क्या आपने कभी सोचा है कि इतना ताकतवर और तेज दौड़ने वाले घोड़े को आखिर पैरों में लोहे की नाल क्यों पहनायी जाती है? अगर घोड़ा जंगल में बिना नाल के रह सकता है, तो इंसानों के साथ रहने वाले घोड़ों को इसकी जरूरत क्यों पड़ती है? और सबसे बड़ा सवाल... क्या नाल ठोकते समय घोड़े को दर्द होता है? ये ऐसे सवाल हैं जो लगभग हर किसी के मन में कभी न कभी जरूर आते हैं. बहुत से लोग मानते हैं कि घोड़े की नाल सिर्फ एक पुरानी परंपरा है. कुछ लोग इसे शुभ मानते हैं और घर के दरवाजे पर भी टांग देते हैं. लेकिन असलियत इससे बिल्कुल अलग है.
दरअसल, घोड़े के पैरों में लगाई जाने वाली यह छोटी-सी लोहे की नाल उसके लिए किसी सुरक्षा कवच से कम नहीं होती. अगर जरूरत होने पर घोड़े को नाल न पहनाई जाए, तो उसके खुर (पैरों का निचला हिस्सा) जल्दी खराब हो सकते हैं और उसे चलने-फिरने में भी परेशानी होने लगती है. आइए जानते हैं इसके पीछे का पूरा साइंस.
एक वयस्क घोड़े का वजन लगभग 400 से 700 किलोग्राम तक हो सकता है. सोचिए, इतना भारी शरीर सिर्फ चार छोटे-से खुरों के सहारे चलता है. जब घोड़ा तेज दौड़ता है, ऊंची छलांग लगाता है या कई किलोमीटर तक सफर करता है, तब उसके खुरों पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है. अगर इन खुरों की सुरक्षा न की जाए, तो वे धीरे-धीरे घिसने लगते हैं. कई बार उनमें दरारें पड़ जाती हैं और घोड़े को चलने में दर्द होने लगता है. इसी परेशानी से बचाने के लिए उसके खुरों में नाल लगाई जाती है.
घोड़े के खुर आखिर बने किस चीज से होते हैं?
अधिकतर लोगों को लगता है कि घोड़े के खुर पत्थर की तरह कठोर होते हैं. लेकिन ऐसा नहीं है. घोड़े के खुर केराटिन नाम के पदार्थ से बने होते हैं. यही पदार्थ इंसानों के नाखून और बालों में भी पाया जाता है. जिस तरह हमारे नाखून लगातार बढ़ते रहते हैं, उसी तरह घोड़े के खुर भी बढ़ते रहते हैं. लेकिन फर्क सिर्फ इतना है कि घोड़ा हर दिन कई किलोमीटर चलता है. अगर वह पक्की सड़क, पत्थरों या पहाड़ी रास्तों पर ज्यादा चले, तो उसके खुर बहुत तेजी से घिसने लगते हैं. यहीं पर लोहे की नाल अपना काम करती है. यह खुर और जमीन के बीच एक मजबूत परत बन जाती है, जिससे खुर सीधे जमीन से नहीं रगड़ते और लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं.
नाल सिर्फ सुरक्षा नहीं, कई और फायदे भी देती है
अधिकतर लोग सोचते हैं कि नाल केवल खुरों को घिसने से बचाती है, लेकिन इसके फायदे इससे कहीं ज्यादा हैं. नाल की वजह से घोड़े को जमीन पर अच्छी पकड़ मिलती है. कीचड़, बारिश या फिसलन वाली जगह पर उसके फिसलने की संभावना काफी कम हो जाती है. इसी कारण पुलिस, सेना, पहाड़ी इलाकों में काम करने वाले घोड़े और खेल प्रतियोगिताओं में दौड़ने वाले घोड़े लगभग हमेशा नाल पहनते हैं. कुछ खास नालों में छोटे-छोटे उभरे हुए हिस्से भी लगाए जाते हैं, ताकि घोड़ा कठिन रास्तों पर भी आसानी से दौड़ सके.
क्या हर घोड़े की नाल एक जैसी होती है?
जिस तरह हर इंसान के जूते का नंबर अलग होता है, उसी तरह हर घोड़े की नाल भी अलग होती है. घोड़े का वजन कितना है, उसकी उम्र क्या है, वह किस काम के लिए इस्तेमाल होता है और किस तरह की जमीन पर चलता है, इन सभी बातों को ध्यान में रखकर नाल तैयार की जाती है. आज सिर्फ लोहे की ही नहीं, बल्कि स्टील, एल्यूमिनियम और रबर जैसी सामग्री से भी नाल बनाई जाती हैं. रेस वाले घोड़ों के लिए हल्की नाल बनाई जाती है, ताकि उनका वजन कम रहे और वे पहले से भी ज्यादा तेज दौड़ सकें।
क्या नाल ठोकने से घोड़े को दर्द होता है?
अगर नाल सही तरीके से लगाई जाए, तो घोड़े को दर्द नहीं होता. नाल खुर के उस बाहरी हिस्से में लगाई जाती है जहां नसें नहीं होतीं. इसे ऐसे समझिए जैसे इंसान अपने नाखून काटता है. नाखून काटने से दर्द नहीं होता, क्योंकि उसमें नसें नहीं होतीं. लेकिन अगर कोई अनुभवहीन व्यक्ति गलत जगह कील ठोक दे, तो घोड़े को चोट लग सकती है और उसे दर्द भी हो सकता है. इसी वजह से यह काम हमेशा एक ट्रेंड एक्सपर्ट ऐसा करता है, जिसे फैरियर कहा जाता है.
क्या एक बार नाल लगाने के बाद हमेशा चलती रहती है?
घोड़े के खुर लगातार बढ़ते रहते हैं, इसलिए कुछ समय बाद नाल ढीली हो जाती है. आमतौर पर हर 6 से 8 सप्ताह में पुरानी नाल निकालकर खुरों की सफाई और कटाई की जाती है. इसके बाद नई नाल लगाई जाती है. अगर समय पर नाल न बदली जाए, तो घोड़े के खुर का आकार बिगड़ सकता है और उसे चलने में परेशानी होने लगती है.
क्या हर घोड़े को नाल पहनाना जरूरी होता है?
नहीं. जो घोड़े खुले मैदानों में रहते हैं, मुलायम घास पर चलते हैं और बहुत कम काम करते हैं, वे बिना नाल के भी स्वस्थ रह सकते हैं. लेकिन जो घोड़े रोज सड़क पर चलते हैं, भारी सामान ढोते हैं, पहाड़ों पर चढ़ते हैं या खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हैं, उनके लिए नाल बेहद जरूरी होती है.
लोग घोड़े की नाल को शुभ क्यों मानते हैं?
भारत सहित दुनिया के कई देशों में घोड़े की नाल को सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. कई लोग अपने घर के मुख्य दरवाजे पर पुरानी नाल लगाते हैं. उनका विश्वास है कि इससे घर में खुशहाली आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है. हालांकि यह केवल एक धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यता है. विज्ञान इसकी पुष्टि नहीं करता. वैज्ञानिकों के अनुसार घोड़े की नाल का असली काम केवल घोड़े के खुरों की सुरक्षा करना, उन्हें मजबूत बनाए रखना और घोड़े को बिना दर्द के आराम से चलने-दौड़ने में मदद करना है.