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दतिया में क्या रही हार की वजह... समीक्षा के लिए BJP ने बनाई कमेटी

भारतीय जनता पार्टी ने दतिया विधानसभा उपचुनाव के परिणामों की समीक्षा के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन किया है.

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इस उपचुनाव में सीएम मोहन यादव और नरोत्तम मिश्रा खुद प्रचार के लिए मैदान में उतरे थे. (Photo: X/ @drnarottammisra)
इस उपचुनाव में सीएम मोहन यादव और नरोत्तम मिश्रा खुद प्रचार के लिए मैदान में उतरे थे. (Photo: X/ @drnarottammisra)

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दतिया विधानसभा उपचुनाव के परिणामों की समीक्षा के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन किया है. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और विधायक हेमंत खंडेलवाल ने इस समिति के गठन की घोषणा की. समिति में प्रदेश महामंत्री गौरव रणदीवे और वरिष्ठ नेता अंबाराम कराड़ा को सदस्य बनाया गया है.

भाजपा के अनुसार, यह समिति उपचुनाव से जुड़े जिम्मेदार पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ नेताओं से चर्चा कर चुनाव परिणामों का विस्तृत विश्लेषण करेगी. साथ ही हार या अपेक्षित प्रदर्शन नहीं होने के कारणों का आकलन भी करेगी. समिति अपनी जांच और समीक्षा पूरी करने के बाद निष्कर्षों सहित विस्तृत रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को सौंपेगी. पार्टी नेतृत्व इस रिपोर्ट के आधार पर भविष्य की रणनीति और संगठनात्मक सुधारों पर फैसला ले सकता है.

दतिया सीट पर उपचुनाव राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता रद्द होने के बाद कराया गया था. धोखाधड़ी के एक मामले में दिल्ली की अदालत से सजा मिलने के बाद उनकी विधायकी चली गई थी. इसके बाद खाली हुई सीट पर 30 जुलाई को मतदान हुआ. कांग्रेस ने इस बार भी घनश्याम सिंह को मैदान में उतारा, जबकि बीजेपी ने नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया.

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सियासी गलियारों में हार की चर्चा

2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने नरोत्तम मिश्रा को हराया था. इसके बाद उपचुनाव में बीजेपी ने अपने पुराने चेहरे पर भरोसा जताने के बजाय नया उम्मीदवार उतारा. पार्टी को उम्मीद थी कि आशुतोष तिवारी के जरिए वह सीट वापस हासिल कर लेगी, लेकिन नतीजा उसके पक्ष में नहीं आया.ऐसे में अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या उम्मीदवार बदलने का फैसला बीजेपी के लिए नुकसानदायक साबित हुआ. हालांकि, नरोत्तम मिश्रा ने चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी उम्मीदवार के समर्थन में हिस्सा लिया था.

अपने मजबूत बूथ पर भी पीछे रही BJP

दतिया उपचुनाव में एक आंकड़े की काफी चर्चा हो रही है. नरोत्तम मिश्रा के बूथ नंबर-121 पर भी बीजेपी पीछे रही. यहां कांग्रेस को 291 वोट मिले, जबकि बीजेपी को 264 वोट मिले. इस नतीजे ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या बीजेपी अपने पुराने समर्थकों को पूरी तरह एकजुट नहीं कर पाई. चुनाव के नतीजे आने के बाद भीतरघात की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं. राजनीतिक विश्लेषक रिजवान अहमद सिद्दीकी का मानना है कि टिकट बदलना हार की एक बड़ी वजह रहा है.

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