घर या जमीन खरीदने के बाद उसकी रजिस्ट्री के कागज संभालकर रखना बहुत जरूरी होता है. लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि मकान खरीदने के लिए बैंक से लोन लिया गया और बैंक ने ओरिजिनल सेल डीड यानी रजिस्ट्री अपने पास रख ली. अब अगर भविष्य में जमीन या मकान पर अपना मालिकाना हक साबित करने की जरूरत पड़े तो सवाल उठता है- जब असली कागज ही बैंक के पास है, तब क्या करें? ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है. किसी जमीन या मकान का मालिकाना हक सिर्फ एक कागज से साबित नहीं होता. इसके लिए कई रिकॉर्ड और दस्तावेज काम आ सकते हैं.
बैंक के पास रजिस्ट्री क्यों रहती है?
जब कोई व्यक्ति घर या जमीन खरीदने के लिए बैंक से लोन लेता है तो बैंक अक्सर प्रॉपर्टी के ओरिजिनल दस्तावेज अपने पास रखता है. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि लोन की सुरक्षा बनी रहे. जब तक लोन पूरी तरह चुकता नहीं हो जाता, बैंक के पास प्रॉपर्टी के ओरिजिनल दस्तावेज रह सकते हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि बैंक उस जमीन का मालिक बन गया. प्रॉपर्टी का मालिकाना हक सेल डीड और दूसरे संबंधित रिकॉर्ड से जुड़ा होता है, जबकि बैंक के पास दस्तावेज लोन की सुरक्षा के तौर पर हो सकते हैं.
बैंक से कौन सा कागज मांगा जा सकता है?
अगर आपको किसी सरकारी काम, कोर्ट केस या दूसरी कानूनी प्रक्रिया में प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेज की जरूरत है तो सबसे पहले अपने बैंक से संपर्क करें. बैंक के पास रखे ओरिजिनल दस्तावेजों की जानकारी, उनकी कॉपी या बैंक द्वारा जारी किए गए संबंधित दस्तावेज आपके काम आ सकते हैं. कुछ मामलों में बैंक दस्तावेजों की सर्टिफाइड कॉपी या इंस्पेक्शन की सुविधा भी अपनी प्रक्रिया के अनुसार दे सकता है. इसलिए सिर्फ इसलिए परेशान होने की जरूरत नहीं कि ओरिजिनल कागज आपके घर में नहीं है.
रजिस्ट्री की सर्टिफाइड कॉपी भी काम आती है
जिस सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री हुई थी, वहां उस दस्तावेज का रिकॉर्ड मौजूद रहता है. जरूरत पड़ने पर वहां से सर्टिफाइड कॉपी के बारे में जानकारी ली जा सकती है. यह सामान्य फोटो कॉपी से अलग होती है और संबंधित सरकारी कार्यालय द्वारा जारी की जाती है. यानी अगर ओरिजिनल सेल डीड बैंक के पास है तो इसका मतलब यह नहीं कि रजिस्ट्री का सरकारी रिकॉर्ड भी आपके हाथ से निकल गया.
जमीन या मकान खरीदने के बाद कई मामलों में स्थानीय राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया होती है, जिसे आम भाषा में दाखिल-खारिज या म्यूटेशन कहा जाता है. अगर आपके नाम पर म्यूटेशन हुआ है तो उसका रिकॉर्ड भी संभालकर रखें. म्यूटेशन अपने आप में मालिकाना हक का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता. यह मुख्य रूप से राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने से जुड़ा होता है. असली मालिकाना हक तय करने में सेल डीड जैसे टाइटल डॉक्यूमेंट्स की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है.
प्रॉपर्टी टैक्स की रसीद भी संभालकर रखें
अगर आप मकान या प्रॉपर्टी का प्रॉपर्टी टैक्स भरते हैं तो उसकी रसीद और संबंधित रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखें. इनसे यह दिखाया जा सकता है कि संबंधित प्रॉपर्टी के संबंध में सरकारी रिकॉर्ड में आपका नाम दर्ज है और आप उस संपत्ति से जुड़े टैक्स का भुगतान कर रहे हैं. लेकिन यहां भी यही बात लागू होती है कि सिर्फ टैक्स की रसीद को मालिकाना हक का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता.
