दुनिया में जानवरों की प्रजनन प्रक्रिया जितनी जरूरी है, उतनी ही दिलचस्प भी. अपनी प्रजाति को आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग जीवों ने अलग-अलग तरीके अपनाए हैं. कोई रंग-बिरंगे पंखों से साथी को आकर्षित करता है, तो कोई सींग और दांतों से दूसरे नर से मुकाबला करता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ जानवर ऐसे भी हैं, जो जन्म के समय नर होते हैं और बाद में मादा बन जाते हैं?
यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन प्रकृति में ऐसा वास्तव में होता है. कुछ जीवों में यह उनकी सामान्य जीवन-प्रक्रिया का हिस्सा है, जबकि कुछ में सामाजिक या पर्यावरणीय परिस्थितियों के हिसाब से सेक्स में बदलाव हो सकता है. आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ दिलचस्प जीवों के बारे में.
क्लाउनफिश- पहले नर, फिर बन जाती है मादा
क्लाउनफिश इस मामले में सबसे दिलचस्प उदाहरणों में से एक है. इन मछलियों के जीवन में एक समय ऐसा आता है जब इनका सेक्स बदल जाता है. क्लाउनफिश के समूह में एक बड़ी और प्रमुख मादा होती है. उसके साथ कई नर रहते हैं. अगर किसी वजह से समूह की प्रमुख मादा की मौत हो जाए या वह वहां से हट जाए, तो समूह का सबसे बड़ा नर मादा में बदल जाता है और उसकी जगह ले लेता है.
आखिर सेक्स बदलने की जरूरत क्यों पड़ती है?
इसके पीछे एक सीधा फायदा है. अगर समूह की प्रमुख मादा नहीं रही तो नई मादा के लिए किसी दूसरे समूह से आने का इंतजार नहीं करना पड़ता. सबसे बड़ा नर ही मादा में बदलकर प्रजनन की प्रक्रिया को जारी रख सकता है.
हंप्ड श्रिम्प- एक साल नर, अगले साल मादा
हम्पी श्रिम्प भी इसी तरह का अनोखा जीव है. इसका जीवनचक्र ही कुछ ऐसा है कि यह पहले नर होता है और बाद में मादा बन जाता है. इसे प्रोटेंडरीकहा जाता है. यानी जीव अपने जीवन की शुरुआत नर के रूप में करता है और बाद में मादा बन जाता है.
इसका कारण वैज्ञानिक साइज एडवांटेज मॉडल से जोड़ते हैं. दरअसल, अंडे स्पर्म की तुलना में काफी बड़े होते हैं. ऐसे में ज्यादा अंडे बनाने के लिए बड़े शरीर का होना फायदेमंद होता है.
यह झींगा अपने जीवन के पहले साल नर रहता है. दूसरे साल यह मादा बन जाता है और उसी साल करीब 3,000 अंडे तक दे सकता है. इसके बाद इसकी जिंदगी खत्म हो जाती है.यानी इसकी पूरी जिंदगी को देखें तो पहले साल नर, दूसरे साल मादा और फिर प्रजनन के बाद जीवन समाप्त.
ब्लूहेड रैस- नर की जगह लेने के लिए मादा बन जाती है
समुद्र में पाई जाने वाली ब्लूहेड रैस नाम की मछली भी सेक्स बदलने की क्षमता रखती है. हालांकि इसमें बदलाव क्लाउनफिश से उलटा होता है. इस मछली के समूह में आमतौर पर एक बड़ा और प्रमुख नर होता है और उसके साथ कई मादाएं रहती हैं. इसे एक तरह का हरम ग्रुप कहा जा सकता है.
अगर प्रमुख नर मर जाए या समूह से हट जाए तो सबसे बड़ी मादा उसकी जगह लेती है. कुछ ही समय में उसके शरीर में बड़ा बदलाव शुरू हो जाता है और उसके अंडाशय स्पर्म बनाने वाले टेस्टिस में बदल जाते हैं.
यह बदलाव काफी तेजी से हो सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, परिपक्व अंडाशय सिर्फ 8 से 10 दिनों में टेस्टिस में बदल सकते हैं. इसके बाद यह मछली नर की तरह दूसरी मादाओं के साथ प्रजनन कर सकती है. यानी यहां सेक्स बदलने का मकसद भी समूह में प्रजनन की प्रक्रिया को जारी रखना है.
