भारत में साइबर अपराध का दायरा लगातार बढ़ रहा है. ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, फर्जी कस्टमर केयर, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी निवेश जैसी घटनाओं के बीच केंद्र सरकार ने डिजिटल अपराध के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के लिए 'I4C-Sahyog' पोर्टल को अहम हथियार बनाया है.
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र यानी I4C के मुताबिक, इस पोर्टल और अन्य कार्रवाई के जरिए 2,77,053 से ज्यादा अवैध और धोखाधड़ी से जुड़े Apps, कंटेंट, वेबसाइट, ई-मेल अकाउंट, URLs और Links को ब्लॉक किया गया है.
कैसे काम करता है Sahyog?
'I4C-Sahyog' का काम सरकारी एजेंसियों और इंटरनेट कंपनियों जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और ऐप कंपनियों के बीच सूचना और कार्रवाई को तेज करना है. अगर कोई वेबसाइट, ऐप, सोशल मीडिया अकाउंट, लिंक या डिजिटल डिवाइस का किसी गैरकानूनी गतिविधि में इस्तेमाल हो रहा हो तो संबंधित प्लेटफॉर्म को जल्दी ऑफिशियल डिमांड भेजा जा सकता है. ये सिस्टम Information Technology Act, 2000 की धारा 79(3)(b) के तहत नोटिस भेजने में मदद करती है.
इस कानून के मुताबिक सरकार या आधिकारिक एजेंसी किसी कंपनी को गैरकानूनी कंटेंट हटाने या ब्लॉक करने का आदेश दे सकती है. साइबर अपराधियों की सबसे बड़ी ताकत उनकी रफ्तार होती है, जिससे वे एक लिंक या अकाउंट बंद होते ही दूसरा अकाउंट बना लेते हैं. इसलिए शिकायत, सूचना और आधिकारिक कार्रवाई के बीच की देरी को कम करना बहुत जरूरी है.
I4C के मुताबिक, Sahyog पोर्टल और दूसरी सक्रिय कार्रवाइयों से 2.77 लाख से ज्यादा अवैध और धोखाधड़ी वाले ऐप, कंटेंट, वेबसाइट, ईमेल अकाउंट, यूआरएल और लिंक ब्लॉक किए गए हैं. इन मामलों में संबंधित इंटरनेट कंपनियों (आईटी इंटरमीडियरीज) को सूचना दी गई और उनसे कार्रवाई करने को कहा गया.
यह आंकड़ा बताता है कि साइबर अपराध से लड़ाई अब सिर्फ पारंपरिक पुलिस जांच तक सीमित नहीं है. अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के स्तर पर भी बड़े पैमाने पर कार्रवाई हो रही है. ऑनलाइन फ्रॉड में इस्तेमाल होने वाले फर्जी ऐप, संदिग्ध वेबसाइट और लिंक आम लोगों को पैसे का नुकसान पहुंचा सकते हैं और उनकी निजी जानकारी भी चुरा सकते हैं. इसी तरह फर्जी ईमेल अकाउंट और डिजिटल कंटेंट का इस्तेमाल पहचान चोरी, फिशिंग, सोशल इंजीनियरिंग और दूसरे साइबर अपराधों में किया जा सकता है.
आम लोगों के लिए क्यों है अहम?
फर्जी ऐप और वेबसाइट लोगों से पैसे ठगने के साथ उनकी निजी जानकारी भी चुरा सकते हैं. फिशिंग, पहचान की चोरी और सोशल इंजीनियरिंग जैसे अपराधों में फर्जी ई-मेल और लिंक का इस्तेमाल होता है. इसलिए डिजिटल संसाधनों को समय रहते ब्लॉक करना संभावित पीड़ितों की संख्या कम कर सकता है.
सरकार के साथ सोशल मीडिया कंपनियों, इंटरनेट प्रोवाइडर्स, ऐप प्लेटफॉर्म और दूसरे इंटरमीडियरीज की भूमिका भी जरूरी है. लीगल सरकारी निर्देश मिलने के बाद ये प्लेटफॉर्म तेजी से कार्रवाई करते हैं.
I4C की व्यापक साइबर सुरक्षा रणनीति में शिकायतों, वित्तीय धोखाधड़ी और संदिग्ध डिजिटल संसाधनों पर कार्रवाई शामिल है. आने वाले समय में AI, डीपफेक, फर्जी डिजिटल पहचान और ऑटोमेटेड फ्रॉड जैसी चुनौतियां बढ़ सकती हैं.ऐसे में अपराध होने के बाद जांच के साथ-साथ अपराध में इस्तेमाल होने वाले डिजिटल साधनों को पहले ही रोकना सरकार की रणनीति का अहम हिस्सा बनता जा रहा है.