
उत्तराखंड की पर्यटन राजधानी नैनीताल घूमने की योजना बना रहे हैं तो यह खबर आपके लिए है. अब सिर्फ होटल, पार्किंग और ग्रीन टैक्स ही नहीं, बल्कि शहर में प्रवेश करने के लिए भी जेब ढीली करनी पड़ सकती है. नई व्यवस्था के तहत बाहरी जिलों और राज्यों से आने वाली बाइक और स्कूटी पर 100 रुपये एंट्री टैक्स लागू कर दिया गया है. फैसला लागू होते ही सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. किसी ने लिखा, जेब कटे बिना नैनीताल में एंट्री नहीं मिलेगी. तो किसी ने तंज कसते हुए पूछा, क्या कल नैनीताल में चलने और सांस लेने पर भी टैक्स लग जाएगा?
आधी रात से शुरू हुई वसूली
नई व्यवस्था रात 12 बजे से लागू कर दी गई. इसके तहत तल्लीताल लेक ब्रिज, बारापत्थर और फांसी गधेरा चुंगी नाकों पर नगर प्रवेश शुल्क की वसूली शुरू हो गई. नगर पालिका नैनीताल ने चुंगी वसूली का ठेका 24.55 करोड़ रुपये में दिया है. यह ठेका मार्च 2028 तक प्रभावी रहेगा.
अब किस वाहन से कितना शुल्क
नई व्यवस्था के अनुसार शुल्क इस प्रकार तय किया गया है :
- नैनीताल जिले (UK-04) की बाइक/स्कूटी: कोई फीस नहीं
- उत्तराखंड के अन्य जिलों और दूसरे राज्यों की बाइक-स्कूटी: 100 रुपये
- नैनीताल जिले (UK-04) की चारपहिया गाड़ियां: 200 रुपये
- अन्य जिलों और राज्यों की चारपहिया एवं बड़े वाहन:300 रुपये
- स्थानीय निवासी: 800 रुपये देकर वार्षिक पास बनवा सकेंगे.

यानी यदि कोई नैनीताल निवासी पढ़ाई या नौकरी के कारण किसी दूसरे शहर में रहता है और वहां के नंबर का वाहन लेकर अपने घर आता है तो उसे भी एंट्री शुल्क देना पड़ सकता है. यही बात लोगों की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह बन रही है.
अपने ही शहर लौटने के लिए भी टैक्स
स्थानीय लोगों का कहना है कि नैनीताल के हजारों छात्र और नौकरीपेशा लोग देहरादून, हल्द्वानी, दिल्ली, नोएडा, चंडीगढ़ और दूसरे शहरों में रहते हैं. उन्होंने वहीं अपने वाहन खरीदे हैं. अब जब वे छुट्टियों में अपने घर आएंगे तो उन्हें हर बार एंट्री टैक्स देना होगा. लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या अपने ही शहर लौटने की भी कीमत चुकानी पड़ेगी?
पहले भी हुआ था विरोध
नगर प्रवेश शुल्क का ठेका दिए जाने को लेकर विवाद पहले से ही चल रहा था. जानकारी के अनुसार, नगर पालिका की ओर से 21 महीने के लिए चुंगी वसूली का ठेका गाजियाबाद की कंपनी एमजी इंफ्रा को दिए जाने की जानकारी मिलते ही कई सभासदों ने विरोध शुरू कर दिया था. सभासद जितेंद्र पांडेय के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन भी हुआ. विरोध के बाद नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. सरस्वती खेतवाल ने कथित तौर पर लिखित आश्वासन दिया था कि बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित हुए बिना ठेका नहीं दिया जाएगा. बताया गया कि बोर्ड बैठक 18 जुलाई को प्रस्तावित थी, लेकिन आरोप है कि 16 जुलाई को ही ठेका जारी कर दिया गया. इसी को लेकर भी विवाद बढ़ गया है.
नैनीताल पूरी तरह पर्यटन पर आधारित शहर है. यहां हर साल लाखों पर्यटक पहुंचते हैं. स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि पहले से ही पर्यटकों को पार्किंग शुल्क, ग्रीन टैक्स और अन्य खर्च उठाने पड़ते हैं. अब एंट्री टैक्स बढ़ने से कई लोग नैनीताल आने से बच सकते हैं. व्यापारियों का मानना है कि इससे स्थानीय होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी और छोटे कारोबार प्रभावित हो सकते हैं.
पालिका अध्यक्ष ने क्या कहा
विवाद बढ़ने के बाद नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. सरस्वती खेतवाल ने कहा कि फिलहाल वह शहर से बाहर हैं. उन्होंने बताया कि मामले की जानकारी मिलने के बाद अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अभी दोपहिया वाहनों से शुल्क न वसूला जाए. उन्होंने कहा कि शुक्रवार को नगर पालिका पहुंचकर अधिकारियों के साथ पूरे मामले की समीक्षा की जाएगी. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोपहिया वाहनों से शुल्क वसूली का प्रस्ताव पहले ही गजट में प्रकाशित हो चुका है.