निठारी कांड (Nithari Serial Murder Case) देश के चर्चित आपराधिक मामलों में से एक रहा है. वर्ष 2005 और 2006 के दौरान उत्तर प्रदेश के नोएडा के सेक्टर-31 स्थित डी-5 मकान के आसपास कई बच्चे और एक युवती लापता हुए. यह मकान कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर का था, जहां सुरेंद्र कोली घरेलू हेल्पर के तौर पर काम करता था.
दिसंबर 2006 में निठारी गांव के दो निवासियों ने दावा किया कि उन्हें लापता बच्चों के अवशेष D-5 मकान के पीछे बने पानी के टैंक के पास होने की जानकारी है. दोनों व्यक्तियों की बेटियां भी लापता थीं. उन्होंने इस बारे में स्थानीय स्तर पर मदद मांगी. इसके बाद पूर्व आरडब्ल्यूए अध्यक्ष एससी मिश्रा के साथ इलाके में तलाश की गई. तलाशी के दौरान कथित तौर पर मानव शरीर का एक हिस्सा मिलने के बाद पुलिस को सूचना दी गई.
जांच के दौरान सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को हिरासत में लिया गया. कोली और पंढ़ेर पर अलग-अलग मामलों में मुकदमे चले. दोनों को कुछ मामलों में दोषी ठहराया गया और मौत की सजा सुनाई गई. बाद में इन फैसलों के खिलाफ अपील की गई.
16 अक्टूबर 2023 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दोनों को कई मामलों में बरी कर दिया. अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष दोष साबित करने के लिए पर्याप्त और भरोसेमंद सबूत पेश नहीं कर सका.
नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को बचे हुए अंतिम मामले में भी बरी कर दिया. इसके बाद उसे जेल से रिहा कर दिया गया. इस फैसले के साथ निठारी मामले में कोली के खिलाफ चल रही आखिरी कानूनी कार्यवाही भी समाप्त हो गई.
18 सितंबर 2026 को सुरेंद्र कोली ने खुदकुशी कर ली. इस वक्त वह हरिद्वार में रहता था (Surendra Koli Commits Suicide).
निठारी कांड पर कई फिल्म और टीवी प्रोजेक्ट में भी चर्चा हुई है. वर्ष 2024 में नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई फिल्म सेक्टर 36 इस मामले से प्रेरित बताई गई. यह मामला आज भी पुलिस जांच, लापता बच्चों की शिकायतों और आपराधिक मामलों में सबूतों की भूमिका को लेकर चर्चा में बना हुआ है.
निठारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की मौत की वजह अब साफ हो गई है. हरिद्वार में चाय की दुकान पर फंदे से लटके मिले कोली की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह फांसी लगने से दम घुटना बताई गई है. परिवार ने मौत पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा था.
निठारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की मौत को चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन वजह अब भी साफ नहीं है. हरिद्वार में चाय की दुकान के अंदर उसका शव पंखे से लटका मिला था. पुलिस इसे शुरुआती तौर पर आत्महत्या मान रही है, जबकि परिवार ने सवाल उठाते हुए साजिश की आशंका जताई है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से तस्वीर साफ होने की उम्मीद है.
निठारी कांड के मुख्य आरोपी रहे सुरेंद्र कोली का शनिवार को हरिद्वार के खड़खड़ी श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया. शुक्रवार को वह अपनी चाय की दुकान में फंदे से लटका मिला था. पुलिस प्रथम दृष्टया आत्महत्या मानकर जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है. कोली पिछले चार-पांच महीनों से पहचान छिपाकर हरिद्वार में रह रहा था.
निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली को सभी 13 मामलों में बरी किया गया था और वह 11 नवंबर 2025 को लुक्सर जेल से रिहा हुआ था. शुक्रवार को हरिद्वार में एक चाय की दुकान पर वह फंदे से लटका मिला. लुक्सर जेल के अधीक्षक ब्रजेश सिंह के मुताबिक जेल में उसका व्यवहार सामान्य रहा.
