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जाफराबादी... इसे क्यों कहते हैं फायदे वाली भैंस, जो देती है बाल्टी भर-भरकर दूध

जाफराबादी भैंस गुजरात की प्रसिद्ध देसी नस्ल है, जो अपने भारी-भरकम शरीर और अच्छे दूध उत्पादन के लिए जानी जाती है. इसके दूध में फैट की मात्रा भी अच्छी होती है. जानिए जाफराबादी भैंस की खासियत, पहचान, दूध उत्पादन और डेयरी किसानों के लिए इसकी अहमियत.

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जाफराबादी का मूल क्षेत्र गुजरात है. ( Photo: ITG)
जाफराबादी का मूल क्षेत्र गुजरात है. ( Photo: ITG)

भारत में डेयरी का काम करने वाले किसान ऐसी भैंस की तलाश में रहते हैं, जिससे अच्छा दूध मिले और उसकी अच्छी कीमत भी मिल सके. देश में भैंसों की कई देसी नस्लें हैं और इनमें जाफराबादी का नाम भी काफी खास है. यह भैंस अपने भारी-भरकम शरीर, मजबूत बनावट और अच्छे दूध उत्पादन के लिए जानी जाती है.

जाफराबादी को खास तौर पर गुजरात की प्रमुख भैंस नस्लों में गिना जाता है. इसका मूल क्षेत्र गुजरात के अमरेली, भावनगर, जामनगर, जूनागढ़, पोरबंदर और राजकोट जिले हैं. नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड(NDDB) के मुताबिक, जाफराबादी भैंस का औसत दूध उत्पादन करीब 2,239 किलो प्रति लैक्टेशन है. इसका सामान्य दायरा करीब 2,150 से 2,340 किलो बताया गया है.

भारी-भरकम शरीर है इसकी खास पहचान
जाफराबादी भैंस को देखकर ही इसकी मजबूत कद-काठी का अंदाजा लगाया जा सकता है. आईसीएआर ने भी जाफराबादी को सबसे भारी भैंस नस्ल के रूप में दर्ज किया है. इसका शरीर बड़ा और मजबूत होता है. इसके सींग भी इसकी खास पहचान हैं. भारी शरीर की वजह से यह दूसरी कई भैंसों से अलग दिखाई देती है. यही वजह है कि गांवों में इसे देखने वाले लोग अक्सर इसकी कद-काठी देखकर आकर्षित हो जाते हैं.

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दूध के मामले में भी है अच्छी
जाफराबादी को सिर्फ इसके बड़े शरीर के लिए नहीं जाना जाता. यह एक अच्छी दुधारू नस्ल भी है. एनडीडीबी के आंकड़ों के अनुसार इसका औसत लैक्टेशन मिल्क यील्ड 2,239 किलो है. हालांकि हर भैंस से मिलने वाला दूध एक जैसा नहीं होता. उसकी उम्र, नस्ल की शुद्धता, खानपान, देखभाल, मौसम और स्वास्थ्य जैसी कई चीजों का असर दूध उत्पादन पर पड़ता है. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर जाफराबादी भैंस रोजाना एक तय मात्रा में दूध ही देगी.

दूध में फैट भी अच्छी मात्रा में
भैंस के दूध की खासियत सिर्फ उसकी मात्रा नहीं, बल्कि उसमें मौजूद फैट भी है. आईसीएआर के एक स्टडी में जाफराबादी के दूध में औसत फैट करीब 8.61 प्रतिशत दर्ज किया गया था. यह आंकड़ा अलग-अलग पशुओं और परिस्थितियों में बदल सकता है. दूध में फैट ज्यादा होने से घी, मक्खन और कुछ दूसरे डेयरी उत्पाद बनाने में भी फायदा हो सकता है. यही वजह है कि ज्यादा फैट वाले दूध की डेयरी कारोबार में अच्छी मांग रहती है.

गुजरात में क्यों है इतनी खास?
जाफराबादी का मूल क्षेत्र गुजरात है. खासकर सौराष्ट्र के कई जिलों में यह नस्ल पाई जाती है. एनडीडीबी के गुजरात संबंधी आंकड़ों में भी जाफराबादी की बड़ी आबादी दर्ज की गई है. यह नस्ल वहां के स्थानीय वातावरण और पशुपालन व्यवस्था का हिस्सा रही है. देशी नस्लों की एक खास बात यह होती है कि वे अपने स्थानीय इलाके की परिस्थितियों के अनुसार लंबे समय में विकसित हुई होती हैं. आईसीएआर के मुताबिक देशी पशु नस्लों में स्थानीय जलवायु और परिस्थितियों के अनुसार ढलने की खासियत देखी जाती है.

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क्या जाफराबादी खरीदना हमेशा फायदे का सौदा है?
यहां एक बात समझना जरूरी है. सिर्फ नस्ल का नाम देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि कोई भैंस खरीदने पर कितना फायदा होगा. दूध की मात्रा, फैट, पशु की उम्र, उसकी सेहत, गर्भधारण की स्थिति, चारे का खर्च और स्थानीय दूध का भाव, इन सभी चीजों का हिसाब लगाना जरूरी है. अगर भैंस अच्छी नस्ल की है, स्वस्थ है और उसका दूध उत्पादन अच्छा है, तो डेयरी किसान के लिए वह कमाई का अच्छा जरिया बन सकती है. लेकिन पशुपालन में चारा, इलाज और देखभाल का खर्च भी जुड़ा होता है.

इसलिए खास मानी जाती है जाफराबादी
जाफराबादी की पहचान उसके भारी शरीर, मजबूत बनावट, अच्छे दूध उत्पादन और दूध में अच्छी फैट मात्रा से होती है. यही खूबियां इसे देश की चर्चित देसी भैंस नस्लों में शामिल करती हैं. तो अगली बार जब कोई भारी-भरकम काली भैंस देखकर उसकी नस्ल पूछे, तो जाफराबादी का नाम जरूर याद रखिए. हालांकि सिर्फ देखकर नस्ल की पक्की पहचान करना आसान नहीं होता. असली पहचान के लिए पशु की नस्ल संबंधी रिकॉर्ड और विशेषज्ञ की सलाह ज्यादा भरोसेमंद होती है.

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