सुरेन्द्र कोली की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है. इससे मौत की वजह साफ हो गई है. रिपोर्ट में सुसाइड को ही मौत की वजह माना गया है. कोली निठारी हत्याकांड का मुख्य आरोपी था और पिछले साल उसे सभी 13 मामलों में बरी कर दिया गया था.
18 सितंबर को हरिद्वार में चाय की दुकान में सुरेंद्र कोली का शव फंदे से लटका मिला था. शुरुआती तौर पर इसे सुसाइड ही माना गया था लेकिन परिवार ने इसपर शक जताया था. इस वजह से पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार था.
अब बुधवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई है. इसमें लिखा है, 'हमारी राय में मौत की वजह मरने से पहले फांसी लगने के कारण दम घुटना (asphyxia) है.'
इसे आसान शब्दों में ऐसे समझ सकते हैं कि दस्तावेज में दर्ज मेडिकल राय यह कहती है व्यक्ति की मौत दम घुटने (ऑक्सीजन की कमी) से हुई, जो मरने से पहले फांसी लगने के कारण हुआ था.
एक पुलिस अधिकारी ने बताया था कि कोली के शरीर पर चोट का कोई निशान नहीं मिला था. हालांकि, उसकी नाक और मुंह के पास खून के निशान दिखे थे.
पुलिस ने बताया कि कोली ने हरिद्वार के सप्तऋषि इलाके में एक छोटी सी किराए की दुकान में चाय बेचना शुरू किया था. वहां मृत पाए जाने से सिर्फ चार दिन पहले ही उसने यह काम शुरू किया था.
पुलिस ने बताया था कि वह आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव से जूझ रहा था और दुकान शुरू करने के लिए उसने ₹5,000 उधार लिए थे.
पुलिस घटनास्थल और आसपास के इलाकों के CCTV फुटेज खंगाल रही थी लेकिन कोई संदिग्ध गतिविधि सामने नहीं आई थी.
पुलिस ने बताया था कि कोली बहुत मुश्किल हालात में रह रहा था और हरिद्वार में कम समय में ही उसे चार बार कमरे बदलने पड़े थे.
पुलिस अधिकारी ने बताया था कि वह अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था और उसे बार-बार नौकरी छोड़नी पड़ती थी क्योंकि वह आधार कार्ड नहीं दे पाता था या पुलिस वेरिफिकेशन नहीं करवा पाता था.
कोली करीब एक महीने पहले हरिद्वार आया था. हरिद्वार आने से पहले वह कुछ वकीलों के साथ और बेंगलुरु के एक चर्च में भी रहा था.
अधिकारी ने यह भी दावा किया कि जो परिवार वाले अब उसकी मौत पर सवाल उठा रहे हैं, उन्होंने पहले कोली को अपने साथ रखने से इनकार कर दिया था.
सुरेंद्र कोली के परिवार ने कहा था - उच्च स्तरीय जांच हो
सुरेंद्र कोली के परिवारवालों ने कहा था कि जिस व्यक्ति ने 19 साल सामाजिक तिरस्कार और कानूनी उलझनों में निकाले हों और वह अचानक इस तरह का कदम उठाए तो संदेह तो होता ही है. परिजनों के परिचित नारायण सिंह रावत ने कोली की आत्महत्या पर शक जताते हुए इसे साजिश बताया और उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी.
निठारी कांड क्या था
निठारी मामला 2006 में तब सामने आया जब नोएडा के सेक्टर 31 में बिजनेसमैन मोनिंदर सिंह पंढेर के बंगले के पिछवाड़े और नालियों में कंकाल, खोपड़ियां और हड्डियां मिलीं. कोली पंढेर के घर पर घरेलू नौकर के तौर पर काम करता था.
इस भयानक खुलासे से कई बच्चों और महिलाओं के गायब होने और उनकी हत्या का पता चला, जिससे देश भर में गुस्सा फैल गया और स्थानीय समुदाय में दहशत फैल गई.
इस मामले में सह-आरोपी पंढेर भी कई सालों तक जेल में रहा, लेकिन बरी होने के बाद 20 अक्टूबर 2023 को उसे रिहा कर दिया गया.
कोली, जो एकमात्र दोषी था, उसे सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में आखिरी मामले में बरी कर दिया. निठारी हत्याकांड से जुड़े यह 13वां मामला था जिसमें कोली को बरी किया गया. इससे पहले उसे इसी तरह के 12 अन्य मामलों में बरी किया जा चुका था.