निठारी कांड के सभी 13 मामलों में बरी होकर जेल से रिहा हुए सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत हो गई. वह शुक्रवार को एक चाय की दुकान पर फंदे से लटका मिला. जेल अधीक्षक के अनुसार, जेल में उसका व्यवहार सामान्य था. वहीं पीड़ित परिवार ने हत्या का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है. कोली नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जेल से बाहर आया था.
देश को झकझोर देने वाले निठारी कांड का मुख्य आरोपी रहे सुरेंद्र कोली ने आत्महत्या कर ली. जो फंदा उसे कभी कानून नहीं पहना सका आखिरकार जेल से रिहाई के ठीक 10 महीने और 5 दिन बाद सुरेंद्र कोली ने अपने हाथों से पहन लिया. हरिद्वार में चाय की दुकान के अंदर सुरेंद्र कोली ने फांसी लगा कर अपनी जान दे दी. देखें वारदात.
नोएडा के चर्चित निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली ने उत्तराखंड के हरिद्वार में कथित तौर पर खुदकुशी कर ली. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने उसे इस मामले में बरी कर दिया था, जिसके बाद वह हरिद्वार में रहने लगा था. जानकारी के अनुसार, कोली हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में लाल माता मंदिर के पास एक छोटी सी चाय की दुकान चला रहा था और उसी दुकान में फांसी के फंदे से उसका शव लटका हुआ मिला.
2014 में सुरेंद्र कोली को फांसी होने ही वाली थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आधी रात को एक फ़ैसला सुनाकर उसकी फांसी पर रोक लगा दी. लगभग 19 साल जेल में रहने के बाद उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया गया, लेकिन आज़ाद होने के एक साल से भी कम समय बाद वह हरिद्वार में अपनी चाय की दुकान पर लटका हुआ मिला.
निठारी कांड से जुड़े सुरेंद्र कोली को 2014 में मेरठ जेल में फांसी दी जानी थी. जल्लाद बुलाया गया था और तैयारी पूरी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आधी रात को फांसी पर रोक लगा दी. करीब 19 साल जेल में रहने के बाद 2025 में वह बरी हुआ था.
हरिद्वार में सदाराम के नाम से रह रहे व्यक्ति की पहचान निठारी कांड से जुड़े सुरेंद्र कोली के रूप में हुई. तीन दिन पहले उसने भूपतवाला में चाय की दुकान शुरू की थी. शुक्रवार सुबह दुकान के अंदर उसका शव मिला. पुलिस घटना की वजह की जांच कर रही है.
क्या था निठारी कांड? कौन था सुरेंद्र कोली? कैसे सामने आया था यह मामला? साल 2005 से 2025 तक की तारीखवार जानें इस मामले की सिलसिलेवार कहानी और सुप्रीम कोर्ट के आखिरी फैसले की पूरी जानकारी.
नोएडा के निठारी कांड ने देश भर में सुर्खियां बटोरी थी. साल 2005-2006 में दिल्ली से सटे नोएडा के निठारी गांव में कई बच्चों और युवतियों के गायब होने की घटनाएं हुईं. पुलिस जांच में जब नाले से मानव अंगों के मिलने की खबरें आई तो लोग चौंक उठे.
हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की मौत हो गई. पुलिस के मुताबिक, कोली ने चाय की दुकान पर फांसी लगाकर जान दी. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की. कोली हाल ही में निठारी कांड से जुड़े मामलों में बरी हुआ था. पुलिस अब उसकी मौत से जुड़े हालात की पड़ताल कर रही है.
निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में आत्महत्या की खबर सामने आई है. भूपतवाला इलाके में चाय का खोखा चला रहे कोली का शव फांसी के फंदे पर मिला. एसएचओ कुंदन सिंह राणा ने बताया कि मौके से मिली आईडी और फोटो निठारी कांड वाले सुरेंद्र कोली से मैच करती है.
देश के सबसे चर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाले मामलों में से एक, निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली ने खुदकुशी कर ली है. सुरेंद्र कोली लंबे समय तक इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सुर्खियों में रहा था. जेल से रिहा होने के बाद वह उत्तराखंड के हरिद्वार में रह रहा था. हरिद्वार में एक चाय की दुकान चला रहा था. इसी चाय की दुकान में ही उसने फांसी लगा ली.