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गोदाम से चोरी हुए पांच हाथी दांत, कटघरे में वन विभाग

उत्तराखंड के लैंसडौन वन प्रभाग की लालढांग रेंज से हाथी दांत चोरी हो गए हैं. वन विभाग ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है. इस मामले में पौड़ी की SOG टीम भी तहकीकात कर रही है. प्रमुख वन संरक्षक नीना अग्रवाल ने कहा कि जांच जारी है और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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वन विभाग हाथी दांत चोरी मामले की जांच में जुटी है. (Photo- Pexels)
वन विभाग हाथी दांत चोरी मामले की जांच में जुटी है. (Photo- Pexels)

उत्तराखंड के लैंसडौन वन प्रभाग के तहत आने वाली लालढांग रेंज से हाथी दांत चोरी होने का मामला सामने आया है. स्टोर में रखे बेशकीमती हाथी दांत अचानक गायब हो गए, जिसके बाद वन विभाग के अधिकारियों ने लालढांग रेंज में डेरा डाल दिया है और मामले की पड़ताल शुरू कर दी है.

मामला दर्ज होते ही पौड़ी की SOG टीम भी लालढांग रेंज पहुंच गई और कर्मचारियों से पूछताछ कर मामले की तह तक जाने की कोशिश की. इस घटना के बाद से वन विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों की नींद उड़ी हुई है.

नियम के मुताबिक, किसी भी रेंज के स्टोर में रखी वन संपदा और जब्त की गई सामग्री के रखरखाव की जिम्मेदारी उसी रेंज के निर्धारित कर्मचारियों और अधिकारियों की होती है. 

स्टोर में मौजूद हर एक सामग्री का विवरण 'सी-17 बुक' और दूसरे संबंधित अभिलेखों में दर्ज किया जाता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि अगर स्टोर से हाथी दांत गायब हुए हैं, तो इसकी भनक समय रहते किसी को क्यों नहीं लगी?

अधिकारियों की जिम्मेदारी पर उठे सवाल

क्या स्टोर में रखी सामग्री और सी-17 रजिस्टर में दर्ज विवरण का नियमित रूप से मिलान किया जा रहा था? क्या वार्षिक ऑडिट और विभागीय निरीक्षण के दौरान उच्च अधिकारियों ने अभिलेखों में दर्ज हाथी दांतों की संख्या का वेरिफिकेशन किया था? अगर वेरिफिकेशन हुआ था, तो उस वक्त स्टॉक में कमी क्यों नहीं पकड़ी गई?

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विभाग के नियमों के मुताबिक, प्रभागीय वनाधिकारी (DFO), उप प्रभागीय वनाधिकारी (SDO) और वन संरक्षक (CCF) जैसे उच्च अधिकारी समय-समय पर अपने अधीनस्थ क्षेत्रों और रेंज स्टोरों का निरीक्षण करते हैं. इस दौरान स्टोर की सामग्री का मिलान अभिलेखों से किया जाना अनिवार्य होता है. ये मामला सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि उच्च अधिकारियों की निरीक्षण व्यवस्था और ऑडिट प्रक्रिया पर भी बड़े सवाल खड़े करता है.

अगर हर साल ऑडिट और निरीक्षण की प्रक्रिया होती रही है, तो ये साफ होना चाहिए कि किस अधिकारी ने वेरिफिकेशन किया था और उस समय स्टॉक की स्थिति क्या थी.

पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रमुख वन संरक्षक नीना अग्रवाल ने कहा, 'हम ये जानकारी जुटा रहे थे कि पूरे प्रदेश की रेंजों के अंदर कितने हाथी दांत मौजूद हैं. वाइल्डलाइफ के लिए इसकी पूरी सूचना संकलित की जा रही थी. जांच के दौरान कुछ हाथी दांत स्टॉक में नहीं दिखाई दिए.'

हाथी दांत चोरी मामले में शिकायत दर्ज

उन्होंने आगे बताया कि इस मामले में शिवालिक वन संरक्षण के स्तर पर विभागीय जांच जारी है और रविवार देर शाम इस संबंध में एक तहरीर भी दर्ज कराई गई है. स्टॉक से कुल कितने दांत गायब हुए, उनका वजन कितना था और वो किस वन्यजीव अपराध या मुकदमे से जुड़े थे, ये जांच के बाद ही साफ हो पाएगा.

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नीना अग्रवाल ने ये भी कहा कि इस दौरान स्टोर भी बदला गया था. अगले दो-चार दिनों में पूरी जांच के बाद ये साफ हो जाएगा कि इसके लिए कौन सा स्टाफ जिम्मेदार था. इस पूरे मामले को बहुत गंभीरता से लिया जा रहा है और वेरिफिकेशन के बाद जो भी कर्मचारी शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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