828 मीटर ऊंची बुर्ज खलीफा को हर कोई आसमान छूती इमारत के तौर पर जानता है, लेकिन इसका जमीन के भीतर वाला हिस्सा उतना ही दिलचस्प है. दुनिया की सबसे ऊंची बिल्डिंग को टिकाए रखने के लिए जो नींव डाली गई, उसकी कहानी थोड़ी अलग है.
इंजीनियरों ने यहां पाइल्ड रैफ्ट फाउंडेशन का इस्तेमाल किया. एक मोटी कंक्रीट की परत के नीचे सैकड़ों मजबूत खंभे गाड़ दिए गए, जो मिलकर इमारत का पूरा बोझ उठाते हैं. सबसे ऊपर करीब 3.7 मीटर मोटी कंक्रीट रैफ्ट बिछी है, और उसके नीचे 192 पाइल्स धंसे हैं. हर पाइल की मोटाई करीब 1.5 मीटर के आसपास है.
ये खंभे कितने गहरे जाते हैं, इसे लेकर अलग-अलग तकनीकी रिपोर्ट में थोड़ा फर्क मिलता है. बुर्ज खलीफा की आधिकारिक जानकारी में पाइल्स की लंबाई करीब 43 मीटर बताई गई है, जबकि कुछ तकनीकी अध्ययनों में यह करीब 45 मीटर तक बताई गई है. आसान भाषा में समझें तो जमीन के अंदर ये खंभे करीब 45 मीटर तक जाते हैं.
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अब 45 मीटर कितना होता है? इसे ऐसे समझिए कि एक सामान्य मंजिल की ऊंचाई करीब 3 मीटर मान लें, तो 45 मीटर की गहराई लगभग 15 मंजिला इमारत के बराबर होगी. यानी जमीन के ऊपर 828 मीटर ऊंची बुर्ज खलीफा खड़ी है, वहीं उसके नीचे उसकी नींव के लंबे पाइल्स करीब 15 मंजिला इमारत जितनी गहराई तक जमीन के अंदर फैले हुए हैं.
जब दुबई की जमीन बनी रूकावट
अब इसकी कहानी समझने के लिए जमीन के नीचे जाना होगा. बुर्ज खलीफा की नींव बनाने से पहले इंजीनियरों ने जमीन की परतों को समझने के लिए गहरी जांच की. इसके लिए कई बोरहोल किए गए. इनमें से एक जांच करीब 140 मीटर की गहराई तक की गई. इस जांच में रेत के साथ कमजोर सैंडस्टोन, सिल्टस्टोन और दूसरी चट्टानी परतें मिलीं. यानी जमीन के नीचे की संरचना बिल्कुल आसान नहीं थी.
इसी वजह से इंजीनियरों ने ऐसी नींव तैयार की, जिसमें रैफ्ट और पाइल्स दोनों मिलकर इमारत का भार संभालते हैं. पाइल्स जमीन के अंदर जाकर आसपास की मिट्टी और चट्टानी परतों के साथ मिलकर इमारत का वजन संभालने में मदद करते हैं. यानी बुर्ज खलीफा की मजबूती सिर्फ उसके ऊपर दिखाई देने वाले कंक्रीट और स्टील में नहीं, बल्कि जमीन के नीचे छिपी इस पूरी इंजीनियरिंग में भी है.
इसी वजह से इंजीनियरों ने ऐसी नींव तैयार की जिसमें रैफ्ट और पाइल्स दोनों मिलकर इमारत का भार संभालते हैं. पाइल्स जमीन के अंदर करीब 45-50 मीटर तक जाते हैं और मिट्टी तथा चट्टानी परतों के साथ मिलकर इमारत के वजन को संभालने में मदद करते हैं.
मजबूत खूंटा वाली तकनीक
दिलचस्प बात यह है कि ये पाइल्स किसी सख्त चट्टान पर टिककर वजन नहीं संभालते. इंजीनियरों ने ऐसा डिजाइन चुना जिसमें खंभों और आसपास की मिट्टी के बीच की रगड़ ही इमारत को थामे रखती है.कुछ वैसे ही जैसे मिट्टी में गड़ा हुआ मजबूत खूंटा चारों तरफ से पकड़ में आ जाता है.
नींव के लिए 45,000 क्यूबिक मीटर से ज्यादा कंक्रीट लगा, जिसका वजन एक लाख टन से भी ऊपर बैठता है. दुबई का भूजल खारा और नुकसानदायक होता है, इसलिए कंक्रीट को जंग और सीलन से बचाने के लिए खास तकनीकें भी अपनाई गईं, ताकि यह नींव दशकों तक बिना कमजोर पड़े टिकी रहे.
इतने भारी-भरकम स्ट्रक्चर के लिए जमीन का कुछ धंसना लाजमी था, इसलिए निर्माण से पहले मिट्टी और पाइल्स को लेकर लंबी टेस्टिंग और कैलकुलेशन की गई.कुल मिलाकर, बुर्ज खलीफा जितनी ऊंचाई पर गर्व करती है, उतनी ही मेहनत उसकी अनदेखी जमीन के नीचे वाली नींव में भी लगी है.