उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. पुलिस ने खुद को कभी वरिष्ठ IPS अधिकारी, कभी सैन्य अधिकारी और कभी रॉ तथा एनआईए जैसी केंद्रीय एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों से कथित तौर पर ठगी करने वाले एक आरोपी को दिल्ली से गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान यशोवर्धन के रूप में हुई है, जो उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव एस. रामास्वामी का बेटा है. आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर देहरादून लाकर पूछताछ की जा रही है.
पुलिस के मुताबिक, यशोवर्धन लोगों का भरोसा जीतने के लिए अलग-अलग सरकारी अधिकारियों की फर्जी पहचान बनाता था. वह कभी खुद को वरिष्ठ IPS अधिकारी बताता था तो कभी वरिष्ठ सैन्य अधिकारी. कई मामलों में वह रॉ, एनआईए और अन्य केंद्रीय एजेंसियों का अधिकारी होने का दावा भी करता था. लोगों को भरोसा दिलाने के लिए वह फर्जी पहचान पत्र, विजिटिंग कार्ड और वर्दी का भी इस्तेमाल करता था.
पुलिस का कहना है कि आरोपी लोगों को नौकरी दिलाने, सरकारी काम जल्दी कराने, टेंडर पास कराने और निवेश पर अच्छा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर उनसे रुपये लेता था. इसी तरह की शिकायतों के आधार पर राजपुर थाने में उसके खिलाफ दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए. पहली शिकायत 8 जुलाई को अंकुल उपाध्याय ने दर्ज कराई. शिकायत के अनुसार, आरोपी ने खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए एक कंपनी का पंजीकरण जल्दी कराने का भरोसा दिया और इस नाम पर 15 लाख रुपये ले लिए.
फर्जी आईडी, विजिटिंग कार्ड और वर्दी से जीतता था लोगों का भरोसा
दूसरी शिकायत 15 जुलाई को डॉ. अनुपा ने दर्ज कराई. उन्होंने आरोप लगाया कि यशोवर्धन ने खुद को IPS अधिकारी बताया और फर्जी पहचान पत्र तथा विजिटिंग कार्ड दिखाए. इसके बाद अंतरराष्ट्रीय साइंस कंसल्टेंट के पद पर नियुक्ति दिलाने का झांसा देकर उनसे 4 लाख 60 हजार रुपये ले लिए. मामले की गंभीरता को देखते हुए देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष टीम बनाई गई. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और अन्य तकनीकी जानकारी के आधार पर आरोपी की तलाश शुरू की. जांच के दौरान उसकी लोकेशन दिल्ली में मिली.
इसके बाद पुलिस टीम ने 16 जुलाई को दिल्ली के सीआरपीएफ तिराहा, मसूरी रोड क्षेत्र से यशोवर्धन को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर देहरादून लाया गया, जहां उससे लगातार पूछताछ की जा रही है. पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसके पिता एक वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारी हैं. बचपन से उसका सपना भी प्रशासनिक अधिकारी बनने का था. उसने कई वर्षों तक UPSC परीक्षा की तैयारी की, लेकिन सफलता नहीं मिली. पुलिस के अनुसार, इसी के बाद उसने फर्जी अधिकारी बनकर लोगों को ठगने का रास्ता अपनाया.
पुलिस का कहना है कि आरोपी लंबे समय से इस तरह की गतिविधियों में शामिल था. अब यह भी जांच की जा रही है कि उसने किन-किन लोगों को अपना शिकार बनाया और उसके खिलाफ अन्य राज्यों में भी कोई मामला दर्ज है या नहीं. यशोवर्धन का नाम इससे पहले भी एक विवाद में सामने आ चुका है. नवंबर 2025 में पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन और उनके साथियों पर यशोवर्धन की कार रोककर मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगा था.
पुलिस अब अन्य मामलों और पीड़ितों की भी कर रही जांच
आरोप था कि 14 नवंबर की रात पैसिफिक मॉल के पास उनकी कार को ओवरटेक कर मसूरी डायवर्जन के निकट रोका गया और वहां उनके साथ गाली-गलौज तथा मारपीट की गई. हालांकि उस समय दिव्य प्रताप ने स्पष्ट किया था कि कार में बैठी सवारी के साथ कोई मारपीट नहीं हुई थी. फिलहाल देहरादून पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने फर्जी पहचान के जरिए कितने लोगों से ठगी की और इस पूरे नेटवर्क में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं.