समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और अभी जेल में बंद आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर यूनिवर्सिटी पर अब बुलडोजर चलने का डर मंडरा रहा है. रामपुर विकास प्राधिकरण ने यूनिवर्सिटी परिसर में बने 40 भवनों में से 38 भवनों को अवैध निर्माण माना है और ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया है. प्राधिकरण का कहना है कि इन बिल्डिंग का निर्माण बिना किसी स्वीकृत नक्शे के किया गया था. प्राधिकरण ने संस्थान को 15 दिन का समय दिया है कि वह इन भवनों को स्वयं हटा ले. अगर तय समय में ऐसा नहीं किया जाता है तो रामपुर विकास प्राधिकरण नियमानुसार कार्रवाई करेगा.
अगर प्राधिकरण एक्शन लेता है और बुलडोजर चलता है तो आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट मलबे में तब्दील हो जाएगा. ऐसे में जानते हैं कि जिस जौहर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई की होने वाली है, वो कितनी बड़ी है, अभी वहां किस चीज की पढ़ाई होती है, वहां के पुराने और वर्तमान हालात क्या हैं.
कौन थे मोहम्मद अली जौहर, जिनके नाम पर है यूनिवर्सिटी?
मौलाना मोहम्मद अली जौहर स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार, शिक्षाविद थे. वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उन चुनिंदा नेताओं में से थे जिन्होंने देश की आजादी के साथ-साथ शिक्षा और पत्रकारिता के क्षेत्र में क्रांतिकारी काम किए. वे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बेहद करीबी सहयोगी रहे और 1923 में इंडियन नेशनल कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए. इसके साथ ही वे खिलाफत आंदोलन के मुख्य सूत्रधार और प्रमुख नेता थे. उनका जन्म रामपुर स्थित शेख अब्दुल अली खान के घर में हुआ था.

क्या है इस यूनिवर्सिटी की कहानी?
जौहर यूनिवर्सिटी आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है. साल 2006 में समाजवादी सरकार के दौरान इसका शिलान्यास हुआ था, तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव खुद कई मंत्रियों के साथ रामपुर आए थे. इसके बाद 2012 में इसका उदघाटन अखिलेश यादव की सरकार में हुआ. मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को एक समय काफी सफल निजी विश्वविद्यालय माना जाता था औररामपुर और आसपास के पश्चिमी उत्तर प्रदेश में वो काफी लोकप्रिय था. यहां यूनिवर्सिटी की ओर से इंजीनियरिंग, मेडिकल, फार्मेसी, लॉ, बीएड, मैनेजमेंट, पैरामेडिकल और रिसर्च जैसे कई कोर्स करवाए जाते थे.
साल 2017 से 2020 को यूनिवर्सिटी का सबसे पीक वक्त माना जाता है, उस वक्त बड़ी संख्या में स्टूडेंट यहां पढ़ते थे. हालांकि, अभी भी 026-27 के लिए नए एडमिशन चल रहे हैं, पीएचडी प्रवेश परीक्षाएं हुई हैं और नियमित कोर्स संचालित किए जा रहे हैं. लेकिन, माना जाता है कि स्टूडेंट्स की संख्या में कमी आई है. शुरुआती सालों में इसका विशाल कैंपस, आधुनिक इमारतें और अनेक प्रोफेशनल कोर्स इसकी पहचान बने.

विवादों की बुनियाद पर खड़ी है यूनिवर्सिटी
यूनिवर्सिटी के शुरुआत होने के कुछ साल बाद यह यूनिवर्सिटी अपनी जमीनों को लेकर विवादों में आ गई. इस पर किसानों की जमीन कब्जाने का आरोप भी लगा. साथ ही ये भी आरोप है कि इस यूनिवर्सिटी के नाम पर जितनी जमीनें अधिग्रहित की गईं, उनमें से ज्यादा सरकारी जमीनें थीं. इसके अलावा यूनिवर्सिटी में आधे से ज्यादा सरकारी पैसे का इस्तेमाल हुआ है. इसे लेकर मनी लॉन्ड्रिंग का केस भी दर्ज हुआ और ईडी ने प्रशासन से कई सवाल पूछे कि जौहर यूनिवर्सिटी पर एडमिनिस्ट्रेटिव कंट्रोल किसका है? साथ ही जमीन अधिग्रहण करने के वो सभी रिकॉर्ड मांगे हैं जिसमें गलत तरीके से सरकारी और दूसरी जमीनें जौहर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट के नाम पर अधिग्रहित की गई थी. अब स्वीकृत नक्शे के हिसाब से कंस्ट्रक्शन ना होने की वजह से रामपुर प्राधिकरण ने 40 में से 38 भवन हटाने के आदेश दिए हैं.
कितनी बड़ी है यूनिवर्सिटी
मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की वेबसाइट के अनुसार, इसकी स्थापना साल 2006 में हुई थी. विश्वविद्यालय परिसर 250 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें कई बिल्डिंग्स हैं. यहां विज्ञान, लॉ, शिक्षा, वाणिज्य, इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी, फार्मेसी, नर्सिंग सहित पैरामेडिकल विज्ञान और एग्रीकल्चर से जुड़े कोर्स करवाए जाते हैं. इसके अलावा बैडमिंटन, शतरंज, कैरम, टेबल टेनिस जैसे इनडोर गेम और फुटबॉल, हॉकी, क्रिकेट, लॉन टेनिस, वॉलीबॉल, घुड़सवारी, रस्साकशी के ग्राउंड हैं. वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, करीब 90 टीचर 24 अलग-अलग विषयों को पढ़ाते हैं.

किन-किन सुविधाओं का था दावा?
दावा किया गया था कि यूनिवर्सिटी में एक पुस्तकालय है, जिसमें 40,000 से अधिक किताबें हैं. इंटरनेट सुविधा से लैस 170 से अधिक नोड्स वाली पांच कंप्यूटर लैब, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, वर्चुअल क्लास रूम, स्मार्ट क्लास रूम, विशाल सभागार, एककृषि प्रायोगिक फार्म, दो विशाल कैंटीन, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की सुविधा है.