30 जून 1905 को अल्बर्ट आइंस्टीन ने जर्मन भौतिकी पत्रिका 'एनलन डेर फिजिक' में 'ज़ुर इलेक्ट्रोडायनामिक बेवेग्टर कोर्पर (इलेक्ट्रोडायनमिक्स ऑफ मूविंग बॉडीज)' नामक शोधपत्र प्रकाशित किया. इसमें उन्होंने पहली बार अपनी थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी यानी विशेष सापेक्षता सिद्धांत के बारे में बताया. आइंस्टीन के इस अभूतपूर्व कार्य ने भौतिकी की नींव हिला दी. उनके इस सिद्धांत ने 20वीं सदी के वैज्ञानिक चिंतन में क्रांति ला दी.
स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में फेडरल पॉलिटेक्निक स्कूल में पढ़ाई पूरी करने के बाद, आइंस्टीन ने 1902 से 1909 तक बर्न में स्विस पेटेंट कार्यालय में काम किया. उन्हें 'तीसरे दर्जे के तकनीकी विशेषज्ञ' के रूप में नियुक्त किया गया था, जहां वे पेटेंट योग्यता के लिए आविष्कारों की जांच करते थे, जिनमें संभवतः बजरी छांटने की मशीन और मौसम सूचक शामिल थे.
अपने मित्र मिशेल बेसो को लिखे एक पत्र में, आइंस्टीन ने पेटेंट कार्यालय को वह धर्मनिरपेक्ष मठ बताया जहां उन्होंने अपने सबसे सुंदर विचारों को जन्म दिया. इन विचारों में सबसे महत्वपूर्ण विचार 1905 में एक के बाद एक लिखे गए पांच सैद्धांतिक शोध पत्रों में सामने आए, जिन्होंने 20वीं सदी के वैज्ञानिक चिंतन में क्रांति ला दी. इतिहासकारों ने बाद में इस काल को आइंस्टीन का चमत्कारिक वर्ष कहा. उनके पहले शोध पत्र में पार्टिकल थ्योरी ऑफ लाइट का वर्णन किया गया था, जिसके लिए उन्हें बाद में 1921 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला.
उनके दूसरे शोध पत्र में मॉलिक्यूलर साइज तय करने की एक नई विधि विकसित की गई और उनके तीसरे शोध पत्र में ब्राउनियन मोशन का अध्ययन था. इसमें तरल में निलंबित कणों की गति की गणितीय व्याख्या प्रस्तुत की गई.
आइंस्टीन का चौथा शोधपत्र, जिसे भौतिकी के क्षेत्र में अब तक प्रकाशित सबसे महत्वपूर्ण शोधपत्रों में से एक माना जाता है, उसने उनके स्पेशल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी को प्रस्तुत किया.जिसने आइजैक न्यूटन द्वारा गति के नियमों को प्रतिपादित करने के बाद से प्रचलित ब्रह्मांड संबंधी उन विचारों को उलट दिया. न्यूटन ने लिखा था कि समय किसी भी बाह्य चीज से संबंध रखे बिना समान रूप से प्रवाहित होता है. जबकि अंतरिक्ष हमेशा एक समान और स्थिर रहता है. हालांकि, आइंस्टीन के क्रांतिकारी सिद्धांत ने यह बताया कि समय और अंतरिक्ष एबसल्यूट नहीं हैं, बल्कि प्रेक्षक की गति के सापेक्ष हैं.
सितंबर में, आइंस्टीन ने विशेष सापेक्षता के गणितीय अन्वेषण पर आधारित अपना पांचवां शोधपत्र प्रकाशित किया. यह समीकरण दुनिया का सबसे प्रसिद्ध समीकरण बन गया - E=mc².