आजकल शहरों में लोग कम जगह में घर बना रहे हैं. ऐसे में कार या गाड़ियों के लिए अतिरिक्त जगह निकालकर बड़ी पार्किंग या गैराज बनाना मुश्किल हो जाता है. इस समस्या का एक बेहतरीन हल है हाइड्रोलिक कार लिफ्ट सिस्टम. इस मशीन के जरिए कम जगह में बिना आगे पीछे किए आप अपनी गाड़ी को सीधे गैराज में पार्क कर सकते हैं. या फिर अगर आपके पास दो गाड़ियां है और जगह सिर्फ एक गाड़ी कि है तो इसके इस्तेमाल से अतिरिक्त पार्किंग स्पेस बन जाता है.
इसके अलावा हाइड्रोलिक कार पार्किंग लिफ्ट सिस्टम से एक फ्लोर से दूसरे फ्लोर तक भी गाड़ी आराम से पार्क की जा सकती है. इसकी सबसे बड़ी खूबी यह होती है कि यह कम जगह वाले घर में सटीक काम करता है.
ये सिस्टम आपकी बिल्डिंग के हिसाब से कस्टमाइज़ किए जाते हैं. ताकि तेजी से अंदर-बाहर आया-जाया जा सके और कम शोर-शराबे व वाइब्रेशन के साथ सुरक्षित तरीके से काम हो सके. कार लिफ़्ट के लिए बहुत कॉम्पैक्ट और गियरलेस ड्राइव यूनिट और हाइड्रोलिक सिस्टम भी आता है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर इस कार लिफ्ट सिस्टम को लगवाने में खर्च कितना आता है.
भारत में घर में कार लिफ्ट लगवाने का कुल खर्च आमतौर पर 2 लाख से लेकर 10 लाख रुपये या उससे अधिक तक हो सकता है. यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस प्रकार की लिफ्ट चुन रहे हैं और आपके गैराज का साइज क्या है.
सिंगल पोस्ट लिफ्ट लगवाने में 3 से 6 लाख रुपये लगते हैं. यह कम जगह में फिट होने वाली प्रीमियम लिफ्ट होती है. वहीं अंडरग्राउंड कार एलिवेटर इंस्टॉल करवाने में 10 से 16 लाख रुपये का खर्चा आता है. इसें कार को बेसमेंट से ग्राउंड फ्लोर पर ले जाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
कम स्पेस में एक कार के ऊपर दूसरी कार पार्क करने के लिए पोस्ट पार्किंग स्टाकर लिफ्ट लगवाने में 2 से 4 लाख रुपये खर्च होते हैं. इसके अलावा इंस्टॉलेशन लेबर चार्ज आमतौर पर 50,000 से 1 लाख तक खर्च हो सकता है. साथ नियमित मेंटेनेंस पर सालाना 10 से 15,000 रुपये खर्च होते हैं.
घर के गैराज में ऐसे इंस्टॉल होता हाइड्रोलिक कार लिफ्ट
अगर आप दो कारों को एक के ऊपर एक पार्क करने के लिए लिफ्ट लगा रहे हैं, तो आपके गैराज की छत कम से कम 11 से 12 फीट ऊंची होनी चाहिए. हाइड्रोलिक लिफ्ट का पूरा वजन और कार का भार फर्श पर आता है। इसके लिए फर्श पर कम से कम 4 से 6 इंच मोटा मजबूत कंक्रीट बेस होना जरूरी है, ताकि लिफ्ट के बोल्ट उसमें मजबूती से धंस सकें.
इंजीनियर आपके गैराज में जगह का सटीक माप लेते हैं और लिफ्ट के खंभों को खड़ा करने के लिए फर्श पर मार्किंग करते हैं. लिफ्ट के भारी स्टील के खंभों को सीधा खड़ा किया जाता है. एक हैवी-ड्यूटी रोटरी हैमर ड्रिल से कंक्रीट के फर्श में गहरे छेद किए जाते हैं और एंकर बोल्ट्स की मदद से लिफ्ट के बेस को जमीन से पूरी तरह जाम कर दिया जाता है.
लिफ्ट की आर्म्स या प्लेटफॉर्म को पोस्ट यानी खंभे के साथ जोड़ा जाता है. इसके बाद हाइड्रोलिक सिलेंडर, लिक्विड पाइप्स और पावर पैक (इलेक्ट्रिक मोटर और हाइड्रोलिक ऑयल टैंक) को फिक्स किया जाता है. फिर लिफ्ट को चलाने के लिए पावर पैक को बिजली के कनेक्शन से जोड़ा जाता है.
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घरेलू उपयोग वाली लिफ्ट्स सिंगल-फ़ेज़ या थ्री-फ़ेज़ कनेक्शन पर काम करती हैं. सुरक्षा के लिए इसमें ऑटोमैटिक लॉक और लिमिट स्विच के वायर भी कनेक्ट किए जाते हैं. हाइड्रोलिक टैंक में विशेष हाइड्रोलिक ऑयल भरा जाता है. बिना लोड यानी बिना कार के लिफ्ट को ऊपर-नीचे करके चेक किया जाता है कि कहीं ऑयल लीक तो नहीं हो रहा. इसके बाद कार को ऊपर उठाकर सेफ्टी लॉक और वजन उठाने की क्षमता की अंतिम टेस्टिंग की जाती है.