दिल्ली हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता नारायण दत्त तिवारी के खिलाफ पितृत्व मामले में स्वास्थ्य आधार पर उनसे जिरह को टालने की उनकी याचिका को सोमवार को खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि तिवारी सार्वजनिक रूप से सक्रिय हैं. अदालत ने उन्हें मंगलवार तय समयानुसार बयान देने के लिए आने का निर्देश दिया.
जिरह को आठ सप्ताह के लिए टालने की 88 वर्षीय तिवारी की अर्जी को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति विपिन सांघी ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि तिवारी को दिये गये अंतिम मौके का फायदा उन्होंने स्थगन के लिए आवेदन करके उठाया है और उसका दुरुपयोग किया है.’ अदालत ने यह भी कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अपनी इस उम्र में अच्छी तरह सक्रिय हैं और सेहत के लिहाज से आपात स्थिति नहीं है. अदालत ने उन्हें निर्देश दिया कि वह दिल्ली आएं और मंगलवार को तय समय पर स्थानीय आयुक्त के समक्ष बयान दें. ऐसा नहीं होने पर साक्ष्य रखने का उनका अधिकार समाप्त हो जाएगा.
अदालत ने खारिज की तिवारी की दलील अदालत ने तिवारी की इस दलील को खारिज कर दिया कि उन्हें स्वास्थ्य कारणों से अधिक कार्य नहीं करने और यात्रा नहीं करने की सलाह दी गयी है. न्यायाधीश ने कहा, ‘अगर वह मंगलवार को नहीं आते तो साक्ष्य रखने का उनका अधिकार समाप्त हो जाएगा.’ तिवारी का पुत्र होने का दावा करने वाले 32 वर्षीय रोहित शेखर की ओर से वकील वेदांत वर्मा की इस दलील को अदालत ने मंजूर कर लिया कि तिवारी सक्रियता से सार्वजनिक समारोहों में शिरकत कर रहे हैं लेकिन अदालत में आने से बच रहे हैं.
'बिल्कुल फिट हैं तिवारी' बीते 24 सितंबर को जारी तिवारी के चिकित्सा प्रमाणपत्र और उसी दिन की खबरों का जिक्र करते हुए वर्मा ने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता को उसी दिन एक सार्वजनिक समारोह में एक युवती के साथ थिरकते देखा गया था.
अदालत ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि तिवारी सार्वजनिक रूप से सक्रिय हैं. वह धरने तक पर बैठे. वह इससे इनकार नहीं कर सकते और वह दिल्ली तक आकर स्थानीय आयुक्त के समक्ष बयान देने की स्थिति में हैं.’ तिवारी ने अपने आवेदन में उनसे होने वाली पूछताछ को स्थगित करने की मांग करते हुए कहा था कि वह अपनी दिल संबंधी बीमारी के चल रहे इलाज के कारण लखनऊ से दिल्ली की यात्रा करने में सक्षम नहीं हैं.
शेखर के दावे को खारिज करते हैं तिवारी तिवारी का कहना है कि वह रोहित शेखर के पिता नहीं है, लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें अपने इस दावे के पक्ष में सुबूत पेश करने से भी रोक दिया था. वह इस मामले को अदालत के बाहर निपटाने से भी अब तक इनकार करते रहे हैं. उनका कहना है कि चिकित्सीय साक्ष्यों के 100 फीसदी सही नहीं होने की भी संभावना रहती है.
इस मामले में पिछले वर्ष 27 जुलाई को हाईकोर्ट में पेश डीएनए रिपोर्ट के मुताबिक, तिवारी को ही शेखर का जैविक पिता बताया गया था.
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तिवारी ने 29 मई को देहरादून स्थित अपने आवास पर रक्त का नमूना दिया था.
गौरतलब है कि वर्ष 2008 में शेखर ने एक याचिका दायर कर दावा किया था कि वयोवृद्ध कांग्रेस नेता तिवारी ही उसके जैविक पिता है, हालांकि तिवारी उसके इस दावे को खारिज करते रहे हैं.