हमारी जिंदगी का बड़ा हिस्सा बन चुका है. लोग यहां सिर्फ अपनी फोटो या घूमने की तस्वीरें ही नहीं डालते, बल्कि दिनभर में उनके साथ क्या हुआ, यह भी बताते रहते हैं. सुबह क्या खाया, कहां गए, ऑफिस में क्या हुआ, क्या खरीदा, किससे मिले और यहां तक कि वे खुश हैं या परेशान, यह भी सोशल मीडिया पर शेयर कर देते हैं. ऐसे लोगों को देखकर अक्सर सवाल आता है कि आखिर कोई अपनी जिंदगी की इतनी सारी बातें सबको क्यों बताना चाहता है? क्या उसे लोगों का ध्यान चाहिए या अपनी तारीफ सुनना अच्छा लगता है? मनोविज्ञान की कई शोध बताती हैं कि हर चीज सोशल मीडिया पर डालने के पीछे एक ही वजह नहीं होती.

खुद को अच्छा दिखाना चाहते हैं
साइकोलॉजिस्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर हम अक्सर अपनी जिंदगी का वही हिस्सा दिखाते हैं, जो दूसरों को दिखाना चाहते हैं. कोई अपनी अच्छी फोटो, नई कार, नौकरी, घूमने की तस्वीर या कामयाबी साझा करता है. हो सकता है कि वह चाहता हो कि लोग उसे सफल और खुश इंसान समझें. कुछ रिसर्च में यह भी पाया गया है कि जो लोग खुद को दूसरों से ज्यादा खास समझते हैं, वे सोशल मीडिया पर अपनी उपलब्धियां और अच्छी तस्वीरें ज्यादा शेयर कर सकते हैं. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि ज्यादा पोस्ट करने वाला हर व्यक्ति ऐसा ही होता है.

जब किसी पोस्ट पर ज्यादा पसंद और अच्छी टिप्पणियां मिलती हैं, तो व्यक्ति को खुशी होती है. इसी वजह से कुछ लोग पोस्ट करने के बाद बार-बार देखते हैं कि कितने लोगों ने उसे पसंद किया और किसने क्या लिखा. यह सामान्य बात है, क्योंकि हर इंसान चाहता है कि दूसरे लोग उसे पसंद करें. लेकिन अगर किसी व्यक्ति की खुशी पूरी तरह सोशल मीडिया पर मिलने वाली तारीफ पर निर्भर हो जाए, तो यह चिंता की बात हो सकती है.

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दोस्तों और परिवार से जुड़े रहने का तरीका
हर व्यक्ति ध्यान खींचने के लिए पोस्ट नहीं करता. कुछ लोग अपने दोस्तों और परिवार के संपर्क में बने रहने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं. खासकर जो लोग अपने घर और दोस्तों से दूर रहते हैं, उनके लिए तस्वीरें और रोज की बातें साझा करना बातचीत शुरू करने का आसान तरीका हो सकता है. इसलिए ज्यादा पोस्ट करने का मतलब हमेशा दिखावा करना नहीं है. कई लोग सोशल मीडिया को अपनी यादों की डायरी की तरह इस्तेमाल करते हैं. कहीं घूमने गए तो तस्वीर डाल दी, जन्मदिन मनाया तो फोटो शेयर कर दी या दोस्तों के साथ कोई अच्छा पल बिताया तो उसे सोशल मीडिया पर रख लिया.

ऐसे लोगों का मकसद जरूरी नहीं कि दूसरों को प्रभावित करना हो. वे बस अपनी अच्छी यादों को संभालकर रखना चाहते हैं, ताकि बाद में उन्हें देखकर पुराना समय याद कर सकें.

लोकप्रिय होने और काम बढ़ाने की चाह
कुछ लोग चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोग उन्हें जानें. इसलिए वे अपनी फोटो, काम और उपलब्धियों से जुड़ी बातें लगातार साझा करते हैं. कई बार यह उनके काम का हिस्सा भी होता है. कारोबारी, कलाकार, वीडियो बनाने वाले या दूसरे पेशेवर लोग सोशल मीडिया के जरिए अपना काम ज्यादा लोगों तक पहुंचाते हैं. ऐसे में लगातार पोस्ट करना दिखावा नहीं, बल्कि काम का तरीका हो सकता है. सोशल मीडिया पर हम अपनी जिंदगी दूसरों को दिखाते हैं, लेकिन साथ ही दूसरों की जिंदगी भी देखते हैं. किसी को महंगी कार, बड़ी नौकरी या विदेश यात्रा करते देखकर हम अपनी जिंदगी की तुलना उससे करने लगते हैं. 

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रिसर्च में पाया गया है कि लगातार दूसरों से तुलना करने से कुछ लोगों का आत्मविश्वास कम हो सकता है. हालांकि इसका असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता. किसी व्यक्ति की कुछ सोशल मीडिया पोस्ट देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि वह खुश है, परेशान है या सिर्फ दिखावा कर रहा है. कोई तारीफ चाहता है, कोई दोस्तों से जुड़ा रहना चाहता है, कोई यादें संभालता है और कोई अपने काम को आगे बढ़ाना चाहता है. इसलिए किसी को सिर्फ इसलिए दिखावा करने वाला या ध्यान खींचने वाला कहना सही नहीं है कि वह बहुत पोस्ट करता है.

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