बियर्डेड ड्रैगन- तापमान बदल सकता है सेक्स
अब आते हैं बियर्डेड ड्रैगन पर. यह मामला थोड़ा अलग है. यह एक तरह का गिरगिट है. ज्यादातर स्तनधारियों की तरह इनका जैविक सेक्स मुख्य रूप से क्रोमोसोम से तय होता है. लेकिन इनमें तापमान का भी एक खास असर देखने को मिलता है.
अगर अंडे के विकसित होने के दौरान तापमान करीब 32 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाए, तो सामान्य तौर पर नर बनने वाले कुछ भ्रूण मादा के रूप में विकसित हो सकते हैं. यानी इनके मामले में सेक्स सिर्फ क्रोमोसोम से तय नहीं होता, बल्कि तापमान भी भूमिका निभा सकता है.
वैज्ञानिकों को अभी पूरी तरह पता नहीं है कि गर्म और शुष्क परिस्थितियों में ज्यादा मादाओं का पैदा होना इनके लिए किस तरह फायदेमंद है. एक संभावना यह मानी जाती है कि मुश्किल पर्यावरणीय परिस्थितियों में इससे प्रजनन क्षमता को बनाए रखने में मदद मिल सकती है.
ध्यान देने वाली बात यह है कि बियर्डेड ड्रैगन क्लाउनफिश या हंप्ड श्रिम्प की तरह जीवन में बाद में सामान्य रूप से नर से मादा नहीं बनता. यहां तापमान अंडे के विकास के दौरान सेक्स के विकास को प्रभावित करता है.
ग्रीन फ्रॉग- पर्यावरण के हिसाब से बदल सकता है सेक्स
कुछ ग्रीन फ्रॉग में भी सेक्स रिवर्सल यानी जैविक सेक्स में बदलाव देखने को मिला है. इनमें टैडपोल अवस्था में आनुवंशिक सेक्स और शरीर के विकास के बीच बदलाव की स्थिति बन सकती है. खास परिस्थितियों में ये विपरीत सेक्स के वयस्क के रूप में विकसित हो सकते हैं.
शुरुआत में वैज्ञानिकों ने माना था कि ऐसा बदलाव इंसानी प्रदूषण की वजह से हो सकता है, क्योंकि प्रदूषित पानी वाले कुछ इलाकों में मादा मेंढकों की संख्या ज्यादा मिली थी.
लेकिन बाद में ऐसे बदलाव बिना प्रदूषण वाले तालाबों में भी देखे गए. इससे पता चला कि यह सिर्फ प्रदूषण की वजह से होने वाली घटना नहीं है. पर्यावरण और स्थानीय परिस्थितियां भी इसमें भूमिका निभा सकती हैं.
आखिर जानवर सेक्स क्यों बदलते हैं?
अब सवाल है कि प्रकृति ने इन जीवों को ऐसा करने की क्षमता आखिर क्यों दी? इसका एक बड़ा कारण प्रजनन में फायदा हो सकता है. किसी समूह में अगर प्रमुख नर या मादा की मौत हो जाए तो उसकी जगह लेने के लिए किसी दूसरे जीव को सेक्स बदलने की क्षमता काफी उपयोगी हो सकती है.
कुछ जीवों में शरीर के आकार के हिसाब से भी नर या मादा होना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है. छोटे शरीर में नर बनना और बड़े होने पर मादा बनना कुछ प्रजातियों में ज्यादा अंडे पैदा करने में मदद कर सकता है.
यानी प्रकृति में सेक्स हमेशा एक स्थायी पहचान की तरह काम नहीं करता. कुछ जीवों के लिए यह उनके शरीर के आकार, सामाजिक व्यवस्था और पर्यावरण के हिसाब से बदलने वाली जैविक रणनीति भी हो सकती है.
और यही वजह है कि क्लाउनफिश से लेकर झींगे और कुछ सरीसृपों तक, प्रकृति ने प्रजनन को सफल बनाने के लिए ऐसे तरीके विकसित किए हैं, जो इंसानों के लिए भले ही हैरान करने वाले हों, लेकिन इन जीवों के जीवनचक्र का अहम हिस्सा हैं.