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आजादी किसने दिलाई... पाकिस्तान की किताबों में क्या पढ़ाते हैं? वहां पढ़ाई कर चुके लोगों ने बताया

भारत और पाकिस्तान पहले एक ही थे और दोनों ने अंग्रेजों से साथ आजादी पाई थी. लेकिन, पाकिस्तान के लिए अंग्रेजों से आजादी दिलाने वाले नायक महात्मा गाधीं, भगत सिंह नहीं हैं.

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पाकिस्तान की किताबों में आजादी की कहानी दूसरे तरीके से पढ़ाई जाती है. (Photo: Pexels)
पाकिस्तान की किताबों में आजादी की कहानी दूसरे तरीके से पढ़ाई जाती है. (Photo: Pexels)

भारत और पाकिस्तान दोनों एक साथ अंग्रेजों से आजाद हुए. जब भी भारत की आजादी की बात होती है तो हमारे यहां किताबों के जरिए या स्कूलों में पढ़ाया जाता है कि कई आंदोलनों और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान के बाद ये आजादी हासिल हुई. आजादी के नायकों में महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, शहीद भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, अशफाक उल्ला खान और सरदार वल्लभभाई पटेल का नाम लिया जाता है. लेकिन, पाकिस्तान में आजादी दिलाने का श्रेय इन लोगों को नहीं दिया जाता है और वहां कुछ और कहानी बताई जाती है. 

ऐसे में सवाल है कि जब आजादी से पहले दोनों देश एक थे और दोनों को साथ में आजादी मिली तो फिर उनके लिए आजादी के नायक कौन हैं? तो जानते हैं कि पाकिस्तान की किताबों में आजादी की कहानी क्या बताई जाती है और स्वतंत्रता संग्राम के नाम पर क्या पढ़ाया जाता है....

पाकिस्तान में क्या पढ़ाया जाता है?

बता दें कि पाकिस्तान में स्कूली किताबों में और इतिहास की किताबों में 1947 में जो आजादी मिली, उसे भारत-पाकिस्तान को ब्रिटिश शासन से मिली आजादी के तौर पर नहीं दिखाया जाता है, जबकि उस आजादी को पाकिस्तान के अलग देश बनने की कहानी के रूप में पढ़ाया जाता है. वहां पढ़ाया जाता है कि मुसलमानों ने कैसे पाकिस्तान को अलग देश बनाया, कैसे होमलैंड को हासिल किया. इसे टू-नेशन थ्योरी, मुस्लिमों की मांगें और 1940–47 के पाकिस्तान मूवमेंट के बारे में बताया जाता है. 

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वहां पढ़ाई कर चुके लोगों ने बताई सच्चाई

इस बारे में जब हमने उन लोगों से बात की, जिन्होंने पाकिस्तान में ही पढ़ाई की है और उनसे वहां की किताबों के बारे में सच्चाई जानी. पाकिस्तान में पढ़ाई करने और कई साल बाद भारत की नागरिकता लेने वाले सोभराज भील ने बताया कि वहां की किताबों में आजादी की अलग कहानी बताई जाती है. उनके अनुसार, वहां कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना के गुणगान किया होता है और इस बात पर जोर दिया जाता है कि कैसे मुसलमानों ने अलग देश पाया. इसमें मुस्लिम लीग की कहानी और पाकिस्तान के बनने की कहानी पर जोर दिया जाता है. 

पहले फिर भी गांधी वगैहरा का हल्का बहुत जिक्र हुआ करता था, लेकिन कई सालों से ऐसा कुछ नहीं है. साथ ही उन्होंने बताया कि  पहले किताबों में होली, दिवाली और रामायण के बारे में थोड़ा-बहुत पढ़ाया जाता था. अब वो अध्याय नहीं हैं. कुछ सालों से धार्मिक किताबों को शामिल कर दिया गया है, जिस वजह से सभी को इस्लामिक कोर्स भी पढ़ना पड़ता है. 

वहीं, पाकिस्तान में ही पढ़ाई कर चुके जान बहादुर सिंह ने बताया कि वहां बच्चों को आजादी के बारे में अलग तरह से पढ़ाया जाता है. उन्होंने बताया कि वहां की किताबों में महात्मा गांधी, चंद्रशेखर आजाद आदि का जिक्र नहीं है,  जबकि जिन्ना के बारे में ज्यादा पढ़ाया जाता है. बताया जाता है कि जैसे मुस्लिमों ने हिंदुओं से अलग होकर अपना देश बनाया और इस दौरान क्या अड़चन आई और किस तरह से पाकिस्तान के अलग देश बनने का काम शुरू हुआ. 

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बीबीसी की एक रिपोर्ट में वहां पढ़ाई कर चुके लोगों ने बताया है कि वहां हिंदुओं के खिलाफ नफरत सिखाई जाती है. वहां किताबों में लिखा होता है- इतिहास में हिंदुओं ने मुसलमानों पर बहुत अत्याचार किया था. काफिर का अर्थ है, जो बुतों या मूर्तियों की पूजा करने वाला होता है. पहले के समय में, हिंदू अपनी बेटियों को पैदा होते ही जिंदा दफन कर देते थे. एक किताब में लिखा है सिख और हिंदू मानवता के दुश्मन हैं. लेकिन, अगर कहीं कोई दंगा होता है, तो मारने वाले दोनों तरफ होते हैं और समान रूप से दोषी होते हैं.
 

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