आपने अपने ऑफिस में ऐसे लोगों को जरूर देखा होगा जो हर दिन काफी अच्छे और स्टाइलिश कपड़े पहनकर आते हैं. उनके कपड़े प्रेस किए हुए होते हैं, जूते साफ रहते हैं, बाल ठीक से बने होते हैं और उनका पूरा लुक काफी अट्रैक्टिव लगता है. ऐसे लोगों को देखकर कई बार लगता है कि शायद वे सिर्फ दूसरों पर अच्छा प्रभाव जमाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन साइकोलॉजी के मुताबिक, हर बार ऐसा नहीं होता. कई लोगों के लिए अच्छी तरह तैयार होकर ऑफिस जाना उनके आत्मविश्वास, अनुशासन और प्रोफेशनल सोच का हिस्सा होता है. उनका मानना होता है कि अच्छा दिखने से न सिर्फ उनका आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि वे अपने काम पर भी ज्यादा ध्यान दे पाते हैं.
कपड़े सिर्फ फैशन नहीं, आपकी सोच भी दिखाते हैं
साइकोलॉजिस्ट विंदा सिंह कहती हैं कि कपड़े केवल शरीर ढकने के लिए नहीं होते. हम क्या पहनते हैं, उसका असर हमारे मूड, आत्मविश्वास और व्यवहार पर भी पड़ता है. यही वजह है कि इंटरव्यू, मीटिंग या किसी खास मौके पर लोग अपने कपड़ों का खास ध्यान रखते हैं. अच्छे कपड़े पहनने से कई लोगों को खुद पर ज्यादा भरोसा महसूस होता है और वे बेहतर तरीके से अपनी बात रख पाते हैं.
'Enclothed Cognition' क्या है?
साल 2012 में अमेरिका के रिसर्चर्स ने हाजो एडम और एडम गैलिंस्की ने एक रिसर्च पब्लिश की थी, जिसमें एन्क्लोथ्ड कॉग्निशन नाम की थ्योरी सामने आयी. इस रिसर्च के मुताबिक, हम जो कपड़े पहनते हैं, उनका असर सिर्फ इस बात पर नहीं पड़ता कि दूसरे हमें कैसे देखते हैं, बल्कि इस पर भी पड़ता है कि हम खुद को कैसे महसूस करते हैं.
रिसर्च में पाया गया कि जब लोग ऐसे कपड़े पहनते हैं, जिन्हें वे प्रोफेशनल, जिम्मेदार या खास मानते हैं, तो उनका ध्यान, आत्मविश्वास और काम पर फोकस भी बेहतर हो सकता है. यानी कई बार अच्छी ड्रेसिंग लोगों को मानसिक रूप से भी काम के लिए तैयार करती है.
हर स्टाइलिश व्यक्ति दिखावा नहीं करता
अक्सर यह मान लिया जाता है कि जो व्यक्ति महंगे या फैशनेबल कपड़े पहनता है, वह दूसरों को प्रभावित करना चाहता है. लेकिन साइकोलॉजी इस सोच को पूरी तरह सही नहीं मानती. कई लोगों के लिए अच्छी ड्रेसिंग उनकी रोजमर्रा की आदत होती है. जैसे कुछ लोगों को रोज एक्सरसाइज करना पसंद होता है, वैसे ही कुछ लोग अच्छी तरह तैयार होकर घर से निकलना पसंद करते हैं. इससे उन्हें अच्छा महसूस होता है और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है.
अच्छी ड्रेसिंग से बढ़ सकता है आत्मविश्वास
कई रिसर्च बताते हैं कि जब इंसान खुद को आईने में अच्छा महसूस करता है, तो उसका आत्मविश्वास भी बढ़ता है. यही आत्मविश्वास मीटिंग में बोलने, नए लोगों से मिलने और मुश्किल काम करने में मदद करता है. यही कारण है कि कई कंपनियां कर्मचारियों को साफ-सुथरे और प्रोफेशनल कपड़े पहनने की सलाह देती हैं. इससे न सिर्फ कंपनी की अच्छी छवि बनती है, बल्कि कर्मचारी भी ज्यादा आत्मविश्वास के साथ काम कर पाते हैं.
कपड़ों के जरिए लोग अपनी पहचान भी बताते हैं
हर व्यक्ति का अपना अलग व्यक्तित्व होता है. कोई साधारण कपड़े पसंद करता है तो कोई रंग-बिरंगे या ट्रेंडी कपड़े पहनना पसंद करता है. यह जरूरी नहीं कि महंगे कपड़े पहनने वाला व्यक्ति घमंडी हो. कई बार वह सिर्फ अपनी पसंद और पर्सनैलिटी को एक्सप्रेस कर रहा होता है. साइकोलॉजिस्ट इसे सेल्फ एक्सप्रेशन यानी खुद को व्यक्त करने का तरीका मानते हैं. जैसे कोई व्यक्ति अपनी बात लिखकर या फोटो बनाकर एक्सप्रेस करता है, वैसे ही कई लोग अपने कपड़ों के जरिए अपनी पहचान दिखाते हैं.
साइकोलॉजी यह भी कहती है कि किसी व्यक्ति के कपड़ों के आधार पर उसके स्वभाव का पूरा अंदाजा नहीं लगाया जा सकता. कोई व्यक्ति बहुत साधारण कपड़े पहनकर भी बेहतरीन काम कर सकता है, जबकि कोई बहुत स्टाइलिश दिखने वाला व्यक्ति सामान्य प्रदर्शन कर सकता है. यानी कपड़े किसी इंसान की पूरी पहचान नहीं बताते. असली पहचान उसके व्यवहार, काम करने के तरीके और दूसरों के प्रति उसके रवैये से होती है.
ऑफिस का माहौल भी डालता है असर
हर ऑफिस का अपना अलग ड्रेस कल्चर होता है. कुछ कंपनियों में फॉर्मल कपड़े पहनना जरूरी होता है, जबकि कई स्टार्टअप्स में लोग कैजुअल कपड़ों में भी काम करते हैं. इसलिए किसी कर्मचारी की ड्रेस को देखकर तुरंत उसके स्वभाव के बारे में राय बना लेना ठीक नहीं है. अगर आपके ऑफिस में कोई व्यक्ति रोज सज-धजकर आता है, तो इसका मतलब यह नहीं कि वह दिखावा कर रहा है. हो सकता है कि अच्छी ड्रेसिंग उसे आत्मविश्वास देती हो, उसका मूड बेहतर बनाती हो या वह अपने व्यक्तित्व को उसी तरह व्यक्त करना चाहता हो. साइकोलॉजी भी यही कहती है कि कपड़े हमारे सोचने और महसूस करने के तरीके को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए किसी इंसान को सिर्फ उसके कपड़ों से नहीं, बल्कि उसके बिहेवियर, काम और पर्सनैलिटी से पहचानना चाहिए.