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'ऐसा एक्शन लो कि अपराधियों के मन में खौफ रहे...', दिल्ली-NCR में रेप केस पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस व्यवस्था पर कड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट ने पुलिस से अपराध रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने, बीट पेट्रोलिंग बढ़ाने और असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा.

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सुप्रीम कोर्ट ने यौन अपराधों के खिलाफ पुलिस को सख्त कार्रवाई के लिए कहा है
सुप्रीम कोर्ट ने यौन अपराधों के खिलाफ पुलिस को सख्त कार्रवाई के लिए कहा है

दिल्ली-NCR में रेप के मामलों को लेकर स्वत: संज्ञान से शुरू हुई जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कई अहम टिप्पणियां कीं. कोर्ट ने पुलिस से गश्त बढ़ाने और अपराध होने के बाद आरोपी को गिरफ्तार करने के बजाय अपराध को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने को कहा. कोर्ट ने इस दौरान पुलिस से साफ कहा कि इन अपराधियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए कि इनके मन में अपराध को लेकर डर रहे. मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोगों की सुरक्षा के लिए बीट पेट्रोलिंग बेहद अहम है. कोर्ट ने सवाल किया कि पुलिस की गाड़ियां गश्त करने के बजाय एक ही जगह खड़ी क्यों रहती हैं? पुलिस को लगातार इलाकों में घूमना चाहिए. कोर्ट ने अंधेरे वाले इलाकों को लेकर भी सवाल उठाए. पूछा कि ऐसे स्थानों पर रोशनी की व्यवस्था करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? अदालत ने पुलिस से कहा कि वह स्थानीय लोगों से बात करे और स्ट्रीट लाइट, असामाजिक तत्वों तथा अन्य समस्याओं को लेकर उनकी शिकायतों को सुने.

'अवैध ढाबों और शराब की दुकानों पर हो सख्त कार्रवाई'
सुप्रीम कोर्ट ने उन 'अवैध भोजनालयों और शराब की दुकानों' का भी जिक्र किया, जहां असामाजिक तत्वों के जमा होने की शिकायतें सामने आती हैं. कोर्ट ने पुलिस से इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा. अदालत ने कहा कि कानून तोड़ने वालों में इस बात का डर होना चाहिए कि गलत काम करने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी. कोर्ट ने बीट पुलिसिंग पर जोर देते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों को रिहायशी इलाकों में जाना चाहिए और इस बात की जानकारी रखनी चाहिए कि किस इलाके में कौन रह रहा है और संदिग्ध गतिविधियां तो नहीं हो रही हैं.

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'CCTV लगाना ही काफी नहीं, निगरानी भी जरूरी'
सुप्रीम कोर्ट ने सीसीटीवी कैमरों की निगरानी को लेकर भी पुलिस से सवाल किए. अदालत ने पूछा कि क्या सीसीटीवी फुटेज की नियमित निगरानी की जा रही है? सीसीटीवी से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि अपराध के समय कौन मौजूद था और इससे अपराध सुलझाया जा सकता है, लेकिन सवाल यह है कि अपराध को होने से कैसे रोका जाए.

कोर्ट ने कहा कि हर पार्क में हर जगह कैमरे लगाना संभव नहीं है, लेकिन कम से कम प्रवेश और निकास के रास्तों पर निगरानी की व्यवस्था होनी चाहिए. सिर्फ कैमरे लगा देना पर्याप्त नहीं है, उनकी फुटेज पर नजर रखना भी जरूरी है.

'हर लड़की हमारी बहन, पुलिस के लिए यह चुनौती'
सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने पुलिस से कहा, 'हम आपसे बड़ी उम्मीद के साथ यह कह रहे हैं. आपको इस चुनौती पर खरा उतरना होगा. हर लड़की जिसके साथ छेड़छाड़ या रेप होता है, वह हमारी बहन है. यह पुलिस के लिए चुनौती है.' उन्होंने कहा कि पुलिस से जो अपेक्षाएं हैं, उस पर उसे खरा उतरना चाहिए और किसी कमी की वजह से ऐसी घटनाएं नहीं होने दी जानी चाहिए. कोर्ट ने आगामी त्योहारों को देखते हुए भी पुलिस को सतर्क रहने को कहा. अदालत ने दुर्गा पूजा और दिवाली का जिक्र करते हुए कहा कि इस दौरान असामाजिक तत्वों की गतिविधियां बढ़ सकती हैं, इसलिए पुलिस को पहले से कदम उठाने होंगे.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आज पुलिस के पास अपराधी को खोजकर गिरफ्तार करने के लिए तकनीक और संसाधन मौजूद हैं, लेकिन सिर्फ गिरफ्तारी समाधान नहीं है. सबसे महत्वपूर्ण अपराध को होने से रोकना है.

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