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नशे में था फुकेट-दिल्ली फ्लाइट का पायलट, फिर भी रद्द नहीं होगा लाइसेंस! नियम क्या कहते हैं?

एयर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट केस में पायलट का एक और ड्रग टेस्ट पॉजिटिव आया है. ऐसे में जानते हैं कि इस स्थिति में पायलट पर क्या-क्या कार्रवाई की जा सकती है?

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 एअर इंडिया की फ्लाइट के पायलट पर डीजीसीए कार्रवाई कर सकता है. (Photo: Pexels)
एअर इंडिया की फ्लाइट के पायलट पर डीजीसीए कार्रवाई कर सकता है. (Photo: Pexels)

एयर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट AI2379 के मामले में एक और रिपोर्ट में ये साफ हो गया है कि पायलट ने नशा किया हुआ था. इस घटना की जांच कर रही एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो यानी AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आया है कि फ्लाइट के पायलट-इन-कमांड (PIC) का ड्रग टेस्ट ‘नॉन-नेगेटिव’ पाया गया. AAIB ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए DGCA से पायलट के खिलाफ प्राथमिकता के आधार पर उचित कार्रवाई करने की सिफारिश की है. ऐसे में सवाल है कि जब पायलट की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई है तो उस पर क्या कार्रवाई की जा सकती है....

क्या कार्रवाई हो सकती है?

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, DGCA के सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स (CAR), सेक्शन 5, सीरीज़ F, पार्ट V में साइकोएक्टिव पदार्थों से जुड़े नियम तय किए गए हैं. साइकोएक्टिव पदार्थ ऐसे पदार्थ होते हैं, जो किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति, व्यवहार या प्रदर्शन पर असर डाल सकते हैं.

CAR के अनुसार, ड्रग टेस्ट की प्रक्रिया में दो चरण होते हैं. अगर पहले टेस्ट में ड्रग पॉजिटिव आता है तो कन्फर्मेटरी टेस्ट होने तक पायलट को फ्लाइट ड्यूटी से हटा दिया जाता है. अगर कन्फर्म करने वाला दूसरा टेस्ट भी पॉजिटिव आता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है.

इस केस में पायलट का दूसरा टेस्ट भी पॉजिटिव आया है. हालांकि, इसका मतलब सीधे तौर पर यह नहीं है कि पायलट उसी वक्त नशे की हालत में था. टेस्ट में किसी पदार्थ की मौजूदगी और उड़ान के समय उसके प्रभाव में होने की बात अलग-अलग है. इस बारे में जांच में और जानकारी सामने आना बाकी है.

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पहली गलती है तो क्या होगा?

अगर नमूना B भी पॉजिटिव आता है और यह पायलट का पहली बार का मामला है तो CAR के अनुसार उसे डी-एडिक्शन या रीहैबिलिटेशन प्रोग्राम के लिए भेजा जाता है. इसके बाद पायलट को मेडिकल रीहैबिलिटेशन प्रोग्राम पूरा करना होगा.

इसके बाद उसका दोबारा टेस्ट किया जाएगा और मेडिकल फिटनेस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट लेना होगा. यानी अगर यह पहली बार की गलती है तो उसका लाइसेंस तुरंत रद्द नहीं होगा. जरूरी प्रक्रिया पूरी करने और मेडिकल फिटनेस हासिल करने के बाद वह दोबारा फ्लाइट ड्यूटी पर लौट सकता है.

दूसरी गलती है तो क्या होगा?

अगर पायलट दूसरी बार साइकोएक्टिव पदार्थ का इस्तेमाल करते हुए पाया जाता है तो CAR सख्त कार्रवाई का प्रावधान करता है. अगर पायलट पहले ही रीहैबिलिटेशन से गुजर चुका है और इसके बाद उसका टेस्ट फिर पॉजिटिव आता है तो उसका लाइसेंस तीन साल के लिए निलंबित किया जा सकता है.

तीसरी बार गलती तो क्या होगा?

अगर पायलट तीसरी बार साइकोएक्टिव पदार्थ के सेवन के मामले में पॉजिटिव पाया जाता है तो CAR के अनुसार उसका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है.

इस केस में क्या होगा?

अगर इस केस की बात करें तो मामला थोड़ा अलग है. ये सिर्फ नशे तक सीमित नहीं है. दरअसल, इस घटना में कई लोगों को चोट भी आई थी और एक बड़ी घटना होने से बची. ऐसे में एयर इंडिया और DGCA मामले की गंभीरता को देखते हुए और कड़ी कार्रवाई भी कर सकते हैं.

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घटना की गंभीरता को देखते हुए DGCA और एयर इंडिया की अलग-अलग जांच में यह देखा जाएगा कि ड्रग टेस्ट की रिपोर्ट, पायलट की ड्यूटी, कॉकपिट में उसके प्रदर्शन और करीब 300 फीट के एल्टीट्यूड लॉस के बीच कोई संबंध था या नहीं. इसकी जानकारी सामने आने के बाद पायलट के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है.

हालांकि, AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट अभी आखिरी निष्कर्ष नहीं है. इसलिए जांच पूरी होने से पहले यह कहना सही नहीं होगा कि विमान के एल्टीट्यूड लॉस की वजह पायलट का नशा ही था.

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