बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की तरक्की का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि कुछ ताकतें देश को अस्थिर करना चाहती हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी ताकतें देश के भीतर और बाहर दोनों जगह मौजूद हैं और इनके बीच एक गठजोड़ दिखाई देता है. उन्होंने विजयादशमी पर प्रधानमंत्री के भाषण का हवाला देते हुए तीन एजेंडे गिनाए.
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत लगातार आगे बढ़ रहा है और वैश्विक मंच पर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है. लेकिन कुछ ताकतें ऐसी हैं, जिन्हें भारत का विकास पसंद नहीं आ रहा है. ये ताकतें देश के भीतर भी हैं और बाहर भी. इनके बीच एक साफ गठजोड़ दिखाई देता है. दुनिया में हाल के घटनाक्रम इस तस्वीर को और साफ कर रहे हैं. विजयादशमी पर प्रधानमंत्री ने देश को स्पष्ट संदेश दिया कि भारत को अस्थिर करने वाली ताकतों के तीन प्रमुख एजेंडे हैं. पहला, सत्ता में आकर लूट करना. दूसरा, समाज में विभाजन पैदा करना. तीसरा, भारतीय संस्कृति और धर्म का विरोध करना."
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'रिजीम चेंज की बात करने वालों का सपना टूटेगा'
त्रिवेदी ने शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की विरासत का दावा करने वालों और संजय राउत के बयानों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, "यह सचमुच हैरान करने वाली बात है कि जो लोग बालासाहेब ठाकरे की विरासत के सही उत्तराधिकारी होने का दावा करते हैं, वे अब उन्हीं ताकतों के साथ खड़े हैं जो हमारे धर्म और संस्कृति को खत्म करना चाहती हैं. वे पूरे भरोसे के साथ कहते हैं कि वियतनाम से आने दीजिए, फिर 'रिजीम चेंज' हो जाएगा. संजय राउत के पास राहुल गांधी को लेकर ऐसी कौन सी लीड, राज या जानकारी है, जिसके बारे में कांग्रेस के अपने नेताओं को भी पता नहीं है? ये कैसी साजिश की कड़ियां हैं? प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व, देश के भरोसे और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता के सामने आपका यह सपना टूट जाएगा."
'हर आंदोलन के पीछे एक ही एजेंडा'
बीजेपी सांसद ने अलग-अलग मुद्दों पर उठने वाले सवालों को भी एक ही एजेंडे से जोड़ने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "कभी एलआईसी, कभी एचएएल, एसबीआई, सेबी, वैक्सीन, ईवीएम या मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाए जाते हैं. इनकी मांगें कभी खत्म नहीं होतीं. रावण के दस सिर की तरह एक मांग पूरी होने पर दूसरी सामने आ जाती है. इसकी जड़ को समझना जरूरी है. हर आंदोलन में एक जैसे शब्दों और नारों का इस्तेमाल होता है. हमें समझना होगा कि इसके पीछे कौन सी ताकतें काम कर रही हैं."
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त्रिवेदी ने आगे कहा, "रामायण में रावण माता सीता का हरण करने आया, तो वह अपने असली रूप में नहीं, बल्कि साधु के भेष में आया था. आज भी कई ताकतें अलग-अलग मुखौटे पहनकर काम कर रही हैं. उनका असली मकसद केवल उन मांगों को उठाना नहीं है, जिनकी वे बात करती हैं. उनका लक्ष्य हिंसक टकराव और साजिश के जरिए 'रिजीम चेंज' करना है."