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राज्यसभा की चाहत बनी खटास की वजह, कमलनाथ को रोकने की कोशिश भी नहीं करेगी कांग्रेस!

कमलनाथ और नकुलनाथ दिल्ली पहुंच चुके हैं. वहीं कमलनाथ के दिल्ली स्थित आवास की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है. चर्चाएं तेज हैं कि कमलनाथ के बीजेपी में शामिल होने की पटकथा लिखी जा चुकी है. बस इसे अमलीजामा पहनाना बाकी है. ऐसे में सवाल भी उठ रहे हैं कि ऐसा क्या हुआ कि इंदिरा गांधी ने जिसे अपना तीसरा बेटा बताया था, वो कमलनाथ अचानक बीजेपी में क्यों जाने वाले हैं?

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कांग्रेस के कद्दावर नेता कमलनाथ के बीजेपी में शामिल होने की अटकलें तेज हैं
कांग्रेस के कद्दावर नेता कमलनाथ के बीजेपी में शामिल होने की अटकलें तेज हैं

कांग्रेस को एक के बाद एक बड़े झटके लग रहे हैं. पिछले कुछ महीनों में कई दिग्गज नेता पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए हैं. अब कमलनाथ और उनके बेटे नकुल समेत कई कांग्रेसी नेता कमल के साथ हो सकते हैं. सियासी गलियारों में चर्चा है कि कमलनाथ अपने बेटे नकुल और मध्य प्रदेश के करीब एक दर्जन विधायक व पूर्व विधायकों के साथ बीजेपी का दामन थामेंगे. उधर, इन अटकलों के बीच कांग्रेस नेतृत्व ने कमलनाथ से किसी तरह का संपर्क नहीं साधा है. यानी पार्टी की तरफ से कमलनाथ को रोकने के लिए किसी तरह का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है.

इस कड़ी में कमलनाथ और नकुलनाथ दिल्ली पहुंच चुके हैं. वहीं कमलनाथ के दिल्ली स्थित आवास की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है. चर्चाएं तेज हैं कि कमलनाथ के बीजेपी में शामिल होने की पटकथा लिखी जा चुकी है. बस इसे अमलीजामा पहनाना बाकी है. ऐसे में सवाल भी उठ रहे हैं कि ऐसा क्या हुआ कि इंदिरा गांधी ने जिसे अपना तीसरा बेटा बताया था, वो कमलनाथ अचानक बीजेपी में क्यों जाने वाले हैं?

इसके पीछे सबसे बड़ा कारण राज्यसभा की चाहत बताई जा रही है, जिसे कांग्रेस ने पूरा नहीं किया और कमलनाथ का नाम राज्यसभा के लिए प्रस्तावित नहीं किया. सूत्रों की मानें तो इसी के चलते कमलनाथ पार्टी से नाराज हो गए और पार्टी छोड़ने जैसा बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं. वहीं एक और कारण ये भी बताया जा रहा है कि कमलनाथ अपने बेटे नकुल के लिए राजनीतिक भविष्य की तलाश के चलते भी बीजेपी का दामन थाम सकते हैं. कारण, पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में नकुल कड़ी मशक्कत के साथ जीत दर्ज कर सके. ऐसे में कमलनाथ चाहते हैं कि उनके बेटे को बीजेपी में बड़ी जिम्मेदारी मिले.

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कांग्रेस ने कमलनाथ को दिए कई मौके

सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि मुख्यमंत्री के रूप में सिंधिया की जगह कमलनाथ को चुना गया था, लेकिन वह सरकार संभाल नहीं सके और उनकी जिद के चलते विधायक टूटकर बीजेपी में चले गए. परिणामस्वरूप सरकार गिर गई और शिवराज सिंह ने सरकार बनाई. इसके बाद उन्हें पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में दोबारा मौका दिया गया. उनके चेहरे पर चुनाव लड़ा गया. लेकिन पार्टी को नुकसान ही उठाना पड़ा और करारी हार मिली. चुनाव से पहले 

कमलनाथ ने विधानसभा चुनाव में लिए एकतरफा फैसले

कमलनाथ ने दिल्ली से भेजे गए किसी भी पार्टी नेता के साथ कॉरपोरेट करने से इनकार कर दिया. उन्होंने वरिष्ठ नेता जेपी अग्रवाल को अलग कर दिया था, क्योंकि कमलनाथ उन्हें प्रभारी के रूप में नहीं चाहते थे और उनके साथ काम करने से इनकार कर दिया था. रणदीप सुरजेवाला को कार्यभार सौंपा गया था, लेकिन जहां तक विधानसभा चुनावों में टिकट वितरण और प्रचार का सवाल है, कमलनाथ ने एक बार फिर एकतरफा फैसले लेना जारी रखा.  

राज्यसभा के लिए कमलनाथ ने किए कई प्रयास

इसके बाद विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा. चुनाव हारने के बाद कमलनाथ राज्यसभा का टिकट चाहते थे और इसको लेकर उन्होंने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की. यहां तक कि कमलनाथ ने अपने नामांकन का समर्थन करने के लिए विधायकों से भी मुलाकात की, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने फिर भी उन्हें राज्यसभा नहीं भेजा.

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