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'बबीता को परियां ले गईं...', ट्रैकिंग पर गई MBA छात्रा कहां है? 19 दिनों से लापता

उत्तराखंड के दयारा बुग्याल क्षेत्र से लापता बबीता पांडे को 19 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है. पुलिस और प्रशासन लगातार सर्च अभियान चला रहे हैं. अब जांच का फोकस तकनीकी पहलुओं जैसे मोबाइल सर्विलांस और कॉल डिटेल रिकॉर्ड पर है. साथ ही स्थानीय स्तर पर कुछ मान्यताओं को लेकर भी चर्चा हो रही है.

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19 दिन बाद भी बबीता पांडे का कोई सुराग नहीं मिला. (Photo: ITG)
19 दिन बाद भी बबीता पांडे का कोई सुराग नहीं मिला. (Photo: ITG)

उत्तराखंड के दयारा बुग्याल क्षेत्र से लापता बबीता पांडे के मामले में 19 दिन बीत जाने के बाद भी कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है. लगातार चल रहे सर्च अभियान के बावजूद पुलिस और प्रशासन अब तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सके हैं. इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और परिजनों की चिंता बढ़ा दी है. शुरुआती दिनों में इस मामले में व्यापक स्तर पर भौतिक खोज अभियान चलाया गया था. पुलिस, प्रशासन और अन्य एजेंसियों ने क्षेत्र में कई जगहों पर सर्च ऑपरेशन किया, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली. इसके बाद अब जांच का फोकस तकनीकी पहलुओं की ओर बढ़ा दिया गया है.

पुलिस अधिकारियों के अनुसार अब इस मामले में मोबाइल सर्विलांस, कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी सीडीआर और अन्य तकनीकी माध्यमों की मदद ली जा रही है. इसका उद्देश्य घटनाक्रम को समझना और किसी संभावित सुराग तक पहुंचना है. डिप्टी एसपी ने बताया कि जांच कई स्तरों पर चल रही है और हर उपलब्ध सूचना का बारीकी से परीक्षण किया जा रहा है.

अधिकारियों का कहना है कि सभी संभावित एंगल से मामले की जांच की जा रही है ताकि किसी भी महत्वपूर्ण जानकारी को नजरअंदाज न किया जाए. पुलिस टीम लगातार क्षेत्र में सक्रिय है और साक्ष्य जुटाने की कोशिश कर रही है. इस बीच घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग तरह की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं. पहाड़ी क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही कुछ पौराणिक मान्यताओं के आधार पर कुछ लोग यह चर्चा कर रहे हैं कि कहीं बबीता पांडे को परियों द्वारा तो नहीं ले जाया गया.

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रेस्क्यू टीमों का संयुक्त सर्च ऑपरेशन लगातार जारी

हालांकि इस तरह की मान्यताओं को लेकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आधुनिक जांच पद्धतियां इन्हें प्रमाणित नहीं मानती हैं. विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में अफवाहों से बचना और तथ्य आधारित जांच पर भरोसा करना जरूरी होता है. स्थानीय निवासी और ट्रैकर माधव जोशी ने इस विषय पर बातचीत करते हुए कहा कि पहाड़ों में लोककथाएं और पारंपरिक मान्यताएं अपनी जगह रखती हैं, लेकिन किसी व्यक्ति के लापता होने जैसी गंभीर घटना को केवल इन्हीं मान्यताओं के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए.

मोबाइल सर्विलांस और CDR के जरिए कड़ियां जोड़ने की कोशिश

उन्होंने कहा कि दयारा और आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय से ट्रैकिंग गतिविधियां होती रही हैं और इस तरह की घटनाओं को वैज्ञानिक जांच, परिस्थितियों और तथ्यों के आधार पर समझना चाहिए. माधव जोशी ने परियों द्वारा बबीता पांडे के हरण की संभावना को भी खारिज किया और कहा कि ऐसे समय में अफवाहों से बचना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि जांच एजेंसियों को अपना काम करने देना चाहिए और किसी भी तरह की अपुष्ट जानकारी पर ध्यान नहीं देना चाहिए. फिलहाल बबीता पांडे की तलाश और जांच दोनों जारी हैं. पुलिस और प्रशासन की टीम लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग सामने नहीं आया है. परिजन अब भी किसी सकारात्मक खबर की उम्मीद में हैं और पूरे मामले पर सभी की नजर बनी हुई है.
 

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