जब दोस्तों के साथ कोई खास मौका हो, तो गिलास टकराकर ‘चीयर्स’ करना आम बात है. ज्यादातर लोग इसे खुशी मनाने और एक-दूसरे के लिए शुभकामना देने का तरीका मानते हैं. लेकिन दुनिया में एक ऐसी मान्यता भी है, जहां पानी से भरे गिलास को टकराकर चियर्स करना अच्छा नहीं माना जाता. जर्मनी की कुछ पुरानी मान्यताओं के मुताबिक, अगर आप किसी के साथ पानी का गिलास टकराकर शुभकामना देते हैं, तो इसे शुभ संकेत नहीं माना जाता. बल्कि इसे सामने वाले के लिए बुरी किस्मत या मौत की कामना से जोड़कर देखा गया है.
जर्मनी में पानी से ‘चीयर्स’ क्यों नहीं?
जर्मनी में दोस्तों के साथ शराब पीते समय गिलास टकराना और ‘प्रोस्ट’ कहना एक आम परंपरा है. लेकिन अगर गिलास में पानी हो, तो पुरानी मान्यता के मुताबिक ऐसा करने से बचा जाता है. इसके पीछे की कहानी काफी पुरानी बताई जाती है. एक मान्यता प्राचीन यूनान से जुड़ी है. वहां पानी से जुड़ा ऐसा प्रतीकात्मक संबंध मृतकों के साथ बताया जाता है. इसी वजह से पानी से टोस्ट करना बाद में शुभकामना के बजाय मौत या दुर्भाग्य की कामना से जोड़ा जाने लगा.
कई और चीजों को लेकर भी अजीब मान्यताएं
जर्मनी में अंधविश्वास और पुरानी मान्यताओं से जुड़ी कई दिलचस्प बातें मिलती हैं. उदाहरण के लिए, किसी के साथ गिलास टकराते समय आंखों में आंखें डालकर ‘प्रोस्ट’ कहना जरूरी माना जाता है. एक पुरानी मान्यता तो यहां तक कहती है कि ऐसा नहीं करने पर सात साल तक दुर्भाग्य का सामना करना पड़ सकता है. इसी तरह किसी नए घर में जाते समय रोटी और नमक देना शुभ माना जाता है. इसका संबंध इस इच्छा से है कि नए घर में रहने वाले लोगों को कभी खाने की कमी न हो. वहीं नमक गिराने को पुराने समय में दुर्भाग्य से जोड़ा गया, क्योंकि कभी नमक बहुत कीमती चीज हुआ करता था.
जन्मदिन की बधाई भी पहले नहीं देते
जर्मनी की कुछ पुरानी मान्यताओं में जन्मदिन से पहले बधाई देना भी अच्छा नहीं माना जाता. यानी अगर किसी का जन्मदिन अगले दिन है, तो रात 12 बजे से पहले उसे जन्मदिन की शुभकामना देने से बचने की परंपरा रही है. इसके पीछे सोच यह बताई जाती है कि भविष्य में क्या होगा, यह पहले से तय नहीं माना जा सकता. इसलिए किसी घटना के होने से पहले उसकी बधाई देना दुर्भाग्य को बुलाने जैसा समझा जाता है.
काली बिल्ली को लेकर भी है अलग मान्यता
काली बिल्ली का रास्ता काटना कई देशों में अशुभ माना जाता है. लेकिन जर्मनी से जुड़ी एक पुरानी मान्यता में बिल्ली के रास्ता पार करने की दिशा तक को महत्व दिया गया है. मान्यता के मुताबिक, अगर काली बिल्ली दाएं से बाएं जाए तो इसे शुभ और बाएं से दाएं जाने को अशुभ संकेत माना जाता है.
आखिर इन मान्यताओं की सच्चाई क्या है?
इन बातों को वैज्ञानिक तथ्य नहीं, बल्कि पुरानी लोक मान्यताओं और अंधविश्वासों के रूप में देखना चाहिए. अलग-अलग देशों और संस्कृतियों में ऐसी परंपराएं सदियों से चली आ रही हैं. समय के साथ इनके पीछे की मूल वजहें कई जगह बदल गईं या अस्पष्ट हो गईं, लेकिन मान्यताएं आज भी लोगों की रोजमर्रा की परंपराओं में दिखाई देती हैं. इसलिए अगली बार अगर किसी जर्मन दोस्त के साथ ‘चीयर्स’ करें और वह पानी का गिलास टकराने से मना कर दे, तो हैरान होने की जरूरत नहीं. इसके पीछे एक बेहद पुरानी मान्यता की कहानी हो सकती है.