बिजली-पानी के बिल भी रखिए
जिस मकान में आप रह रहे हैं, उसके बिजली, पानी या दूसरे यूटिलिटी बिल्स पर अगर आपका नाम है तो उन्हें भी संभालकर रखें. ये दस्तावेज यह दिखाने में मदद कर सकते हैं कि आप उस प्रॉपर्टी से जुड़े हुए हैं और वहां लंबे समय से रह रहे हैं. लेकिन ये भी अपने आप में जमीन का टाइटल साबित करने वाले दस्तावेज नहीं हैं.
बैंक का लोन रिकॉर्ड भी काम का है
अगर आपने उसी प्रॉपर्टी पर बैंक से होम लोन लिया है तो बैंक के पास लोन से जुड़े कई दस्तावेज होंगे. लोन एग्रीमेंट, प्रॉपर्टी डॉक्युमेंट्स की डिटेल्स, सैंक्शन डॉक्यूमेंट और बैंक के रिकॉर्ड में प्रॉपर्टी से संबंधित जानकारी हो सकती है. इन रिकॉर्ड को भी संभालकर रखना चाहिए. खासकर तब जब भविष्य में किसी दस्तावेज की जरूरत पड़े.
अगर जमीन पर विवाद हो जाए तो?
अगर कोई व्यक्ति आपकी जमीन पर मालिकाना हक को चुनौती देता है तो मामला सिर्फ बिजली बिल या टैक्स की रसीद दिखाने से खत्म नहीं होता. ऐसी स्थिति में बिक्री विलेख यानी रजिस्ट्री, पुराने जमीन के कागज, सरकारी जमीन रिकॉर्ड, दाखिल-खारिज के कागज और दूसरे संबंधित दस्तावेज महत्वपूर्ण हो सकते हैं. अगर जमीन के मूल दस्तावेज बैंक के पास हैं तो बैंक के रिकॉर्ड और प्रमाणित प्रतियों के जरिए भी दस्तावेजों की पूरी कड़ी तैयार की जा सकती है. अगर विवाद गंभीर है तो किसी स्थानीय संपत्ति कानून के वकील से दस्तावेजों की जांच कराना बेहतर रहता है, क्योंकि जमीन के रिकॉर्ड और नियम अलग-अलग राज्यों में अलग हो सकते हैं.
एक गलती बिल्कुल न करें
अगर जमीन की मूल रजिस्ट्री बैंक के पास है तो उसकी स्कैन कॉपी, फोटो या पीडीएफ अपने पास जरूर रखें. साथ ही रजिस्ट्री की प्रमाणित प्रति, दाखिल-खारिज के कागज, प्रॉपर्टी टैक्स की रसीद, बैंक से जुड़े कागज और दूसरे जरूरी दस्तावेजों को एक जगह संभालकर रखें. इनकी डिजिटल कॉपी भी बनाकर रखना बेहतर है.
मूल रजिस्ट्री बैंक में होने का मतलब यह नहीं है कि आपके पास अपनी जमीन का कोई सबूत नहीं है. रजिस्ट्री का सरकारी रिकॉर्ड, प्रमाणित प्रति, दाखिल-खारिज का रिकॉर्ड, बैंक के दस्तावेज और प्रॉपर्टी से जुड़े दूसरे कागज जरूरत पड़ने पर काम आ सकते हैं. लेकिन यह बात याद रखना जरूरी है कि मालिकाना हक साबित करने के लिए कौन सा दस्तावेज कितना महत्वपूर्ण है, यह जमीन और संबंधित राज्य के कानून पर निर्भर करता है.इसलिए सिर्फ बिजली बिल, टैक्स की रसीद या दाखिल-खारिज के रिकॉर्ड को ही अंतिम मालिकाना सबूत मान लेना सही नहीं है.