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सोते हुए अचानक गिरने जैसा क्यों फील होता है? जानें इसके पीछे की वजह

सोते-सोते अचानक गिरने जैसा महसूस होना और उसी झटके से नींद खुल जाना काफी लोगों के साथ होता है. इसे हाइपनिक जर्क कहा जाता है. लेकिन आखिर सोते वक्त दिमाग को ऐसा क्या महसूस होता है कि शरीर अचानक झटके से हिल जाता है?

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सोने के दौरान दिमाग और शरीर के बीच होने वाले सिग्नल तेजी से बदलते हैं (Photo: Ai generated )
सोने के दौरान दिमाग और शरीर के बीच होने वाले सिग्नल तेजी से बदलते हैं (Photo: Ai generated )

क्या आपको भी कभी सोते-सोते अचानक ऐसा लगा है जैसे आप कहीं से गिर रहे हैं और उसी झटके से नींद खुल गई? अगर हां, तो आप अकेले नहीं हैं. वैज्ञानिक भाषा में इस घटना को हाइपनिक जर्क  कहा जाता है. इसे हिप्नागॉजिक जर्क, स्लीप स्टार्ट या नाइट स्टार्ट भी कहा जाता है.

हाइपनिक जर्क नींद में जाने के दौरान होने वाला अचानक और अनैच्छिक मांसपेशियों का झटका है. कई बार इसके साथ ऐसा महसूस होता है जैसे शरीर नीचे गिर रहा हो, किसी ने धक्का दिया हो या अचानक पैर फिसल गया हो. साइंस लिटरेचर में इसे नींद और जागने के बीच होने वाले बदलाव यानी स्लीप-वेक ट्रांजिशन से जुड़ी सामान्य घटना माना जाता है.

आखिर गिरने जैसा क्यों महसूस होता है?

इसका एक पक्का कारण अभी वैज्ञानिकों को पता नहीं है. हालांकि, इसके पीछे कुछ संभावित एक्सप्लेनेशन जरूर हैं.क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, एक थ्योरी यह है कि जब हम सोने लगते हैं तो मांसपेशियां धीरे-धीरे रिलैक्स होने लगती हैं. इस दौरान दिमाग शरीर की बदलती अवस्था को कभी-कभी मूवमेंट या अस्थिरता की तरह इंटरप्रेट कर सकता है. इसके जवाब में दिमाग मांसपेशियों को एक्टिव करने का सिग्नल भेज सकता है. इसी वजह से अचानक झटका महसूस हो सकता है.

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इसे एक आसान उदाहरण से समझिए. मान लीजिए आप सीढ़ी पर खड़े हैं और अचानक आपका पैर थोड़ा डगमगा जाता है. दिमाग इसे 'बैलेंस बिगड़ रहा है' जैसा सिग्नल मान सकता है. शरीर तुरंत खुद को संभालने के लिए मांसपेशियों को टाइट करता है.

सोते समय होने वाले हाइपनिक जर्क को भी कुछ हद तक इसी उदाहरण से समझाया जाता है. जब शरीर नींद में जाने के दौरान तेजी से रिलैक्स होता है, तो दिमाग उस बदलाव को संभावित मूवमेंट की तरह इंटरप्रेट कर सकता है और मांसपेशियों में अचानक गतिविधि हो सकती है.

यह एक संभावित एक्सप्लेनेशन है, वैज्ञानिक रूप से साबित अंतिम कारण नहीं. रिसर्चर्स अभी तक यह पूरी तरह तय नहीं कर पाए हैं कि हाइपनिक जर्क आखिर क्यों होता है.

असली वजह क्या है? साइंस क्या कहती है

हाइपनिक जर्क के पीछे एक से ज्यादा संभावित एक्सप्लेनेशन बताए गए हैं. इनमें नर्वस सिस्टम में होने वाली एक्टिविटी और स्लीप-वेक ट्रांजिशन से जुड़े बदलाव प्रमुख हैं.

स्लीप फाउंडेशन के मुताबिक, हाइपनिक जर्क और दूसरे तरह के मायोक्लोनस दिमाग के उस हिस्से से जुड़े हो सकते हैं, जो स्टार्टल रिस्पॉन्स यानी अचानक चौंकने पर शरीर की प्रतिक्रिया को नियंत्रित करता है.

स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, सोने के दौरान रेटिक्युलर ब्रेनस्टेम की नसों के बीच कभी-कभी एक तरह का “मिसफायर” होने की संभावना मानी जाती है. इससे अचानक मांसपेशियों की गतिविधि शुरू हो सकती है और शरीर को झटका लग सकता है.

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आसान भाषा में समझें तो सोने के दौरान दिमाग और शरीर के बीच होने वाले सिग्नल तेजी से बदल रहे होते हैं. इसी बदलाव के दौरान कभी-कभी कोई सिग्नल गलत समय पर एक्टिव हो सकता है. इसका नतीजा हाथ, पैर या पूरे शरीर में अचानक झटके के रूप में दिखाई दे सकता है.

थ्योरी 2: दिमाग की ‘गलतफहमी’

एक दूसरी थ्योरी के मुताबिक, जब हम सोने लगते हैं तो मांसपेशियों का रिलैक्स होना दिमाग को कुछ पल के लिए अस्थिरता या गिरने जैसा लग सकता है.

मान लीजिए आप बिस्तर पर लेटे हैं और आपका शरीर धीरे-धीरे पूरी तरह रिलैक्स हो रहा है. इसी दौरान अगर दिमाग इस बदलाव को संभावित गिरने या मूवमेंट के संकेत की तरह इंटरप्रेट करता है, तो वह मांसपेशियों को अचानक एक्टिव कर सकता है.

इसी वजह से आपको ऐसा महसूस हो सकता है जैसे आप अचानक गिर गए हों या किसी ने धक्का दे दिया हो. हालांकि, यह भी एक संभावित थ्योरी है और इसे हाइपनिक जर्क का पक्का कारण नहीं माना जाता.

थ्योरी 3: क्या यह विकासवादी प्रतिक्रिया हो सकती है?

हाइपनिक जर्क को समझाने वाली एक इवोल्यूशनरी यानी विकासवादी थ्योरी भी है.इस विचार के मुताबिक, हमारे बहुत पुराने पूर्वजों के लिए सोते समय शरीर का अचानक रिलैक्स होना किसी अस्थिर जगह से गिरने के जोखिम से जुड़ा हो सकता था. इस थ्योरी में माना जाता है कि मांसपेशियों के रिलैक्स होने को दिमाग संभावित गिरने के संकेत की तरह लेता और शरीर को अचानक टाइट करने की प्रतिक्रिया पैदा होती.

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यह सिर्फ एक इवोल्यूशनरी हाइपोथिसिस है. इसे इस बात के स्थापित प्रमाण के रूप में नहीं देखा जा सकता कि इंसानों में हाइपनिक जर्क वास्तव में पेड़ों से गिरने से बचने के लिए विकसित हुआ था. वैज्ञानिक रिव्यूज अभी भी इसके एग्जैक्ट ओरिजिन और मैकेनिज्म को पूरी तरह स्पष्ट नहीं मानते.

यानी अगली बार नींद में अचानक लगे कि आप नीचे गिर गए और उसी पल पैर या पूरा शरीर झटके से हिल जाए, तो जरूरी नहीं कि कोई बड़ी समस्या हो. कई बार यह बस आपके जागने से नींद की ओर जाने के दौरान शरीर में हो रहा एक सामान्य बदलाव होता है.

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