जोसेफ विजय की अगुवाई वाली तमिलनाडु सरकार ने चेन्नई के पास परंदूर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को आगे न बढ़ाने का फैसला किया है. सरकार का कहना है कि अधिग्रहित जमीन का एक बड़ा हिस्सा रनवे बनाने के लिए सही नहीं है, क्योंकि वहां बहुत सारे जलाशय हैं. सरकार ने कहा है कि वह चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट के लिए कोई दूसरी जगह तलाशेगी.
परियोजना को रद्द करने के सरकारी फैसले की जानकारी देते हुए उद्योग मंत्री निर्मल कुमार ने स्पष्ट किया कि इस ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए चिन्हित की गई जमीन का एक बड़ा हिस्सा एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बिल्कुल भी सही नहीं था.
उन्होंने बताया कि लगभग 800 से 900 एकड़ जमीन पूरी तरह से जलाशयों से घिरी हुई थी जो कि एक जल निकाय की तरह होने के कारण वहां मजबूत रनवे का निर्माण करना संभव नहीं था.
तलाशी जाएगी एयरपोर्ट के लिए जमीन
निर्मल कुमार ने कहा कि सरकार प्रस्तावित एयरपोर्ट के लिए चेन्नई और उसके आस-पास कोई दूसरी जगह तलाशना शुरू करेगी. साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि फैसला लेने की प्रक्रिया में पर्यावरण से जुड़ी बातों को प्राथमिकता दी जाएगी.
हालांकि, इस फैसले से उन निवासियों के बीच भारी अनिश्चितता पैदा हो गई है, जिनकी जमीनें पिछली सरकार के दौरान 'टिडको' (TIDCO) द्वारा पहले ही अधिग्रहित की जा चुकी थीं. अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि इस जमीन का भविष्य क्या होगा और क्या प्रभावित भू-स्वामियों को कोई बहाली उपाय या राहत मिलेगी.
इस फैसले ने मुख्यमंत्री विजय को एक मुश्किल स्थिति में डाल दिया है. एक तरफ उन्हें प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे ग्रामीणों से किए गए वादे को निभाना है तो दूसरी तरफ चेन्नई में आर्थिक विकास और भविष्य के निवेश के लिए एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार की बढ़ती जरूरत को भी पूरा करना है. उम्मीद है कि चेन्नई का मौजूदा एयरपोर्ट 2035 तक अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच जाएगा.
'हमने परंदूर को सोच-समझ कर चुना'
सीएम के इस फैसला की विपक्षी पार्टी DMK ने कड़ी आलोचना की है और TVK सरकार पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को छोड़ने का आरोप लगाया है. DMK के प्रवक्ता ए. सरवनन ने कहा कि परंदूर को कई संभावित जगहों के गहन अध्ययन और मूल्यांकन के बाद ही चुना गया था.
सरवनन ने कहा, 'ये एयरपोर्ट बहुत जरूरी है. हमने परंदूर को बिना सोचे-समझे नहीं चुना था. यह एयरपोर्ट के लिए सबसे अच्छी जगह है. विकास के लिए कुछ कीमत चुकानी पड़ती है. TVK अपने अहंकार और विरोध के कारण इसे रोक रही है.'
2022 में हुआ था प्रोजेक्ट का ऐलान
दरअसल, तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने साल 2022 में 4,970 एकड़ के इस प्रस्तावित एयरपोर्ट प्रोजेक्ट का ऐलान किया था. एयरपोर्ट का ऐलान होने के बाद से ही लगातार विरोध हो रहा था. स्थानीय किसान और पर्यावरण कार्यकर्ता परिवारों के बड़े पैमाने पर विस्थापन और इलाके में वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) के नष्ट होने का विरोध कर रहे थे. अब परंदूर एयरपोर्ट प्लान को रद्द करने के फैसले से इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और पर्यावरण संरक्षण व स्थानीय चिंताओं के बीच संतुलन बनाने पर बहस फिर से शुरू होने की संभावना है. सरकार ने चेन्नई के लिए दूसरा एयरपोर्ट बनाने के अपने वादे को फिर से दोहराया है, लेकिन अभी ये साफ नहीं है कि इसके लिए वैकल्पिक जगह कहां चुनी जाएगी और इस प्रोजेक्ट को कितनी तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा.